केरल में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पथानामथिट्टा समेत कई जिलों में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी करते हुए निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और राहत एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
तिरुवंतपुरम: केरल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। सप्ताहांत में भारी वर्षा और उससे जुड़ी घटनाओं के बाद अब दक्षिणी जिले पथानामथिट्टा में हालात अधिक गंभीर होते दिखाई दे रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा वर्षा आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कई मौसम केंद्रों पर 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके बाद प्रशासन ने बाढ़ और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए व्यापक सतर्कता उपाय लागू किए हैं।
सरकार ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है, जबकि जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां लगातार स्थिति की निगरानी कर रही हैं।
पथानामथिट्टा में बढ़ा बाढ़ का खतरा
पर्यटन मंत्री पी. सी. विष्णुनाध के कार्यालय के अनुसार, सबरीमला क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पथानामथिट्टा जिले की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विशेष रूप से रन्नी और आसपास के क्षेत्रों में नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई गई है।
मंत्री स्वयं पथानामथिट्टा में डेरा डाले हुए हैं और राहत एवं आपदा प्रबंधन कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और आपदा प्रबंधन टीमों के साथ बैठक कर राहत कार्यों की समीक्षा की तथा प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बांधों का जलस्तर रेड अलर्ट पर
लगातार बारिश के चलते कई प्रमुख जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। अधिकारियों ने बताया कि पथानामथिट्टा जिले के मूझियार जलाशय का जलस्तर रेड अलर्ट स्तर तक पहुंचने के बाद उसका एक गेट आंशिक रूप से खोल दिया गया है ताकि अतिरिक्त पानी नियंत्रित तरीके से छोड़ा जा सके।
इसके अलावा इडुक्की, त्रिशूर और कोझिकोड जिलों के कई प्रमुख बांध भी रेड अलर्ट श्रेणी में पहुंच चुके हैं। प्रशासन ने इन जलाशयों से जुड़े नदी तटीय क्षेत्रों के निवासियों को विशेष सतर्कता बरतने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।
नदियों के किनारे रहने वालों को चेतावनी
प्रशासन ने कक्काट्टर और पंपा नदी के किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जलाशयों से पानी छोड़े जाने और लगातार वर्षा के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस, दमकल विभाग और स्वास्थ्य सेवाओं को भी अलर्ट मोड पर रखा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
भूस्खलन की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
भारी बारिश के कारण मलप्पुरम जिले में एक निर्माण स्थल पर भूस्खलन की घटना भी सामने आई। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली, लेकिन निर्माण क्षेत्र से गुजरने वाला मुख्य मार्ग अवरुद्ध हो गया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

राहत और बचाव अभियान तेज
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों को तेज करने के लिए प्रशासन ने अतिरिक्त संसाधन तैनात किए हैं। टेलीविजन चैनलों पर प्रसारित दृश्यों में देखा गया कि कोल्लम से मछली पकड़ने वाली नावों को सड़क मार्ग से पथानामथिट्टा के अरनमुला क्षेत्र भेजा जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर बचाव अभियान में उनका उपयोग किया जा सके।
राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बलों के साथ-साथ स्थानीय स्वयंसेवी संगठन भी राहत कार्यों में सहयोग कर रहे हैं। प्रशासन का उद्देश्य प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता और सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना है।
स्कूलों में अवकाश घोषित
लगातार खराब मौसम और भारी वर्षा को देखते हुए केरल के कई जिलों के जिला कलेक्टरों ने सोमवार को सभी शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित किया है। यह निर्णय छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें और बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर रखें।
मुख्यमंत्री ने बुलाई समीक्षा बैठक
राज्य में बिगड़ते मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने सभी जिला कलेक्टरों के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठक बुलाई। बैठक का उद्देश्य विभिन्न जिलों की मौजूदा स्थिति का आकलन करना, राहत कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना और आवश्यक अतिरिक्त कदमों पर चर्चा करना था। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री समय पर पहुंचाई जाए।
मौसम विभाग ने जारी किए ताजा आंकड़े
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, 2 अगस्त सुबह 8:30 बजे से 3 अगस्त सुबह 5:30 बजे के बीच पथानामथिट्टा जिले के वेंकुरिंजी क्षेत्र में सबसे अधिक 104.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा इडुक्की जिले के उदुंबन्नूर और चेरुथोनी क्षेत्रों में भी 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। राज्य के कई अन्य जिलों में भी 60 से 90 मिलीमीटर के बीच वर्षा दर्ज की गई, जिससे बाढ़ और जलभराव की स्थिति बनने की आशंका बनी हुई है।
विशेषज्ञों की सलाह
मौसम और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार भारी वर्षा के दौरान लोगों को नदी, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहना चाहिए। प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करना और आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर नजर रखना अत्यंत आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है, इसलिए दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन रणनीतियों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।












