झारखंड में JPSC परीक्षाओं की CID जांच में OMR और OSM में कथित छेड़छाड़ के आरोप सामने आए हैं। जांच के अनुसार पैसे लेकर अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाने और उन्हें परीक्षा में सफल कराने की कोशिश की गई।
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग की विभिन्न परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच कर रही CID को OMR और OSM में हेरफेर से जुड़े अहम बयान मिले हैं। जांच में TDPL के कुछ कर्मचारियों पर पैसे लेकर अभ्यर्थियों के अंक बदलने और चयन में मदद करने के आरोप सामने आए हैं। CID अब इन बयानों की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटा रही है।
JPSC परीक्षाओं में OMR और OSM से छेड़छाड़ का आरोप
झारखंड लोक सेवा आयोग की अलग-अलग परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान CID को परीक्षा प्रक्रिया में हेरफेर से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं। जांच एजेंसी के सामने पूर्व में गिरफ्तार परीक्षा संचालन एजेंसी TDPL के तकनीकी सपोर्ट कर्मचारी उस्मान ने OMR और OSM में कथित मैनिपुलेशन की जानकारी दी है।

उस्मान के कथित बयान के मुताबिक TDPL के कर्मचारी हेमंत और संजय OMR और OSM में बदलाव करने के काम में शामिल थे। CID अब तक सामने आए बयानों का सत्यापन कर रही है और आरोपों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
FRO और 14वीं JPSC समेत कई परीक्षाओं में गड़बड़ी का दावा
जांच के दौरान Forest Range Officer यानी FRO परीक्षा, 14वीं JPSC और JPSC Backlog परीक्षा समेत अन्य परीक्षाओं में कथित धांधली की जानकारी सामने आई है। उस्मान के कथित बयान में FRO परीक्षा में करीब 100, 14वीं JPSC में 100 से अधिक और बैकलॉग परीक्षा में 50 से 100 अभ्यर्थियों को पैसे के बदले पास कराने का दावा किया गया है।
हालांकि, इन सभी आरोपों की अभी CID की ओर से पुष्टि की जा रही है। जांच एजेंसी संबंधित लोगों के बयानों और उपलब्ध रिकॉर्ड को आपस में मिलाकर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
OMR में खाली छोड़े गए जवाब बदलने का आरोप
TDPL के गिरफ्तार निदेशक रामवीर सिंह के कथित बयान में OMR स्कैनिंग और मूल्यांकन प्रक्रिया में हेरफेर का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों की OMR शीट में खाली छोड़े गए विकल्पों को बाद में सही उत्तर के तौर पर बदला गया।
जांच में मेरिट से जुड़े डेटा, OSM, मुख्य परीक्षा के अंकों और इंटरव्यू से संबंधित कोड जेनरेशन में भी कथित अनियमितताओं की बात सामने आई है। कथित तौर पर कुछ अभ्यर्थियों के रोल नंबर उपलब्ध कराए जाते थे, जिसके आधार पर उनकी OMR शीट में बदलाव करने का दावा किया गया।
अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेने का दावा
जांच में सामने आए कथित बयानों के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों से चयन कराने के बदले लाखों रुपये लेने की बात कही गई है। FRO परीक्षा के संदर्भ में प्रति अभ्यर्थी आठ से दस लाख रुपये तक रकम लिए जाने का दावा किया गया है।
कुछ अन्य परीक्षाओं में भी अभ्यर्थियों के रोल नंबर उपलब्ध कराने और चयन में मदद के बदले बड़ी रकम के लेनदेन का आरोप सामने आया है। CID इन वित्तीय लेनदेन से जुड़े दावों की भी जांच कर रही है।
रांची के फ्लैट में उत्तर लिखवाने का भी आरोप
TDPL के गिरफ्तार मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी के कथित बयान में रांची के हरिओम टावर स्थित एक फ्लैट का इस्तेमाल कुछ अभ्यर्थियों की परीक्षा संबंधी मदद के लिए किए जाने का आरोप है।
बयान के मुताबिक दूसरे राज्यों से लोगों को बुलाकर कुछ अभ्यर्थियों के लिए उत्तर लिखवाने की व्यवस्था किए जाने का दावा किया गया। कुछ मामलों में बेहतर उत्तर लिखने वाले लोगों की मदद से अभ्यर्थियों की मुख्य परीक्षा के प्रदर्शन को बेहतर कराने और अंक बढ़वाने की बात भी जांच में सामने आई है।
वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी जांच के दायरे में
CID की जांच में सामने आए कुछ कथित बयानों में वरिष्ठ अधिकारियों के नामों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें IAS अधिकारी मनीष रंजन का नाम भी शामिल है। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम जांच में सामने आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता।
मनीष रंजन से जुड़े आरोपों को लेकर भी CID सत्यापन कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित बयानों में किए गए दावों की पुष्टि स्वतंत्र साक्ष्यों से होती है या नहीं।
फिलहाल JPSC परीक्षा घोटाले की जांच जारी है। CID परीक्षा प्रक्रिया में कथित OMR-OSM हेरफेर, अभ्यर्थियों से पैसों के लेनदेन और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही है।











