Kajol ने हाल ही में अपनी बेटी Nysa Devgan के साथ अपने रिश्ते को लेकर खुलकर बात की। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि टीनएज के दौरान मां-बेटी के रिश्ते में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन समय के साथ समझदारी और संवाद ने इस रिश्ते को मजबूत बना दिया।
एंटरटेनमेंट न्यूज़: काजोल ने बड़े पर्दे पर कई बार एक स्नेही और मजबूत मां का किरदार निभाया है, लेकिन असल जिंदगी में भी वह अपनी बेटी न्यासा देवगन और बेटे युग की परवरिश को लेकर काफी सजग रही हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में काजोल ने बताया कि जब न्यासा टीनएज में पहुंचीं, तब मां-बेटी के रिश्ते में कई उतार-चढ़ाव आए।
उन्होंने खुलासा किया कि उस दौर में दोनों के बीच काफी बहस और झगड़े भी होते थे, जो हर पैरेंट-टीनेजर रिश्ते में आम बात है। हालांकि, समय के साथ उन्होंने एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझना शुरू किया और रिश्ते में बदलाव आया। काजोल के मुताबिक, खुलकर बातचीत करना, एक-दूसरे की बात सुनना और स्पेस देना उनके रिश्ते को मजबूत बनाने में सबसे ज्यादा मददगार साबित हुआ।
टीनएज में बढ़ी दूरियां, रिश्ते में आया तनाव
काजोल ने बताया कि जब न्यासा किशोरावस्था (टीनएज) में पहुंचीं, तो दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे। उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय दोनों ही भावनात्मक रूप से संवेदनशील थीं, जिसके कारण अक्सर बहस और झगड़े होते थे। काजोल के अनुसार, हम दोनों ही कई बार बिना सोचे-समझे बातें कह देते थे।
कई बार हमारी बातें तर्कसंगत नहीं होती थीं, लेकिन उस उम्र में भावनाएं ज्यादा हावी होती हैं। यह स्थिति सिर्फ सेलिब्रिटी परिवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनियाभर में माता-पिता और किशोर बच्चों के बीच ऐसा दौर आम माना जाता है।
संवाद बना सबसे बड़ा समाधान
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काजोल ने बताया कि इस मुश्किल दौर से निकलने के लिए उन्होंने अपने व्यवहार में बदलाव किया। उन्होंने पहल करते हुए यह तय किया कि वह झगड़े के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देंगी। उन्होंने कहा कि, मैंने तय किया कि मैं न्यासा से बहस नहीं करूंगी, बल्कि उससे लगातार बात करती रहूंगी, जब तक वह मेरी बात सुनना शुरू न कर दे।
धीरे-धीरे यह तरीका काम करने लगा और दोनों के बीच लंबी और खुली बातचीत होने लगी। इसी संवाद ने रिश्ते में विश्वास और समझ को फिर से स्थापित किया।
पैरेंटिंग की सबसे बड़ी सीख
काजोल ने इस अनुभव को अपनी पैरेंटिंग की सबसे बड़ी सीख बताया। उनके अनुसार, बच्चों के साथ रिश्ता बनाना एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसमें धैर्य, समझ और संवाद बेहद जरूरी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता को यह समझना चाहिए कि हर पीढ़ी की सोच अलग होती है, खासकर आज की “Gen Z” पीढ़ी, जो ज्यादा स्वतंत्र और अभिव्यक्तिपूर्ण है।
आज के डिजिटल और तेजी से बदलते सामाजिक माहौल में पैरेंटिंग पहले से अधिक जटिल हो गई है। काजोल का अनुभव इस बात को उजागर करता है कि आधुनिक दौर में बच्चों के साथ रिश्ते को मजबूत बनाए रखने के लिए पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ना जरूरी है।











