जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची के अगले महीने भारत दौरे पर आने की संभावना जताई जा रही है। इस प्रस्तावित यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात नरेंद्र मोदी से होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसके प्रभाव के बीच एशिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं—भारत और जापान—अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इसी क्रम में जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi अगले महीने भारत का दौरा कर सकती हैं, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री Narendra Modi से होने की संभावना है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह उच्चस्तरीय शिखर बैठक भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में आयोजित की जा सकती है। हालांकि भारतीय अधिकारियों की ओर से अभी इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन दोनों देशों के बीच तैयारियों की चर्चा तेज हो गई है।
असम में हो सकती है ऐतिहासिक भारत-जापान शिखर बैठक
जापानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री सनाए तकाइची और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच यह दूसरी आमने-सामने की बैठक होगी। इससे पहले दोनों नेता पिछले वर्ष G20 शिखर सम्मेलन के दौरान जोहान्सबर्ग में मिले थे, जहां उन्होंने वैश्विक स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई थी।इस बार प्रस्तावित बैठक असम में होने की संभावना है, जो भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में आर्थिक और रणनीतिक विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुई है। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। ‘India-Japan Act East Forum’ के तहत पूर्वोत्तर भारत में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर दोनों देशों की साझेदारी पहले से ही जारी है। असम में प्रस्तावित यह शिखर बैठक इन परियोजनाओं को और गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

पश्चिम एशिया संकट के बीच रणनीतिक चर्चा संभव
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ा दिया है। ईरान, अमेरिका और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख चिंता का विषय बन गया है। भारत और जापान दोनों देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए समुद्री मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य, पर काफी हद तक निर्भर हैं।
ऐसे में दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला स्थिरता और रणनीतिक साझेदारी के नए आयाम तय कर सकती है।
महत्वपूर्ण खनिज और तकनीकी सहयोग पर फोकस
प्रस्तावित बैठक में दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हो सकती है। वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर्स और ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी में इन खनिजों की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत और जापान पहले से ही तकनीकी सहयोग, निवेश और औद्योगिक साझेदारी के क्षेत्र में एक-दूसरे के प्रमुख भागीदार हैं। इस बैठक के दौरान इन क्षेत्रों में नई पहलों की घोषणा की संभावना जताई जा रही है।
असम में प्रस्तावित यह शिखर सम्मेलन भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत सरकार लंबे समय से इस क्षेत्र को एशिया के आर्थिक गेटवे के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। जापान पहले भी पूर्वोत्तर भारत में कई बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं में निवेश कर चुका है। ऐसे में इस यात्रा से क्षेत्र में नए निवेश और परियोजनाओं के विस्तार की उम्मीद बढ़ गई है।













