JSSC पर प्रमाणपत्र नियमों में दोहरे मापदंड का आरोप, एक भर्ती में नियुक्ति तो दूसरी में रिजल्ट रोका

JSSC पर EWS और OBC प्रमाणपत्रों को लेकर अलग मानदंड अपनाने का आरोप है। एक भर्ती में नियुक्ति की अनुशंसा, दूसरी में 50+ रिजल्ट रोके जाने का दावा।

रांची में अभ्यर्थियों ने JSSC पर EWS और OBC प्रमाणपत्रों को लेकर अलग-अलग मानदंड अपनाने का आरोप लगाया है। महिला पर्यवेक्षिका भर्ती में नियुक्ति की अनुशंसा हुई, जबकि माध्यमिक आचार्य परीक्षा में 50 से अधिक अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोके जाने का दावा है।

रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में EWS और OBC प्रमाणपत्रों को लेकर अलग-अलग मानदंड अपनाए जाने का मामला सामने आया है। अभ्यर्थियों का दावा है कि महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति में अद्यतन प्रमाणपत्र के आधार पर अनुशंसा की गई, जबकि माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में 50 से अधिक उम्मीदवारों का रिजल्ट रोक दिया गया। इसे लेकर अभ्यर्थी समान नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं।

JSSC की अलग-अलग भर्तियों में प्रमाणपत्र को लेकर विवाद

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की विभिन्न नियुक्ति परीक्षाओं में EWS और OBC प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर अलग-अलग प्रक्रिया अपनाए जाने का दावा किया गया है। अभ्यर्थियों के मुताबिक, एक भर्ती में सत्यापन वर्ष का प्रमाणपत्र स्वीकार कर नियुक्ति की अनुशंसा की गई, जबकि दूसरी भर्ती में आवेदन की अंतिम तिथि तक जारी प्रमाणपत्र के साथ सत्यापन वर्ष का प्रमाणपत्र भी मांगा गया।

अभ्यर्थियों का कहना है कि इस अंतर के कारण परीक्षा में सफल होने के बावजूद EWS और OBC वर्ग के कुछ उम्मीदवार नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर ऐसे मामलों का भी हवाला दिया जा रहा है, जहां सत्यापन वर्ष के प्रमाणपत्र के आधार पर नियुक्ति की अनुशंसा की जा चुकी है।

महिला पर्यवेक्षिका भर्ती में अद्यतन प्रमाणपत्र से नियुक्ति

अभ्यर्थियों के अनुसार, महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति प्रक्रिया में अद्यतन EWS और OBC प्रमाणपत्रों को आधार बनाकर नियुक्ति की अनुशंसा की गई। इसमें ऐसे उम्मीदवार भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिनके पास आवेदन वर्ष 2023 का प्रमाणपत्र नहीं था।

कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलने की बात भी सामने आई है। हालांकि, कुछ मामलों में बाद में विभागीय स्तर पर नियुक्ति रोकने और संबंधित उम्मीदवारों को नोटिस जारी किए जाने का दावा किया गया है।

अभ्यर्थियों का सवाल है कि यदि बाद के चरण में अद्यतन प्रमाणपत्र के आधार पर पात्रता स्वीकार की जा सकती है, तो समान परिस्थिति वाले उम्मीदवारों के लिए दूसरी भर्ती में अलग मानदंड क्यों अपनाया जा रहा है।

माध्यमिक आचार्य परीक्षा में 50 से अधिक रिजल्ट रोके जाने का दावा

दूसरी ओर, माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में अलग-अलग विषयों के लिए प्रमाणपत्र सत्यापन के दौरान 50 से अधिक अभ्यर्थियों का रिजल्ट रोके जाने का दावा किया गया है।

अभ्यर्थियों के अनुसार, इन उम्मीदवारों से आवेदन जमा करने की अवधि और प्रमाणपत्र सत्यापन से जुड़े दोनों वित्तीय वर्षों के EWS और OBC प्रमाणपत्र मांगे जा रहे हैं। इससे उन उम्मीदवारों की पात्रता प्रभावित हो रही है, जिन्होंने परीक्षा में सफलता हासिल की है।

उर्दू विषय के प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए पहुंचे एक अभ्यर्थी से आवेदन की अंतिम तिथि तक या उससे पहले जारी EWS प्रमाणपत्र मांगे जाने की बात भी सामने आई है।

प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर क्या है विवाद?

EWS और OBC प्रमाणपत्र निर्धारित वित्तीय वर्ष के आधार पर जारी किए जाते हैं। भर्ती प्रक्रिया लंबी होने की स्थिति में आवेदन और नियुक्ति के अलग-अलग चरणों में प्रमाणपत्र की वैधता का सवाल उठ सकता है।

यही वजह है कि अभ्यर्थी चाहते हैं कि JSSC प्रत्येक भर्ती के लिए प्रमाणपत्र से जुड़े नियमों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करे। उनका कहना है कि आवेदन के समय कौन-सा प्रमाणपत्र जरूरी है और प्रमाणपत्र सत्यापन या नियुक्ति के समय किन दस्तावेजों को मान्य माना जाएगा, इसकी स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए।

अभ्यर्थियों ने समान नियम लागू करने की मांग की

अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रमाणपत्र की वैधता को लेकर अगर कोई निर्धारित नियम है, तो उसे JSSC की सभी नियुक्ति परीक्षाओं में समान तरीके से लागू किया जाना चाहिए। अलग-अलग परीक्षाओं में अलग-अलग मानदंड अपनाने से उम्मीदवारों में असमंजस पैदा हो रहा है।

अभ्यर्थियों की मांग है कि आयोग संबंधित मामलों की समीक्षा करे और प्रमाणपत्र के नियमों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि समान स्थिति वाले उम्मीदवारों के साथ अलग-अलग व्यवहार न हो।

Leave a comment