जयपुर पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड: अवैध यूनिट में भीषण आग, 8 लोगों की मौत से हड़कंप

राजस्थान के जयपुर के खोह नागोरियान में अवैध पटाखा फैक्ट्री मे भीषण आग से 8 लोगों की मौत। जिम्मेदार कौन, कई साल से चल रहा अवैध कारोबार, दिल्ली तक सप्लाई होती थी।

जयपुर के खोह नागोरियान में अवैध पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग लगने से दो भाइयों समेत 8 लोगों की मौत हो गई। कई साल से चल रही इस फैक्ट्री में 400-500 रुपये मजदूरी देकर काम कराया जाता था और पटाखे दिल्ली तक भेजे जाते थे।

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के खोह नागोरियान क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने पूरे इलाके को दहला दिया। करीब 11 बजे हुए इस अग्निकांड में दो सगे भाइयों समेत कुल 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग बचाव कार्य में जुट गए।

55 गज के मकान में चल रही थी अवैध फैक्ट्री

प्रारंभिक जांच और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस मकान में हादसा हुआ वह मात्र 55 गज का छोटा सा आवासीय ढांचा था, जिसे अवैध रूप से पटाखा निर्माण इकाई में बदल दिया गया था। आरोप है कि कई वर्षों से यहां बिना किसी लाइसेंस और सुरक्षा मानकों के पटाखों का निर्माण और बारूद रिफिलिंग का काम चल रहा था।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इस फैक्ट्री में काम करने वाले लोगों को 400 से 500 रुपये प्रतिदिन देकर जोखिम भरे हालात में काम कराया जाता था।

दिल्ली तक होती थी पटाखों की सप्लाई

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अवैध यूनिट में तैयार किए गए पटाखों को दिल्ली समेत अन्य शहरों में सप्लाई किया जाता था। फैक्ट्री संचालन में दिल्ली से जुड़े एक व्यक्ति का नाम भी सामने आया है, जिसे इस अवैध कारोबार का मुख्य संचालक बताया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से यहां संदिग्ध गतिविधियां चल रही थीं, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हो सकी।

आग लगते ही मचा अफरा-तफरी

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि फैक्ट्री के अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। कई लोग आग की लपटों में घिर गए, जबकि कुछ गंभीर रूप से झुलसकर बाहर निकलने में सफल रहे।

घटना के बाद सड़क पर घायल और झुलसे लोगों की हालत देखकर माहौल भयावह हो गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

मृतकों की पहचान और परिवारों का दर्द

इस दर्दनाक हादसे में जिन लोगों की मौत हुई, उनमें मोहम्मद अशरफ (40), मोहम्मद रब्बिल (16), अब्दुल वहीद (46), समीर खान (20), बिलाल खान (28), आजीम खान (18), नासिर खान (25) और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं।

परिजनों के अनुसार, कई मृतक दिहाड़ी मजदूरी या छोटे कामों से जुड़े थे और आर्थिक मजबूरी के कारण इस खतरनाक काम में लगे हुए थे। कुछ लोग प्रतिदिन 400-500 रुपये की मजदूरी पर यहां काम कर रहे थे।

बच्चों और परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

स्थानीय निवासियों के अनुसार, कई मृतकों के छोटे बच्चे हैं जो अभी इस दर्दनाक घटना से अनजान हैं। एक परिवार ने बताया कि उनका सदस्य सुबह काम पर गया था और शाम तक लौटने की उम्मीद थी, लेकिन वह कभी वापस नहीं आ सका।

जयपुर पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड: अवैध यूनिट में भीषण आग, 8 लोगों की मौत से हड़कंप

एक अन्य परिवार ने बताया कि मृतक आमतौर पर सिलाई और छोटे-मोटे काम करता था, लेकिन काम की कमी के कारण वह अस्थायी रूप से फैक्ट्री में काम करने गया था।

कई वर्षों से चल रहा था अवैध कारोबार

स्थानीय लोगों और पूर्व कर्मचारियों के बयान के अनुसार, यह अवैध पटाखा फैक्ट्री लंबे समय से इलाके में संचालित हो रही थी। आरोप है कि यहां अलग-अलग स्थानों पर भी इसी तरह की यूनिट्स चल रही थीं, जिनमें बिना सुरक्षा उपायों के बारूद और पटाखों का निर्माण किया जाता था।

फैक्ट्री संचालन को लेकर स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने लंबे समय तक यह अवैध गतिविधि कैसे चलती रही।

पुलिस और प्रशासन की जांच शुरू

घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की गई थी।

फॉरेंसिक टीम और अग्निशमन विभाग यह पता लगाने में जुटे हैं कि आग किस कारण से लगी और क्या इसमें किसी तरह की लापरवाही या विस्फोटक सामग्री की गलत हैंडलिंग शामिल थी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और प्रशासन पर सवाल

इस हादसे के बाद स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। एक स्थानीय विधायक ने आरोप लगाया कि अवैध फैक्ट्रियों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ।

उन्होंने कहा कि छोटे नियम उल्लंघनों पर त्वरित कार्रवाई की जाती है, लेकिन इतने बड़े अवैध कारोबार पर वर्षों तक ध्यान नहीं दिया गया, जो गंभीर चिंता का विषय है।

अवैध फैक्ट्रियों और सुरक्षा पर बड़ा सवाल

यह घटना एक बार फिर देश में अवैध औद्योगिक इकाइयों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की समस्या को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आवासीय इलाकों में इस तरह की खतरनाक गतिविधियां न केवल अवैध हैं बल्कि बड़े पैमाने पर जनहानि का कारण बन सकती हैं।

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