जापान ने 48 साल बाद बढ़ाई वीजा फीस, विदेशी यात्रियों और प्रवासियों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

Japan ने लगभग पांच दशक बाद वीजा शुल्क में बड़ा इजाफा किया है। 1 जुलाई से सिंगल-एंट्री वीजा शुल्क 15,000 येन और मल्टी-एंट्री वीजा शुल्क 30,000 येन हो जाएगा।

Japan ने लगभग पांच दशक बाद वीजा शुल्क में बड़ा इजाफा किया है। 1 जुलाई से सिंगल-एंट्री वीजा शुल्क 15,000 येन और मल्टी-एंट्री वीजा शुल्क 30,000 येन हो जाएगा। सरकार ने इसका कारण महंगाई और विनिमय दर में बदलाव बताया है।

टोक्यो: जापान ने लगभग पांच दशक बाद अपने वीजा शुल्क में बड़ा बदलाव करते हुए विदेशी नागरिकों के लिए वीजा फीस में पांच गुना तक बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 1 जुलाई से लागू हो गई हैं। यह 1978 के बाद पहली बार है जब जापान सरकार ने वीजा शुल्क में व्यापक संशोधन किया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला बढ़ती महंगाई, मुद्रा विनिमय दरों में बदलाव और प्रशासनिक लागतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत सिंगल-एंट्री वीजा की फीस 3,000 येन से बढ़ाकर 15,000 येन कर दी गई है, जबकि मल्टीपल-एंट्री वीजा के लिए अब 30,000 येन शुल्क देना होगा। पहले इसके लिए 6,000 येन का भुगतान करना पड़ता था। इस फैसले का असर जापान जाने वाले पर्यटकों, छात्रों, व्यवसायिक यात्रियों और अन्य विदेशी नागरिकों पर पड़ेगा।

लगभग 50 वर्षों बाद हुआ बड़ा बदलाव

जापान के विदेश मंत्रालय के अनुसार वीजा शुल्क में यह पहला बड़ा संशोधन है जो 1978 के बाद लागू किया गया है। विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने कहा कि पिछले कई दशकों में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, मुद्रास्फीति और विनिमय दरों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं, जबकि वीजा शुल्क लगभग अपरिवर्तित रहा था।

सरकार का मानना है कि मौजूदा शुल्क संरचना अब वास्तविक प्रशासनिक लागतों को प्रतिबिंबित नहीं करती थी। इसी कारण फीस को नए आर्थिक परिदृश्य के अनुरूप संशोधित किया गया है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसे नहीं लगता कि इस बढ़ोतरी का अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर तत्काल कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

जापानी येन की कमजोरी बनी प्रमुख वजह

विशेषज्ञों के अनुसार जापान के इस फैसले के पीछे देश की मुद्रा येन की लगातार कमजोरी भी एक बड़ा कारण है। 2021 के बाद से जापानी येन लगातार दबाव में रहा है और हाल के वर्षों में यह कई प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अपने सबसे निचले स्तरों के करीब पहुंच गया है।

कमजोर येन ने विदेशी पर्यटकों के लिए जापान को अपेक्षाकृत सस्ता पर्यटन गंतव्य बना दिया है। यही वजह है कि महामारी के बाद जापान में विदेशी पर्यटकों की संख्या रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार अब बढ़ती मांग और प्रशासनिक बोझ को देखते हुए वीजा शुल्क से अतिरिक्त राजस्व प्राप्त करना चाहती है।

रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे विदेशी पर्यटक

कोविड-19 महामारी के बाद अंतरराष्ट्रीय यात्रा गतिविधियों में तेजी से सुधार हुआ है। जापान इस वैश्विक पर्यटन पुनरुद्धार का सबसे बड़ा लाभ उठाने वाले देशों में शामिल रहा है।

पिछले वर्ष जापान में 4.27 करोड़ से अधिक विदेशी पर्यटक पहुंचे, जो देश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। टोक्यो, क्योटो, ओसाका और होक्काइडो जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

पर्यटन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि वीजा शुल्क में बढ़ोतरी के बावजूद जापान की लोकप्रियता पर बहुत अधिक असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि देश सांस्कृतिक विरासत, आधुनिक तकनीक और सुरक्षित यात्रा अनुभव के लिए दुनिया भर में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

