दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों पर हिंसक हमला हुआ। उन्होंने पुलिसकर्मियों के पक्ष को भी सामने लाने और निष्पक्ष जांच की मांग की।
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विवादित प्रदर्शन और उसके बाद संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर अब घायल पुलिसकर्मियों के परिवार भी सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई पुलिसकर्मियों के परिजनों ने घटना के दौरान अपने परिवार के सदस्यों पर हुए हमलों का विवरण साझा किया और कहा कि पूरे घटनाक्रम को केवल एक पक्ष से नहीं देखा जाना चाहिए।
परिजनों का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए और कई जवानों को गंभीर चोटें आईं। उनका आरोप है कि सार्वजनिक चर्चा और सोशल मीडिया पर केवल प्रदर्शनकारियों के दृष्टिकोण को प्रमुखता मिली, जबकि ड्यूटी निभाते हुए घायल हुए पुलिसकर्मियों की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
परिजनों ने क्या कहा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल एक पुलिस अधिकारी की बेटी ने बताया कि घटना वाले दिन उनके पिता देर रात गंभीर रूप से घायल अवस्था में घर पहुंचे। उन्होंने कहा कि उनके पिता की वर्दी खून से सनी हुई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिवार का कहना है कि इसके बावजूद सोशल मीडिया पर पुलिस की भूमिका को लेकर कई तरह की आलोचनाएं हुईं, जबकि घायल सुरक्षाकर्मियों की स्थिति पर बहुत कम चर्चा हुई। एक अन्य घायल सहायक उपनिरीक्षक (ASI) की पत्नी ने कहा कि ड्यूटी के दौरान उनके पति पर पत्थरों और अन्य वस्तुओं से हमला किया गया।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिसकर्मी भी जोखिम उठाते हैं और उनके अधिकारों तथा सुरक्षा पर भी गंभीर चर्चा होनी चाहिए। घायल अधिकारी के बेटे ने बताया कि उनके पिता के सिर में गंभीर चोट आई थी और इलाज के दौरान टांके लगाने पड़े। उन्होंने कहा कि परिवार के लिए यह घटना मानसिक रूप से भी बेहद कठिन रही।
प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ था
जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के बाद राजधानी में संसद मार्च के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की घटनाएं सामने आई थीं। अधिकारियों के अनुसार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। पुलिस का कहना है कि हिंसा के दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी घायल हुए। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार 148 से अधिक पुलिसकर्मियों और सुरक्षा कर्मियों को चोटें आई थीं, जिनमें कुछ गंभीर रूप से घायल बताए गए। हालांकि प्रदर्शन से जुड़े कई संगठनों और प्रतिभागियों ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर अपने-अपने आरोप लगाए हैं। इस कारण पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही है।

सोशल मीडिया पर बढ़ी बहस
घटना के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में वीडियो और तस्वीरें वायरल हुईं। कई पोस्ट में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई, जबकि अन्य पोस्ट में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो अक्सर पूरे घटनाक्रम का केवल एक हिस्सा दिखाते हैं। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच रिपोर्ट, वीडियो विश्लेषण और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण होते हैं।
कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती
बड़े सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस के सामने दोहरी चुनौती होती है। एक ओर नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करनी होती है, वहीं दूसरी ओर हिंसा, तोड़फोड़ और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी पुलिस की जिम्मेदारी होती है। यदि किसी प्रदर्शन में असामाजिक तत्व शामिल हो जाते हैं तो स्थिति तेजी से नियंत्रण से बाहर जा सकती है। ऐसे मामलों में पुलिस को कानून के दायरे में रहते हुए कार्रवाई करनी पड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान बेहतर समन्वय, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और संवाद की आवश्यकता है ताकि हिंसक टकराव से बचा जा सके।
निष्पक्ष जांच की आवश्यकता
घटना को लेकर विभिन्न पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण पहलू निष्पक्ष और पारदर्शी जांच माना जा रहा है। जांच एजेंसियां वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, पुलिस दस्तावेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर सकती हैं। यदि किसी भी पक्ष द्वारा कानून का उल्लंघन किया गया है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा करना भी न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पुलिस परिवारों की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद परिवारों ने कहा कि घायल पुलिसकर्मियों के योगदान और उनके परिवारों की पीड़ा को भी सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान घायल होने वाले सुरक्षाकर्मियों को उचित सम्मान, चिकित्सा सहायता और न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी अपील की कि किसी भी घटना पर निष्कर्ष निकालने से पहले सभी पक्षों की बात सुनी जाए और जांच पूरी होने का इंतजार किया जाए।











