जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की एकता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने विभाजन की मांग को भ्रामक बताते हुए इसे जम्मू क्षेत्र के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ करार दिया।
Jammu-Kashmir: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि केंद्र शासित प्रदेश की एकता पर किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि राज्य के विभाजन की मांग न केवल भ्रामक है, बल्कि यह जम्मू क्षेत्र के दीर्घकालिक हितों के खिलाफ भी है। मुख्यमंत्री का यह बयान उस समय आया जब कुछ राजनीतिक समूह एक बार फिर क्षेत्रीय आधार पर बंटवारे की राजनीति को हवा देने की कोशिश कर रहे हैं। उमर अब्दुल्ला ने इसे जम्मू-कश्मीर की सदियों पुरानी एकता के लिए खतरा बताया और कहा कि ऐसी राजनीति से जनता को नुकसान के अलावा कुछ नहीं मिलता।
विभाजन की राजनीति पर सख्त संदेश
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के दो दिवसीय ब्लॉक अध्यक्ष सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग जम्मू-कश्मीर को बांटने की बात कर रहे हैं, वे जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह की मांगें जम्मू क्षेत्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। उमर अब्दुल्ला ने साफ किया कि जब तक केंद्र शासित प्रदेश में नेशनल कॉन्फ्रेंस का झंडा लहराता रहेगा, तब तक कोई भी ताकत क्षेत्रीय या धार्मिक आधार पर विभाजन का साहस नहीं कर पाएगी। उनका कहना था कि यह सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि उनकी सरकार की स्पष्ट नीति है।
नेकां सम्मेलन में एकता का संदेश
मुख्यमंत्री यहां पार्टी के दो दिवसीय ब्लॉक अध्यक्ष सम्मेलन के समापन सत्र में बोल रहे थे। इस सम्मेलन की अध्यक्षता नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने की थी। सोमवार से शुरू हुए इस आयोजन में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जमीनी मुद्दों पर चर्चा की और संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर विचार किया।

उमर अब्दुल्ला ने इस मंच से कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने का संदेश दिया और कहा कि जनता के बीच जाकर उन्हें यह समझाना जरूरी है कि विभाजन की राजनीति किस तरह नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने कहा कि नेकां की विचारधारा हमेशा से जम्मू-कश्मीर की एकता, भाईचारे और साझा पहचान को मजबूत करने की रही है।
‘दरबार मूव’ की बहाली का जिक्र
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पिछले साल 16 अक्टूबर को ‘दरबार मूव’ की बहाली का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने यह कदम उठाकर अपना चुनावी वादा पूरा किया है। ‘दरबार मूव’ एक ऐसी परंपरा है, जिसके तहत सरकार छह-छह महीने जम्मू और श्रीनगर में काम करती है। यह प्रथा लगभग 150 साल पहले डोगरा शासकों द्वारा शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के बीच प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना था। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह परंपरा जम्मू और कश्मीर के बीच आपसी समझ और जुड़ाव का प्रतीक रही है।
उपराज्यपाल द्वारा बंद की गई परंपरा
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि जून 2021 में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ‘दरबार मूव’ प्रथा को बंद कर दिया था। उन्होंने इस फैसले को जम्मू क्षेत्र के हितों के खिलाफ बताया। उमर अब्दुल्ला का कहना था कि जो लोग इस परंपरा को रोकने का समर्थन करते हैं, वे खुद को जम्मू का शुभचिंतक नहीं कह सकते। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक फैसलों का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है और ‘दरबार मूव’ जैसी व्यवस्था दोनों क्षेत्रों को समान महत्व देने का माध्यम रही है।
भाजपा नेताओं पर सीधा हमला
अपने भाषण में उमर अब्दुल्ला ने भाजपा नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग ‘दरबार मूव’ को रोकने या मेडिकल कॉलेज बंद होने पर जश्न मनाने जैसी बातें करते हैं, वे जम्मू के हितैषी होने का दावा नहीं कर सकते। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि इस तरह की संकीर्ण और विभाजनकारी राजनीति ने पहले भी जम्मू को नुकसान पहुंचाया है और आगे भी नुकसान पहुंचाती रहेगी। उन्होंने साफ कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ऐसी राजनीति को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
एकता को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता
उमर अब्दुल्ला ने दोहराया कि उनकी सरकार जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य की एकता सिर्फ नक्शे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के दिलों में बसती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, विभाजन की सोच न केवल विकास में बाधा डालती है, बल्कि समाज में अविश्वास और तनाव भी पैदा करती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार किसी भी ऐसी विचारधारा को पनपने नहीं देगी जो जम्मू-कश्मीर की साझा संस्कृति और भाईचारे को नुकसान पहुंचाए।











