कासगंज में संचालित 40 से अधिक होटलों में से केवल एक के पास अग्निशमन विभाग की NOC है। फायर सेफ्टी मानकों की कमी और अपर्याप्त सुरक्षा इंतजामों ने होटल, अस्पताल और नर्सिंग होम की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कासगंज: दिल्ली के हालिया होटल अग्निकांड के बाद कासगंज में होटलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। जिले में संचालित 40 से अधिक होटलों में से केवल एक होटल के पास ही अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) है। ऐसे में आग लगने जैसी आपात स्थिति में मेहमानों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
40 से ज्यादा होटल, लेकिन NOC सिर्फ एक के पास
कासगंज जिले में बड़ी संख्या में होटल और लॉज संचालित हो रहे हैं, लेकिन अधिकांश संस्थानों के पास अग्निशमन विभाग की अनिवार्य NOC नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिले में केवल एक होटल के पास ही वैध फायर NOC मौजूद है, जबकि बाकी होटल बिना आवश्यक स्वीकृतियों के संचालन कर रहे हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी होटल में आग लगने की स्थिति में फायर सेफ्टी सिस्टम, आपातकालीन निकास और पर्याप्त वेंटिलेशन बेहद जरूरी होते हैं। इन व्यवस्थाओं के अभाव में दुर्घटना होने पर जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है।
वेंटिलेशन और आपात निकास की भी कमी
शहर के कई होटल घनी आबादी वाले क्षेत्रों और संकरी गलियों में संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई भवनों में पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था नहीं है। आग लगने की स्थिति में धुआं तेजी से फैल सकता है, जिससे लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है।
फायर सेफ्टी विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी होटल में सुरक्षित निकासी मार्ग, अग्निशमन उपकरण और नियमित सुरक्षा निरीक्षण अनिवार्य होना चाहिए। लेकिन कई स्थानों पर ये व्यवस्थाएं या तो अधूरी हैं या केवल कागजों तक सीमित हैं।
अस्पताल और नर्सिंग होम भी सवालों के घेरे में
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता केवल होटलों तक सीमित नहीं है। जिले के कई अस्पतालों और नर्सिंग होम में भी फायर सेफ्टी सिस्टम की स्थिति संतोषजनक नहीं बताई जा रही है।
हालांकि कई संस्थानों ने पाइपलाइन और अन्य उपकरण लगाए हुए हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा या नहीं, इस पर सवाल बने हुए हैं। आरोप हैं कि कुछ स्थानों पर केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए फायर सिस्टम लगाया गया है, जबकि उसकी नियमित जांच और रखरखाव नहीं किया जाता।
पंजीकरण प्रक्रिया पर भी उठ रहे सवाल
मामले ने पंजीकरण और अनुमति प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नियमों के अनुसार होटलों को पंजीकरण से पहले फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन और आपातकालीन निकास जैसे मानकों को पूरा करना होता है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन होटलों के पास फायर विभाग की NOC नहीं है, वे पंजीकरण और संचालन की अनुमति कैसे प्राप्त कर रहे हैं। शहर के विभिन्न इलाकों और तीर्थस्थल सोरों में भी कई होटल संचालित हैं, जिनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब जांच की मांग उठ रही है।
नोटिस जारी, लेकिन कार्रवाई सीमित
अग्निशमन विभाग का कहना है कि समय-समय पर होटल संचालकों को सुरक्षा मानक पूरे करने के लिए नोटिस जारी किए जाते हैं। हालांकि स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि नोटिस देने के बाद आगे की कार्रवाई बहुत कम देखने को मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नोटिस जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। नियमित निरीक्षण, कड़ी निगरानी और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी संभावित हादसे को रोका जा सके।
सुरक्षा मानकों को लेकर बढ़ी चिंता
दिल्ली सहित देश के विभिन्न हिस्सों में सामने आए अग्निकांडों के बाद कासगंज में भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है। होटल, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में फायर सेफ्टी मानकों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को समय रहते ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।









