JDU में बढ़ा अंदरूनी टकराव: सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया शुरू, पार्टी विरोधी गतिविधियों पर बड़ा एक्शन

JDU ने सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ सख्त कदम उठाया। लोकसभा स्पीकर को अयोग्यता नोटिस भेजा, पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप से बिहार राजनीति गरमाई।

JDU ने सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ अयोग्यता की प्रक्रिया शुरू की है। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप हैं। लोकसभा स्पीकर को नोटिस भेजा गया, जिससे बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

Patna: बिहार की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी ने बांका से सांसद Giridhari Yadav के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब Nitish Kumar के दिल्ली दौरे की चर्चा चल रही है, जिससे इस पूरे मामले को और ज्यादा राजनीतिक महत्व मिल गया है।

लोकसभा स्पीकर को सौंपा गया नोटिस

जदयू संसदीय दल के नेता Dileshwar Kamat ने लोकसभा स्पीकर Om Birla को एक आधिकारिक नोटिस सौंपा है। इस नोटिस में गिरधारी यादव को अयोग्य (disqualify) घोषित करने की मांग की गई है। पार्टी का आरोप है कि वे लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ बयान दे रहे थे और ऐसी गतिविधियों में शामिल थे जो पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही थीं।

यह कदम जदयू के भीतर अनुशासन बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इससे यह भी साफ है कि पार्टी के अंदर असहमति अब गंभीर रूप ले चुकी है।

पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप

Giridhari Yadav पर लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लग रहे थे। उन्होंने कई मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से पार्टी के रुख से अलग राय रखी, जिससे नेतृत्व नाराज हो गया। खासकर SIR जैसे मुद्दों पर उनकी बयानबाजी को पार्टी ने गंभीरता से लिया।

JDU में बढ़ा अंदरूनी टकराव: सांसद गिरधारी यादव की सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया शुरू, पार्टी विरोधी गतिविधियों पर बड़ा एक्शन

इसके अलावा, वे कई बार बिहार सरकार की नीतियों की आलोचना करते नजर आए। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इस तरह के बयान न केवल संगठन को कमजोर करते हैं बल्कि जनता के बीच गलत संदेश भी भेजते हैं।

पहले से चल रहा था मतभेद

गिरधारी यादव और जदयू के बीच टकराव कोई नया नहीं है। वे पहले भी कई मौकों पर पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग राय रखते हुए दिखाई दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा थी कि वे धीरे-धीरे पार्टी से दूरी बना रहे हैं। यह दूरी अब खुलकर सामने आ गई है और पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि जदयू अब आंतरिक असहमति को लेकर सख्त रुख अपना रही है।

गिरधारी यादव की प्रतिक्रिया

सदस्यता पर संकट के बीच Giridhari Yadav ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भी पार्टी विरोधी काम नहीं किया है और जब से वे Nitish Kumar के साथ हैं, तब से पार्टी के प्रति पूरी निष्ठा रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि जब लोकसभा स्पीकर की ओर से उन्हें समन मिलेगा, तो वे अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे। उनकी इस प्रतिक्रिया से साफ है कि वे इस मामले में कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।

बेटे के RJD में जाने से बढ़ी हलचल

इस पूरे विवाद को और ज्यादा हवा तब मिली जब गिरधारी यादव के बेटे चाणक्य यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का दामन थाम लिया। उन्होंने बेलहर सीट से चुनाव भी लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस घटनाक्रम के बाद से ही गिरधारी यादव की पार्टी के प्रति निष्ठा पर सवाल उठने लगे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बेटे के इस कदम का असर जदयू नेतृत्व के फैसले पर भी पड़ा है।

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