नौकरी के साथ BPSC की तैयारी कर प्रवीण बने RDO, 845वीं रैंक से हासिल की सफलता

मुजफ्फरपुर के प्रवीण कुमार ने नौकरी के साथ तैयारी कर BPSC 70वीं परीक्षा में 845वीं रैंक हासिल की। अब उनका चयन RDO पद पर हुआ है।

मुजफ्फरपुर के मणिकपुर निवासी प्रवीण कुमार ने नौकरी के साथ तैयारी करते हुए BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 845वीं रैंक हासिल की। उनकी सफलता पर गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

मुजफ्फरपुर: BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता हासिल कर मणिकपुर गांव के प्रवीण कुमार ने ग्रामीण विकास पदाधिकारी (RDO) बनने का सपना पूरा किया है। वर्तमान में वरिष्ठ ऑडिटर के पद पर कार्यरत प्रवीण ने व्यस्त नौकरी के बीच पढ़ाई जारी रखी और 845वीं रैंक हासिल कर युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया।

नौकरी के साथ जारी रखी तैयारी, हासिल की बड़ी सफलता

मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखंड के मणिकपुर गांव निवासी प्रवीण कुमार ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत के बल पर किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में उन्होंने 845वीं रैंक प्राप्त कर ग्रामीण विकास पदाधिकारी (RDO) के पद पर चयन हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि ने पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है।

प्रवीण की सफलता इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने नौकरी करते हुए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखी। आमतौर पर नौकरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना कठिन माना जाता है, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और लगातार मेहनत करते रहे।

केंद्र सरकार से लेकर सीनियर ऑडिटर तक का सफर

प्रवीण कुमार पहले केंद्र सरकार के शहरी एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय में असिस्टेंट के पद पर कार्य कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने एसएससी सीजीएल परीक्षा पास की और वरिष्ठ ऑडिटर के पद पर अपनी सेवाएं देने लगे। जिम्मेदार सरकारी नौकरी के बावजूद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना जीवित रखा।

उन्होंने सीमित समय का बेहतर प्रबंधन करते हुए नियमित अध्ययन जारी रखा। इसी अनुशासन और समर्पण का परिणाम रहा कि BPSC जैसी कठिन परीक्षा में उन्होंने सफलता हासिल कर ली। उनकी उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो समय की कमी को अपनी तैयारी में बाधा मानते हैं।

परिवार और पूर्वजों से मिली प्रेरणा

प्रवीण एक ऐसे परिवार से आते हैं जहां समाज और देश सेवा की मजबूत परंपरा रही है। वे क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय सरयू प्रसाद के प्रपौत्र और स्वर्गीय राजदेव प्रसाद के पौत्र हैं। परिवार का यह गौरवशाली इतिहास उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बना।

उनके पिता प्रमोद कुमार वर्मा और माता शबनम वर्मा ने हर कठिन दौर में उनका हौसला बढ़ाया। प्रवीण का कहना है कि नौकरी के साथ पढ़ाई के लिए समय निकालना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन परिवार के विश्वास और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।

गांव में खुशी का माहौल, युवाओं को मिली नई प्रेरणा

जैसे ही ग्रामीण विकास पदाधिकारी पद पर चयन की सूचना मणिकपुर गांव और मीनापुर क्षेत्र में पहुंची, लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने मिठाइयां बांटकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रवीण ने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

उनकी सफलता ग्रामीण परिवेश से आने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। यह उपलब्धि बताती है कि कठिन परिस्थितियां और व्यस्त दिनचर्या भी उस व्यक्ति को नहीं रोक सकतीं, जिसके पास स्पष्ट लक्ष्य, मेहनत और धैर्य हो। प्रवीण कुमार की कहानी अब उत्तर बिहार के हजारों प्रतियोगी छात्रों को आगे बढ़ने का नया हौसला दे रही है।

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