जयपुर में विदेशी महिला से ₹2.56 करोड़ के ड्रग्स बरामद, मुंबई सप्लाई नेटवर्क की जांच तेज

राजधानी जयपुर में DRI ने अफ्रीकी मूल की विदेशी महिला को गिरफ्तार कर 2.56 करोड़ रुपए की स्मैक, कोकीन और MDMA बरामद की। महिला मुंबई जा रही बस में पकड़ी गई।

जयपुर में डीआरआई ने अफ्रीकी मूल की विदेशी महिला को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए हैं। महिला बस से मुंबई जा रही थी और ट्रॉली बैग में ड्रग्स छिपाकर दूसरे राज्यों में सप्लाई करने की तैयारी में थी।

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में राजस्व आसूचना निदेशालय (DRI) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अफ्रीकी मूल की एक विदेशी महिला को भारी मात्रा में मादक पदार्थों के साथ गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, महिला के कब्जे से करोड़ों रुपये मूल्य के सिंथेटिक ड्रग्स बरामद किए गए हैं, जिन्हें कथित रूप से दूसरे राज्यों में सप्लाई करने की तैयारी थी।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी महिला बस के जरिए जयपुर से मुंबई जा रही थी। खुफिया सूचना मिलने के बाद डीआरआई ने कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में लिया और उसके ट्रॉली बैग की जांच की। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में मेथामफेटामाइन, कोकीन और एमडीएमए बरामद किए गए।

ट्रॉली बैग में छिपाकर ले जाए जा रहे थे ड्रग्स

डीआरआई अधिकारियों के मुताबिक, महिला ने मादक पदार्थों को बेहद सुनियोजित तरीके से छिपा रखा था। ड्रग्स को ट्रॉली बैग में मौजूद कपड़ों, तकिये के कवर और अन्य सामान के भीतर इस तरह रखा गया था ताकि सामान्य जांच में उनका पता न चल सके।

अधिकारियों ने बताया कि बरामद नशीले पदार्थों में शामिल हैं:

  • 2256 ग्राम मेथामफेटामाइन
  • 142 ग्राम कोकीन
  • 46 ग्राम एमडीएमए

इनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग ₹2.56 करोड़ आंकी गई है।

जयपुर से मुंबई तक फैले नेटवर्क की आशंका

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा अंतरराज्यीय और संभवतः अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क सक्रिय हो सकता है।

प्रारंभिक पूछताछ में संकेत मिले हैं कि बरामद मादक पदार्थों को मुंबई सहित अन्य राज्यों में सप्लाई किया जाना था। अधिकारियों को शक है कि आरोपी महिला किसी संगठित गिरोह के निर्देश पर काम कर रही थी।

डीआरआई अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ड्रग्स की खेप कहां से लाई गई थी, इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था और नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं।

एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तारी

डीआरआई ने आरोपी महिला को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद महिला को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

भारत में बढ़ती सिंथेटिक ड्रग्स तस्करी चिंता का विषय

हाल के वर्षों में भारत में सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी तेजी से बढ़ी है। मेथामफेटामाइन और एमडीएमए जैसे ड्रग्स को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं, क्योंकि इनका इस्तेमाल बड़े शहरों में पार्टी ड्रग्स के रूप में तेजी से बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय तस्कर अब पारंपरिक समुद्री मार्गों के अलावा सड़क और सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं।

मेथामफेटामाइन और एमडीएमए क्यों खतरनाक हैं?

मेथामफेटामाइन

यह एक अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला सिंथेटिक ड्रग है, जो सीधे दिमाग और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। इसके सेवन से मानसिक अस्थिरता, हिंसक व्यवहार और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

एमडीएमए

एमडीएमए, जिसे आमतौर पर “एक्स्टेसी” कहा जाता है, पार्टी और क्लब संस्कृति में इस्तेमाल होने वाला ड्रग है। यह व्यक्ति के व्यवहार और मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है।

कोकीन

कोकीन एक महंगा और खतरनाक ड्रग माना जाता है, जिसकी तस्करी अक्सर अंतरराष्ट्रीय गिरोहों से जुड़ी होती है।

राजस्थान बना तस्करी मार्ग?

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, राजस्थान का भौगोलिक स्थान ड्रग तस्करों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। राज्य के कई शहर उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत को जोड़ते हैं, जिससे सड़क मार्ग के जरिए अवैध सप्लाई आसान हो जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि तस्कर अब छोटे शहरों और बस नेटवर्क का उपयोग कर एजेंसियों से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

डीआरआई की बढ़ी निगरानी

डीआरआई और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अब बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसे सार्वजनिक ट्रांजिट पॉइंट्स पर निगरानी बढ़ा रही हैं। हाल के महीनों में देश के कई हिस्सों में विदेशी नागरिकों से ड्रग्स बरामद होने के मामले सामने आए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क अक्सर अलग-अलग देशों के नागरिकों का इस्तेमाल “कूरियर” के रूप में करते हैं, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ रही चिंता

संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि सिंथेटिक ड्रग्स का वैश्विक कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। एशिया और अफ्रीका के बीच सक्रिय तस्करी नेटवर्क अब दक्षिण एशियाई देशों को ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत में बढ़ती ड्रग जब्ती की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि देश अब केवल उपभोक्ता बाजार ही नहीं, बल्कि ट्रांजिट और वितरण नेटवर्क का भी हिस्सा बनता जा रहा है।

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