जबलपुर में शादी के 99 दिन बाद 27 वर्षीय वकील कविता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पिता ने सेना में मेजर डॉक्टर पति और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न व हत्या का आरोप लगाया है। मामला अब न्यायालय में विचाराधीन है।
जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक नवविवाहिता वकील की शादी के महज 99 दिन बाद हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के पिता ने सेना में कार्यरत मेजर डॉक्टर पति और ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ना तथा हत्या का आरोप लगाया है। मामले को लेकर परिवार पिछले एक वर्ष से न्याय की मांग कर रहा है।
शादी के कुछ महीने बाद हुई संदिग्ध मौत
चेन्नई निवासी पी. दक्षिणामूर्ति की 27 वर्षीय बेटी कविता पेशे से अधिवक्ता थीं और मद्रास हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करती थीं। मार्च 2025 में उनका विवाह सेना में मेजर डॉक्टर के पद पर कार्यरत ओम नागार्जुन से हुआ था। परिवार के अनुसार विवाह के 99 दिन बाद, 9 जून 2025 की रात कविता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

पिता का कहना है कि उसी दिन वह स्वयं बेटी को ससुराल छोड़कर आए थे। उनके मुताबिक कविता पूरी तरह स्वस्थ थी और भविष्य को लेकर उत्साहित थी। रात में परिवार को सूचना मिली कि वह बाथरूम में गिर गई है और अस्पताल में भर्ती है। अगले दिन जब परिवार अस्पताल पहुंचा तो कविता वेंटिलेटर पर थी और कुछ समय बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
दहेज मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप
मृतका के पिता ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद उनकी बेटी को लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। उनका दावा है कि कविता को घर के कामकाज के लिए मजबूर किया जाता था, जबकि घर में पहले से घरेलू सहायक मौजूद थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बेटी को अपमानित किया जाता था और उसके साथ बॉडी शेमिंग जैसी घटनाएं भी होती थीं।
परिवार का कहना है कि विवाह से पहले लड़के पक्ष की मांगों के अनुसार करीब 100 तोला सोना, 20 लाख रुपये के हीरे के आभूषण, एसयूवी वाहन, चांदी के सामान और अन्य घरेलू वस्तुएं दी गई थीं। इसके बावजूद विवाह के बाद अतिरिक्त धनराशि की मांग की जाती रही। पिता के अनुसार पहले 50 लाख रुपये और बाद में दो करोड़ रुपये की मांग अस्पताल निर्माण के नाम पर की गई।
अस्पताल पहुंचने में देरी पर उठे सवाल
परिवार के अधिवक्ता मनीष वर्मा ने मामले में कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि घटना वाली रात कविता को अस्पताल ले जाने में असामान्य देरी हुई। परिवार का दावा है कि घर से अस्पताल की दूरी बहुत कम थी, लेकिन अस्पताल पहुंचने का दर्ज समय कई घंटे बाद का है।
अधिवक्ता के अनुसार यह अंतराल संदेह पैदा करता है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर दो गंभीर चोटों का उल्लेख है, जिनकी परिस्थितियों को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। परिवार इन चोटों की विस्तृत जांच की मांग कर रहा है।
पुलिस कार्रवाई और न्याय की मांग
मृतका के परिजनों ने स्थानीय पुलिस पर मामले में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शिकायत देने के बावजूद लंबे समय तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। बाद में उच्च अधिकारियों से भी संपर्क किया गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
इसके बाद परिवार ने अदालत का रुख किया और मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू की। फिलहाल प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और वे चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके।
जांच पूरी होने तक आरोप साबित नहीं
मामले में लगाए गए सभी आरोप मृतका के परिवार और उनके अधिवक्ता के दावों पर आधारित हैं। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया और जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट अभी सामने आना बाकी है। ऐसे में मामले की सच्चाई का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।












