Indian National Congress ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि अमेरिकी विदेश सचिव Marco Rubio भारतीय विदेश नीति को लेकर आगे और क्या घोषणाएं करेंगे।
नई दिल्ली: भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी भारत की विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों और घोषणाओं की जानकारी भारत से पहले सार्वजनिक कर रहे हैं। इस मुद्दे ने राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर बहस को जन्म दिया है।
कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि आखिर क्यों अमेरिकी विदेश विभाग भारत से पहले उसकी विदेश नीति से जुड़े फैसलों की घोषणा कर रहा है।
मार्को रुबियो के बयानों पर विवाद
कांग्रेस का यह बयान अमेरिकी विदेश सचिव Marco Rubio के हालिया सार्वजनिक बयानों के बाद आया है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि रुबियो ने भारत से पहले कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक सूचनाएं सार्वजनिक कीं। रिपोर्ट के अनुसार, रुबियो ने मियामी में क्वाड (Quad) बैठक और वेनेजुएला के राष्ट्रपति की भारत यात्रा से जुड़ी जानकारी पहले साझा की थी, जबकि इनकी आधिकारिक पुष्टि भारत या संबंधित देशों की ओर से बाद में की गई।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि 10 मई 2025 को “ऑपरेशन सिंदूर” से जुड़ी जानकारी के संदर्भ में भी अमेरिकी विदेश सचिव ने पहले बयान दिया था। पार्टी का कहना है कि यह स्थिति भारत की विदेश नीति की स्वतंत्रता और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है। हालांकि, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

वेनेजुएला राष्ट्रपति यात्रा को लेकर भी सवाल
विवाद का एक और पहलू वेनेजुएला के राष्ट्रपति की प्रस्तावित भारत यात्रा से जुड़ा है। कांग्रेस ने दावा किया कि इस यात्रा की घोषणा भी अमेरिकी विदेश सचिव ने पहले की थी, जबकि भारत या वेनेजुएला की ओर से औपचारिक पुष्टि बाद में की गई। यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस के एक कार्यक्रम से जुड़ी थी, जिसे बाद में अफ्रीका में इबोला वायरस के प्रकोप के कारण स्थगित कर दिया गया।
कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की घटनाएं भारत की कूटनीतिक संप्रभुता (Sovereignty) पर चिंता पैदा करती हैं। पार्टी का सवाल है कि जब किसी देश की विदेश नीति से जुड़े फैसलों की घोषणा भारत से पहले कोई अन्य देश कर रहा है, तो इसका कूटनीतिक संदेश क्या है। जयराम रमेश ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की छवि को प्रभावित कर सकती है।
यह पहली बार नहीं है जब भारत की विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष और सरकार के बीच टकराव देखने को मिला है। पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका, रणनीतिक साझेदारियों और कूटनीतिक घोषणाओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज रही है।










