जयपुर के SMS अस्पताल में फार्मासिस्ट ने महंगी दवाइयां और इंजेक्शन सस्ते दाम में बेच दिए। सुरक्षा गार्डों ने 10 हजार की दवाइयों के साथ आरोपी और दलाल को पकड़ लिया। मामले में अस्पताल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में दवाइयों की अवैध बिक्री और चोरी का गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल के दवा वितरण काउंटर (DDC) पर तैनात एक संविदा फार्मासिस्ट पर आरोप है कि उसने महंगी दवाइयों और इंजेक्शनों को बाहर के एक दलाल को बेहद कम कीमत पर बेच दिया। इस घटना के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
10 हजार की दवाइयां सिर्फ 1500 रुपए में बेची गईं
जानकारी के अनुसार, फार्मासिस्ट ने लगभग 10 हजार रुपए कीमत की दवाइयां, जिनमें एंटीबायोटिक इंजेक्शन, NS की बोतलें और सीरिंज शामिल थीं, केवल 1500 रुपए में एक बाहरी व्यक्ति को उपलब्ध कराईं। यह पूरा सौदा फोन-पे के माध्यम से किया गया, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया है।
सुरक्षा गार्डों की सतर्कता से खुला मामला
इस पूरे मामले का खुलासा रेस्को कंपनी के सुरक्षा गार्डों की सतर्कता के कारण हुआ। गार्डों को अस्पताल से दवाइयों की चोरी की सूचना मिली थी, जिसके बाद उन्होंने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना शुरू किया।
जैसे ही फार्मासिस्ट और दलाल अस्पताल परिसर से बाहर निकलने लगे, गार्डों ने उन्हें रोककर तलाशी ली। जांच के दौरान उनके बैग से भारी मात्रा में महंगी दवाइयां बरामद हुईं।
मरीज के नाम पर दवाइयों की झूठी कहानी
शुरुआत में पकड़े गए व्यक्ति ने दावा किया कि दवाइयां किसी भर्ती मरीज के लिए ले जाई जा रही हैं। हालांकि जब सुरक्षा कर्मियों ने संबंधित वार्ड के डॉक्टरों से पुष्टि की, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया कि किसी भी मरीज के लिए ऐसी कोई दवाइयां निर्धारित नहीं थीं।
इससे यह स्पष्ट हो गया कि दवाइयों का उपयोग मरीजों के इलाज के लिए नहीं, बल्कि अवैध बिक्री के लिए किया जा रहा था।

फार्मासिस्ट और दलाल की मिलीभगत का खुलासा
जांच में सामने आया कि संविदा फार्मासिस्ट और एक बाहरी दलाल के बीच पहले से साठगांठ थी। दोनों ने मिलकर अस्पताल के स्टोर और दवा काउंटर से दवाइयां निकालकर बाजार में बेचने की योजना बनाई थी।
फार्मासिस्ट ने चरक भवन स्थित वेयरहाउस और DDC-14 से दवाइयां उठाकर उन्हें एक डिब्बे में भरकर बाहर ले जाने की व्यवस्था की थी।
अस्पताल प्रशासन की भूमिका और कार्रवाई
SMS अस्पताल प्रशासन के अनुसार, आरोपी फार्मासिस्ट पिछले दो वर्षों से अलग-अलग ड्यूटी पर तैनात था। उसकी गतिविधियों पर पहले से संदेह जताया जा रहा था। दो दिन पहले ही उसे संदिग्ध गतिविधियों को लेकर चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन उसने निर्देशों की अनदेखी की।
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी चल रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा और दवा प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी अस्पतालों में महंगी दवाइयों की उपलब्धता और उनके नियंत्रण को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें सामने आती रही हैं।
अब इस मामले के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कैसे एक कर्मचारी इतने लंबे समय तक दवाइयों की अवैध सप्लाई कर पाता रहा।
मरीजों के इलाज पर असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं अगर लगातार होती रहीं तो इसका सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ सकता है। सरकारी अस्पतालों में पहले से ही संसाधनों की कमी रहती है, ऐसे में दवाइयों की चोरी गंभीर समस्या बन सकती है।
जांच और आगे की कार्रवाई जारी
फिलहाल पुलिस और अस्पताल प्रशासन संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं। यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस रैकेट में और लोग शामिल हैं या यह केवल दो व्यक्तियों तक सीमित था।
अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।











