झारखंड से अक्तूबर में मानसून की विदाई, 5 दिन बारिश-गरज का दौर; 50 किमी/घंटे तक चलेगी तेज हवा

झारखंड में 21 से 26 सितंबर तक बारिश, गरज-चमक और वज्रपात का दौर रह सकता है। कुछ जगह 50 किमी/घंटे तक तेज हवा चलेगी, मानसून अक्तूबर में विदा होगा।
झारखंड से अक्तूबर में मानसून की विदाई, 5 दिन बारिश-गरज का दौर; 50 किमी/घंटे तक चलेगी तेज हवा
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झारखंड में मानसून की गतिविधियां अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। सितंबर का तीसरा सप्ताह चल रहा है और मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक राज्य में अगले कुछ दिनों तक बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर बना रह सकता है। 21 सितंबर से मौसम में बदलाव के बीच कई इलाकों में बादल छाने, हल्की से मध्यम बारिश होने तथा मेघ गर्जन के साथ वज्रपात की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकती है, जबकि 22 सितंबर के आसपास तेज हवा के झोंकों की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना बताई गई है।

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान में 23 से 25 सितंबर के बीच झारखंड के कुछ हिस्सों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। 26 सितंबर को भी राज्य में गरज-चमक और तेज हवा का असर रह सकता है। इसका मतलब यह है कि मानसून की विदाई से पहले झारखंड में मौसम एक बार फिर सक्रिय रह सकता है और लोगों को आने वाले दिनों में मौसम के अचानक बदलने का सामना करना पड़ सकता है।

रांची समेत राज्य के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहने की संभावना है। दिन के तापमान में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। रांची के साथ-साथ दूसरे जिलों में भी बारिश होने पर उमस से राहत मिल सकती है, लेकिन गरज-चमक और वज्रपात के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों में अधिकतम तापमान में करीब 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है।

21 सितंबर को राज्य में कई स्थानों पर बादल और बारिश की स्थिति बन सकती है। इस दौरान कुछ इलाकों में गरज के साथ बौछारें पड़ने तथा तेज हवा चलने की संभावना है। मौसम के इसी बदलाव के कारण स्थानीय स्तर पर बिजली चमकने और वज्रपात का खतरा भी बना रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में काम करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति विशेष सावधानी की मांग करती है, क्योंकि खुले खेतों में गरज-चमक के दौरान रहना जोखिम भरा हो सकता है।

22 सितंबर को हवा की रफ्तार में और तेजी आने की संभावना है। कुछ स्थानों पर हवा के झोंके 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। तेज हवा के साथ बारिश और बिजली चमकने की स्थिति में पेड़, बिजली के तार और अस्थायी ढांचे प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे मौसम में लोगों को अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर रहने से बचने और मौसम खराब होने पर सुरक्षित जगह पर जाने की सलाह दी जाती है।

23 सितंबर से बारिश की गतिविधियों में और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के चेतावनी पूर्वानुमान में इस दिन झारखंड में भारी बारिश की संभावना के साथ गरज-चमक और वज्रपात की स्थिति बताई गई है। इसके बाद 24 और 25 सितंबर को भी भारी बारिश के साथ मेघ गर्जन और आकाशीय बिजली की गतिविधियां हो सकती हैं। ऐसे में सितंबर के अंतिम सप्ताह की शुरुआत झारखंड में बारिश वाले मौसम के साथ होने की संभावना है।

मौसम में यह बदलाव बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में बनने वाली मौसमी गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में पूर्वी भारत के मौसम पर समुद्री क्षेत्र में बनने वाले सिस्टम का प्रभाव देखने को मिल सकता है। झारखंड में इसका असर बादल, बारिश और गरज-चमक के रूप में दिखाई दे सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार बारिश का यह दौर उन इलाकों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है।

