झारखंड हाई कोर्ट ने LIC के तत्कालीन शाखा प्रबंधक बैजनाथ राय के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी। वहीं, बोकारो कोषागार से 3.15 करोड़ रुपये की कथित निकासी मामले में अन्नू पांडेय की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण आदेश दिए। जस्टिस एके चौधरी की अदालत ने LIC के तत्कालीन शाखा प्रबंधक बैजनाथ राय के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को निरस्त कर दिया। वहीं, बोकारो कोषागार के पुलिस विभाग के वेतन मद से कथित तौर पर 3.15 करोड़ रुपये की निकासी के मामले में आरोपी अन्नू पांडेय को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
LIC के तत्कालीन शाखा प्रबंधक को आपराधिक मामले में राहत
झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एके चौधरी की अदालत ने LIC के तत्कालीन शाखा प्रबंधक बैजनाथ राय के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को निरस्त कर दिया। अदालत ने धनबाद न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी की ओर से 30 मई 2019 को लिए गए संज्ञान और जारी किए गए समन आदेश को भी रद्द कर दिया। इसके साथ ही धनबाद सत्र न्यायालय के 22 नवंबर 2019 के आदेश को भी निरस्त कर दिया गया।

मामला बैजनाथ राय के खिलाफ दर्ज शिकायत से जुड़ा था। शिकायतकर्ता विजय कुमार साव ने आरोप लगाया था कि उनके पिता की दो LIC पॉलिसियों के मृत्यु दावा भुगतान को लेकर विवाद हुआ था। शिकायत के अनुसार, 30 जून 2014 को बैजनाथ राय अन्य आरोपितों के साथ उनके घर पहुंचे और उन्हें धमकी दी।
पुलिस जांच के बाद मामले में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की गई थी, जिसमें बैजनाथ राय को आरोपी नहीं बनाया गया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने विरोध-सह-शिकायत याचिका दाखिल की, जिसके आधार पर अदालत ने मामले में संज्ञान लिया था।
घर में प्रवेश और मारपीट के आरोप पर कोर्ट की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ घर में प्रवेश या वहां मौजूद रहने का आरोप तभी आपराधिक कृत्य बन सकता है, जब उसका उद्देश्य अपराध करना या किसी व्यक्ति को डराना, अपमानित करना अथवा परेशान करना हो।
अदालत ने पाया कि उपलब्ध तथ्यों के अनुसार बैजनाथ राय का शिकायतकर्ता के घर में प्रवेश वैध था। उनके अवैध रूप से घर में रुके रहने का कोई आरोप भी सामने नहीं आया।
मारपीट के आरोप पर अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के शपथ बयान में बैजनाथ राय की ओर से चोट पहुंचाने का कोई उल्लेख नहीं था। धक्का देने और चोट लगने का आरोप एक सह-आरोपित पर लगाया गया था।
अदालत ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर माना कि बैजनाथ राय के खिलाफ अपराध के आवश्यक तत्व स्थापित नहीं होते। ऐसे में उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ पूरी आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी।
3.15 करोड़ रुपये के कथित वेतन घोटाले में अग्रिम जमानत खारिज
दूसरे मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो कोषागार से पुलिस विभाग के वेतन मद में कथित तौर पर 3.15 करोड़ रुपये की निकासी के मामले में आरोपी अन्नू पांडेय को राहत नहीं दी। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
मामला सब-इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह के वेतन मद से करीब 20 महीने की अवधि में 3.15 करोड़ रुपये निकाले जाने के आरोप से जुड़ा है। अन्नू पांडेय की ओर से अदालत में दलील दी गई कि इस कथित वित्तीय गतिविधि से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
उनकी ओर से कहा गया कि कथित लेनदेन उनके पति कौशल कुमार पांडेय ने किया था। दलील के अनुसार, पति ने अन्नू पांडेय के नाम पर बैंक खाता खोला और उसमें कथित तौर पर राशि ट्रांसफर की गई। इसके बाद रकम उनके पति के खाते में स्थानांतरित कर दी गई।
सरकार ने अग्रिम जमानत का किया विरोध
राज्य सरकार की ओर से अन्नू पांडेय की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया गया। सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि अन्नू पांडेय अपने पति कौशल कुमार पांडेय के साथ उस बैंक खाते का संचालन कर रही थीं, जिसका इस्तेमाल कथित लेनदेन के लिए किया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अन्नू पांडेय को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया और उनकी याचिका खारिज कर दी। इस तरह एक ही दिन में हाई कोर्ट ने एक मामले में LIC के पूर्व शाखा प्रबंधक को आपराधिक कार्यवाही से राहत दी, जबकि दूसरे मामले में 3.15 करोड़ रुपये की कथित निकासी से जुड़े आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी।