जापान ने 48 साल बाद बढ़ाई वीजा फीस, विदेशी यात्रियों और प्रवासियों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

केवल वीजा ही नहीं, अन्य आव्रजन शुल्क भी बढ़े

जापान सरकार ने केवल वीजा शुल्क में ही वृद्धि नहीं की है, बल्कि विदेशी नागरिकों से जुड़े कई अन्य प्रशासनिक शुल्कों में भी बड़े बदलाव किए हैं। मई में जापान की संसद के उच्च सदन ने एक विधेयक पारित किया, जिसके तहत स्थायी निवास (Permanent Residency) से संबंधित शुल्कों की अधिकतम सीमा में भारी बढ़ोतरी की गई है।

नई व्यवस्था के अनुसार स्थायी निवास आवेदन की अधिकतम फीस 10,000 येन से बढ़ाकर 300,000 येन तक की जा सकती है। यह मौजूदा सीमा से 30 गुना अधिक है। इसके अलावा निवास स्थिति (Residency Status) में बदलाव या वीजा अवधि बढ़ाने के लिए भी शुल्क में दस गुना तक वृद्धि की गई है। अब इन सेवाओं के लिए 100,000 येन तक शुल्क लिया जा सकेगा, जबकि पहले यह राशि 10,000 येन थी।

अन्य विकसित देशों के बराबर लाने की कोशिश

जापानी अधिकारियों का तर्क है कि देश के वीजा और आव्रजन शुल्क अन्य विकसित देशों की तुलना में काफी कम थे। सरकार का मानना है कि नई फीस संरचना जापान को अन्य प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समान स्तर पर लाने में मदद करेगी।

उदाहरण के लिए, अमेरिका में गैर-आप्रवासी वीजा आवेदन शुल्क आमतौर पर 185 डॉलर से 315 डॉलर के बीच होता है। वहीं ब्रिटेन में छह महीने तक के सामान्य विजिटर वीजा के लिए लगभग 135 पाउंड शुल्क देना पड़ता है। इन आंकड़ों की तुलना में जापान की नई वीजा फीस अभी भी कई मामलों में प्रतिस्पर्धी मानी जा रही है।

छात्रों और प्रवासियों पर क्या होगा असर?

हालांकि पर्यटन क्षेत्र को लेकर सरकार आश्वस्त दिखाई दे रही है, लेकिन शिक्षा और रोजगार के लिए जापान जाने वाले लोगों पर इसका असर पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय छात्र, शोधकर्ता, विदेशी कर्मचारी और दीर्घकालिक निवास की योजना बनाने वाले लोगों के लिए आवेदन प्रक्रिया अब पहले की तुलना में अधिक महंगी हो जाएगी। खासकर विकासशील देशों से आने वाले आवेदकों के लिए बढ़ी हुई फीस अतिरिक्त आर्थिक दबाव पैदा कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शुल्क कुछ संभावित आवेदकों को वैकल्पिक देशों की ओर भी आकर्षित कर सकता है, हालांकि जापान की मजबूत अर्थव्यवस्था और रोजगार अवसर अभी भी उसे प्रतिस्पर्धी बनाए रखते हैं।

पर्यटन उद्योग की प्रतिक्रिया

पर्यटन उद्योग से जुड़े कई संगठनों ने सरकार के फैसले को संतुलित कदम बताया है। उनका कहना है कि जापान में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और प्रशासनिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है।

हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में शुल्क में और वृद्धि की जाती है, तो इसका असर बजट यात्रियों और छात्रों पर अधिक पड़ सकता है।

जापान की नई रणनीति क्या संकेत देती है?

वीजा और आव्रजन शुल्क में बढ़ोतरी जापान की व्यापक आर्थिक और प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार एक ओर पर्यटन और विदेशी निवेश को बढ़ावा देना चाहती है, वहीं दूसरी ओर वह आव्रजन सेवाओं की लागत और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन भी सुनिश्चित करना चाहती है।

बढ़ती विदेशी आबादी, रिकॉर्ड पर्यटन और वैश्विक आर्थिक बदलावों के बीच जापान अपने आव्रजन ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई फीस नीति विदेशी यात्रियों और अंतरराष्ट्रीय आवेदकों के व्यवहार को किस हद तक प्रभावित करती है।

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