झारखंड में मानसून की विदाई को लेकर भी लोगों की नजर मौसम पर बनी हुई है। सामान्य तौर पर राज्य से दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी वापसी अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह के आसपास होती है। उपलब्ध मौसम रिपोर्ट में इस बार भी अक्टूबर के दौरान मानसून की विदाई की संभावना जताई गई है। हालांकि मानसून की वापसी किसी एक तय तारीख से नहीं होती, बल्कि इसके लिए लगातार कई दिनों तक बारिश की गतिविधियों में कमी, वातावरण में नमी घटने और निचले स्तर पर प्रतिचक्रवाती परिस्थितियों जैसे मौसम संबंधी संकेतों को देखा जाता है।

इसलिए सितंबर के अंतिम सप्ताह में होने वाली बारिश को मानसून की तत्काल विदाई से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। मौसम विभाग के अनुसार 25 से 28 सितंबर के आसपास झारखंड में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इसके बाद ही मौसम की परिस्थितियों के आधार पर मानसून की वापसी को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी।

राज्य के किसानों के लिए सितंबर के आखिरी दिनों की बारिश काफी महत्वपूर्ण हो सकती है। झारखंड के कई हिस्सों में मानसून के दौरान बारिश सामान्य से कम रहने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में अगर सितंबर के अंतिम सप्ताह में अच्छी बारिश होती है तो खेतों में मौजूद खरीफ फसलों को नमी मिल सकती है। हालांकि बहुत तेज बारिश होने की स्थिति में निचले इलाकों में जलभराव और खेतों में पानी जमा होने की समस्या भी पैदा हो सकती है।

मौसम के इस दौर में सबसे बड़ी चिंता वज्रपात को लेकर है। झारखंड में मानसून के दौरान आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं होती रही हैं, इसलिए गरज-चमक शुरू होने पर लोगों को खुले मैदान, खेत, ऊंचे पेड़ और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए। बारिश के दौरान अगर तेज हवा चल रही हो तो कमजोर पेड़ों, टीन की छतों और अस्थायी संरचनाओं से दूरी बनाना भी जरूरी है।

शहरी इलाकों में भी तेज हवा और बारिश के कारण सड़कों पर जलजमाव, पेड़ की शाखाएं गिरने और यातायात प्रभावित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। दोपहिया वाहन चालकों को विशेष रूप से सावधानी बरतनी होगी। अगर किसी इलाके में तेज बारिश और बिजली चमक रही हो तो जरूरी न होने पर यात्रा टालना सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

रांची समेत झारखंड के कई जिलों में मौसम के तापमान में गिरावट से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है। बारिश और बादलों की वजह से दिन का तापमान नीचे आ सकता है, जबकि रात के समय मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहने की संभावना है। हालांकि बारिश के बीच अचानक धूप निकलने पर उमस दोबारा बढ़ सकती है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान से इतना स्पष्ट है कि झारखंड में मानसून अभी सक्रिय अवस्था में है और अगले कुछ दिन मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। 21 और 22 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवा, जबकि 23 से 25 सितंबर के बीच बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। 26 सितंबर को भी गरज-चमक और तेज हवाओं का असर बना रह सकता है।

ऐसे में लोगों को मौसम विभाग के स्थानीय अपडेट पर नजर रखनी चाहिए। किसानों को खेतों में काम करने के दौरान आसमान में अचानक बादल और बिजली चमकने पर सुरक्षित स्थान पर जाने की जरूरत है। शहरों में रहने वाले लोगों को तेज हवा के दौरान खुले में वाहन खड़ा करने और कमजोर पेड़ों के नीचे रुकने से बचना चाहिए। बिजली गिरने की आशंका के समय मोबाइल टावर, बिजली के खंभे और अन्य ऊंची संरचनाओं से दूरी रखना भी जरूरी है।

झारखंड से मानसून की पूरी विदाई अक्टूबर में होने की संभावना है, लेकिन उससे पहले सितंबर के आखिरी दिनों में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 25 से 28 सितंबर के आसपास बारिश बढ़ने की संभावना है और इसके बाद मानसून की वापसी की परिस्थितियां स्पष्ट होंगी। इसलिए आने वाले दिनों में झारखंड के मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल सकता है।

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