कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य मंत्रिमंडल विस्तार में जगह न मिलने के बाद इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के दो विधायकों के कदम को ज्यादा महत्व नहीं दिया है।
बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में कैबिनेट विस्तार के बाद उभरे असंतोष ने सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर नई बहस छेड़ दी है। राज्य के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नाराज विधायकों के इस्तीफे पर स्पष्ट और सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि कोई विधायक इस्तीफा देना चाहता है तो उसे स्वीकार करने में उन्हें “एक मिनट भी नहीं लगेगा।” मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के कुछ नेताओं ने मंत्री पद न मिलने पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई है।
कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी नाराजगी
हाल ही में हुए कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार में कई विधायकों को मंत्री पद मिलने की उम्मीद थी। हालांकि अंतिम सूची में कुछ वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को जगह नहीं मिली, जिसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा। कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल और बेलूर गोपालकृष्ण ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर नेतृत्व को संदेश देने की कोशिश की।
दोनों नेताओं का मानना है कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने के बावजूद उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। उनके समर्थकों ने भी विरोध प्रदर्शन कर पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाए।
डीके शिवकुमार का दो टूक जवाब
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीति में इस्तीफा देना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि जो नेता इस्तीफा देना चाहते हैं, उन्हें कोई रोक नहीं सकता। शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि पार्टी और संगठन व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर हैं। उनके अनुसार, यदि कोई नेता केवल पद के लिए राजनीति करता है, तो वह पार्टी की मूल भावना को नहीं समझता। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस संगठन की मजबूती ही नेताओं के राजनीतिक भविष्य की गारंटी है।
मुख्यमंत्री ने अपने लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें भी कई अवसरों पर मंत्री पद नहीं मिला था, लेकिन उन्होंने कभी पार्टी नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री धर्म सिंह और सिद्धारमैया के कार्यकाल में भी उन्हें मंत्री बनने का अवसर नहीं मिला था, फिर भी उन्होंने संगठन के प्रति निष्ठा बनाए रखी।
शिवकुमार ने कहा कि धैर्य और संगठन के प्रति समर्पण ही किसी भी नेता को आगे बढ़ाता है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं को संदेश देते हुए कहा कि यदि पार्टी मजबूत रहती है तो अवसर अपने आप आते हैं।

कांग्रेस नेतृत्व के सामने चुनौती
कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के प्रतिनिधित्व को लेकर दावेदारी बढ़ी है। कैबिनेट विस्तार के दौरान सभी नेताओं को संतुष्ट करना आसान नहीं था। यही कारण है कि कुछ विधायक खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह असंतोष फिलहाल सीमित स्तर पर है, लेकिन यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो यह सरकार और संगठन दोनों के लिए चुनौती बन सकता है। कांग्रेस नेतृत्व अब नाराज नेताओं से संवाद स्थापित कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकता है।
समर्थकों का विरोध और राजनीतिक संदेश
इस्तीफा देने वाले विधायकों के समर्थकों ने बेंगलुरु सहित कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि पार्टी ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं की अनदेखी की है। कुछ नेताओं का दावा है कि अंतिम समय तक उनका नाम संभावित मंत्रियों की सूची में शामिल था, लेकिन आखिरी क्षण में बदलाव कर दिया गया।
इस घटनाक्रम ने यह भी दिखाया है कि कांग्रेस के भीतर मंत्री पद को लेकर प्रतिस्पर्धा अभी भी काफी तीव्र है। आने वाले महीनों में पार्टी नेतृत्व को संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं।










