केरल में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के पूरे पाठ को लेकर विवाद बढ़ गया है। विपक्ष के आरोपों के बाद मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में केवल पहले दो अंतरे गाए जाएंगे। मुख्यमंत्री कार्यालय का आधिकारिक स्पष्टीकरण बाकी है
तिरुवंतपुरम: केरल में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के पूरे पाठ के गायन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया राजनीतिक मोड़ लेता दिख रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार पर विपक्ष ने राष्ट्रीय गीत के पूरे पाठ को अनिवार्य करने के मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और संघ परिवार की विचारधारा के अनुरूप चलने का आरोप लगाया था। विवाद बढ़ने के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा है कि सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे।
हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई औपचारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है और न ही मुख्य सचिव के पूर्व निर्देश को आधिकारिक रूप से वापस लेने की घोषणा हुई है। ऐसे में सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है।
मुख्य सचिव के निर्देश से शुरू हुआ विवाद
विवाद उस समय शुरू हुआ जब केरल के मुख्य सचिव की ओर से राज्य के सरकारी विभागों को एक निर्देश जारी किया गया। इसमें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का पूरा पाठ सुनिश्चित करने की बात कही गई थी।
निर्देश के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप था कि सरकार का यह कदम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और संघ परिवार के रुख के अनुरूप है। विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि राज्य सरकार को इस तरह का निर्देश जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसके पीछे केंद्र सरकार की किसी गाइडलाइन का प्रभाव था या नहीं। मामले ने जल्द ही राजनीतिक रंग ले लिया और सरकार के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठने लगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया- पहले दो अंतरे होंगे
9 अगस्त 2026 को स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल पहले दो अंतरे गाए जाएंगे। मंत्री का यह बयान मुख्य सचिव के उस निर्देश से अलग दिखाई देता है, जिसमें पूरे गीत के गायन की बात कही गई थी। इसी कारण इसे सरकार के रुख में संभावित बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
मुरलीधरन ने यह भी कहा कि मुख्य सचिव कई बार केंद्र सरकार के निर्देशों के आधार पर परिपत्र जारी करते हैं। उनके बयान से संकेत मिला कि मुख्य सचिव का निर्देश किसी व्यापक सरकारी या केंद्रीय दिशा-निर्देश के आधार पर जारी किया गया हो सकता है। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस मुद्दे पर अंतिम और आधिकारिक स्थिति अभी सामने नहीं आई है।
IUML मंत्री ने भी रखी अपनी बात
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के शिक्षा मंत्री एन. शामसुद्दीन ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव ने कथित तौर पर लोक भवन से मिले निर्देशों के आधार पर कार्रवाई की थी। यह बयान विवाद को और जटिल बनाता है, क्योंकि बाद में लोक भवन की ओर से कथित तौर पर ऐसा कोई निर्देश जारी किए जाने से इनकार किए जाने की खबर सामने आई।
इस तरह एक ओर राज्य सरकार के मंत्री मुख्य सचिव के निर्देश को बाहरी दिशा-निर्देशों से जोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लोक भवन से कथित तौर पर निर्देश जारी करने से इनकार किए जाने की बात सामने आई है। इस विरोधाभास के कारण अब सरकार के सामने पूरे मामले पर स्पष्टता देने की चुनौती है।
लोक भवन के रुख पर भी सवाल
मामले में लोक भवन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री और शिक्षा मंत्री के अनुसार मुख्य सचिव ने लोक भवन के निर्देश के आधार पर परिपत्र जारी किया था। लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक लोक भवन ने ऐसा कोई निर्देश जारी करने से इनकार किया है।
यदि यह स्थिति सही है, तो मुख्य सचिव का मूल निर्देश किस आधार पर जारी हुआ, यह महत्वपूर्ण सवाल बन जाता है। राज्य सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या निर्देश केंद्र सरकार के किसी आदेश, किसी प्रशासनिक परंपरा या किसी अन्य स्रोत के आधार पर तैयार किया गया था। फिलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आने के कारण विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
‘वंदे मातरम्’ को लेकर संवेदनशीलता क्यों?
‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रगीत है। इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गीत के सभी अंतरे समान रूप से सार्वजनिक कार्यक्रमों में नहीं गाए जाते। इसके कुछ हिस्सों की धार्मिक और सांस्कृतिक व्याख्या को लेकर अलग-अलग मत रहे हैं। यही वजह है कि सार्वजनिक और सरकारी कार्यक्रमों में इसके गायन को लेकर समय-समय पर राजनीतिक तथा सामाजिक बहस होती रही है। केरल में मौजूदा विवाद भी इसी व्यापक संवेदनशीलता के बीच सामने आया है। सरकार के निर्देश में पूरे गीत के गायन की बात सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे राजनीतिक और वैचारिक मुद्दा बना दिया।

UDF सरकार पर विपक्ष का हमला
कांग्रेस के नेतृत्व वाली UDF सरकार को इस मामले में विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार का फैसला संघ परिवार के एजेंडे के करीब जाता है।
विपक्षी दलों का तर्क है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय गीत को लेकर स्पष्ट और सर्वमान्य प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए और किसी भी नए निर्देश को जारी करने से पहले सभी संवेदनशील पहलुओं पर विचार होना चाहिए। वहीं सरकार के भीतर से आए ताजा बयान से संकेत मिलता है कि प्रशासन अब सरकारी कार्यक्रमों में केवल पहले दो अंतरे गाने की व्यवस्था पर जोर दे सकता है।
क्या सरकार ने आधिकारिक तौर पर निर्देश बदला?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि केरल सरकार ने मुख्य सचिव के निर्देश को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने अभी तक इस संबंध में स्पष्ट आदेश या संशोधित परिपत्र सार्वजनिक नहीं किया है।
स्वास्थ्य मंत्री का बयान जरूर यह संकेत देता है कि सरकारी कार्यक्रमों में केवल पहले दो अंतरों का गायन किया जाएगा। लेकिन प्रशासनिक रूप से स्थिति तभी पूरी तरह स्पष्ट मानी जाएगी, जब सरकार या संबंधित विभाग की ओर से लिखित आदेश जारी किया जाएगा। यही वजह है कि इस मामले में अगले कुछ दिनों में सरकार की ओर से आने वाला आधिकारिक स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्वतंत्रता दिवस से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
भारत में स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाता है और इसके लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों के स्तर पर कई आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में समारोहों के प्रोटोकॉल को लेकर जारी किसी भी निर्देश का महत्व बढ़ जाता है। केरल में स्वतंत्रता दिवस समारोह से कुछ दिन पहले ‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद सामने आने से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।
सरकार के सामने एक तरफ प्रशासनिक निर्देश को स्पष्ट करने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की जिम्मेदारी भी है। मामला अब केवल गीत के गायन तक सीमित नहीं रह गया है। मुख्य सचिव के निर्देश, मुख्यमंत्री कार्यालय की चुप्पी, मंत्रियों के अलग-अलग स्पष्टीकरण और लोक भवन के कथित इनकार ने इसे प्रशासनिक पारदर्शिता का मुद्दा भी बना दिया है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या केरल सरकार मुख्य सचिव के मूल निर्देश को औपचारिक रूप से संशोधित या वापस करेगी। यदि ऐसा किया जाता है तो सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के पहले दो अंतरों के गायन की व्यवस्था स्पष्ट हो जाएगी।
दूसरी ओर, यदि सरकार कोई नया लिखित आदेश जारी नहीं करती है, तो प्रशासनिक स्तर पर भ्रम की स्थिति बनी रह सकती है। ऐसे में मुख्यमंत्री कार्यालय की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस विवाद को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
स्वतंत्रता दिवस से पहले सामने आए इस घटनाक्रम ने केरल की राजनीति में राष्ट्रगीत, प्रशासनिक निर्देश और वैचारिक राजनीति को एक ही बहस में ला दिया है। फिलहाल सरकार की ओर से अंतिम आधिकारिक स्थिति का इंतजार है।










