ओडिशा से बंगाल पहुंचा 53 किलो गांजा, दुर्गापुर में पुलिस ने तीन संदिग्ध तस्करों को पकड़ा

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर जिले में पुलिस ने 53 किलो गांजा बरामद कर तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, खेप ओडिशा से बस के जरिए लाई गई थी।

दुर्गापुर में पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए करीब 53 किलोग्राम गांजा बरामद किया। पुलिस के अनुसार, खेप ओडिशा से बस के जरिए लाई गई थी। मामले में तीन संदिग्ध गिरफ्तार हुए हैं और कथित तस्करी नेटवर्क की जांच जारी है।

दुर्गापुर: पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस ने करीब 53 किलोग्राम गांजा बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक, यह खेप ओडिशा से बस के जरिए दुर्गापुर लाई गई थी। मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब कथित अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क की पूरी कड़ी का पता लगाने में जुटी है। यह कार्रवाई आसनसोल-दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट के कोक ओवन थाना क्षेत्र में सोमवार को की गई। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि ओडिशा से बड़ी मात्रा में गांजा दुर्गापुर लाया जा रहा है। सूचना के आधार पर थाना प्रभारी अंजन मंडल के नेतृत्व में विशेष टीम ने इलाके में निगरानी शुरू की और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी।

गुप्त सूचना पर पुलिस ने चलाया अभियान

पुलिस के अनुसार, सूचना मिलने के बाद कोक ओवन थाना पुलिस ने संभावित मार्गों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी थी। इसी दौरान पुलिस की नजर तीन संदिग्ध लोगों पर पड़ी, जो दुर्गापुर बैराज के आसपास बस से उतरने के बाद इधर-उधर घूम रहे थे।

पुलिस को उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं। इसके बाद टीम ने तीनों को रोककर पूछताछ की और उनके सामान की तलाशी ली। तलाशी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में गांजा मिला। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, तीनों आरोपी कथित तौर पर ओडिशा से बस के जरिए गांजा लेकर दुर्गापुर पहुंचे थे। बरामद गांजे का कुल वजन करीब 53 किलोग्राम बताया गया है।

लाखों रुपये की बताई जा रही कीमत

पुलिस ने बरामद गांजे की कीमत कई लाख रुपये बताई है। हालांकि, जब्त मादक पदार्थ की अंतिम कीमत संबंधित जांच और बाजार मूल्यांकन के आधार पर स्पष्ट हो सकती है। पुलिस का कहना है कि समय रहते की गई कार्रवाई से गांजे की बड़ी खेप को आगे पहुंचाए जाने से पहले ही रोक लिया गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस खेप को दुर्गापुर में कहां पहुंचाया जाना था।

पुलिस के लिए सिर्फ 53 किलोग्राम गांजे की बरामदगी ही जांच का विषय नहीं है। अधिकारी यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि इसके पीछे कौन लोग हैं और क्या गिरफ्तार किए गए तीनों व्यक्ति किसी बड़े नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे।

ओडिशा से दुर्गापुर तक कैसे पहुंची खेप?

जांच में सबसे अहम सवाल यह है कि गांजे की यह खेप ओडिशा में कहां से निकली और दुर्गापुर तक पहुंचने की पूरी योजना किसने तैयार की थी। पुलिस के मुताबिक, तीनों संदिग्ध बस से दुर्गापुर पहुंचे थे। इससे जांचकर्ताओं को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि मादक पदार्थों को किस मार्ग से पश्चिम बंगाल लाया गया।

पुलिस अब यात्रा के दौरान इस्तेमाल किए गए वाहन, संभावित संपर्कों और आरोपियों के मोबाइल फोन समेत अन्य साक्ष्यों की जांच कर सकती है। इसका उद्देश्य कथित सप्लाई चेन में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचना है। अधिकारियों को यह भी पता लगाना है कि दुर्गापुर पहुंचने के बाद गांजा किस व्यक्ति या समूह को सौंपा जाना था।

तीनों आरोपियों से पूछताछ जारी

गिरफ्तार किए गए तीनों लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है। पूछताछ के दौरान पुलिस कथित तस्करी के स्रोत और गंतव्य के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है। जांचकर्ता यह जानना चाहते हैं कि आरोपियों की भूमिका केवल गांजा पहुंचाने तक सीमित थी या वे कथित नेटवर्क के अन्य हिस्सों से भी जुड़े हुए थे।

इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या पहले भी इसी मार्ग से मादक पदार्थों की खेप पश्चिम बंगाल पहुंचाई गई थी। अगर पूछताछ या अन्य सबूतों से किसी बड़े नेटवर्क का पता चलता है, तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

आसनसोल अदालत में पेशी

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों को मंगलवार को आसनसोल की अदालत में पेश किया जाना था। जांच एजेंसी मामले की आगे की जांच के लिए आरोपियों की पुलिस हिरासत मांग सकती है। पुलिस हिरासत मिलने पर आरोपियों से कथित तस्करी के नेटवर्क, गांजे के स्रोत, संभावित खरीदार और डिलीवरी से जुड़े लोगों के बारे में विस्तार से पूछताछ की जा सकती है। अदालत में पेशी के दौरान पुलिस बरामदगी और अब तक सामने आए सबूतों के आधार पर आगे की जांच के लिए आवश्यक कानूनी अनुमति मांग सकती है।

अंतरराज्यीय तस्करी की जांच पर जोर

इस मामले ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्यों के बीच मादक पदार्थों की कथित तस्करी को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती को सामने ला दिया है। ओडिशा से पश्चिम बंगाल तक खेप पहुंचने की बात सामने आने के बाद पुलिस अब इसे संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क के नजरिए से भी देख रही है।

हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि गिरफ्तार तीनों लोग किसी बड़े संगठित गिरोह का हिस्सा हैं या नहीं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए पुलिस अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई करती है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर निगरानी, वाहनों की जांच और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना ऐसे अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

दुर्गापुर में स्थानीय नेटवर्क की तलाश

पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दुर्गापुर में इस खेप का संभावित खरीदार कौन था। यदि जांच में स्थानीय स्तर पर किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

जांचकर्ता आरोपियों के संपर्कों और कथित लेनदेन से जुड़ी जानकारी जुटाने पर भी ध्यान दे सकते हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि 53 किलोग्राम गांजा सिर्फ एक खेप थी या किसी बड़े और लगातार चल रहे सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा था। पुलिस ने फिलहाल मामले की जांच जारी रहने की बात कही है।

बड़ी खेप बरामद होने से पुलिस की कार्रवाई चर्चा में

कोक ओवन थाना पुलिस की इस कार्रवाई में 53 किलोग्राम गांजा बरामद होना स्थानीय स्तर पर बड़ी बरामदगी मानी जा रही है। पुलिस का कहना है कि टीम ने गुप्त सूचना पर तेजी से कार्रवाई की और संदिग्धों को गांजे की खेप आगे पहुंचाने से पहले पकड़ लिया।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस का ध्यान अब सिर्फ गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां कथित नेटवर्क की आगे और पीछे की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।

आगे की जांच से खुल सकते हैं कई राज

मामले में आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि गांजे की खेप ओडिशा के किस हिस्से से लाई गई थी, इसे दुर्गापुर में किसे पहुंचाया जाना था और कथित तस्करी में कितने लोग शामिल हैं। पुलिस आरोपियों से पूछताछ के साथ बरामद सामान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। अदालत से मिलने वाली अनुमति के आधार पर जांच का दायरा आगे बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल तीनों गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही कथित अंतरराज्यीय मादक पदार्थ नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

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