तेलंगाना के खम्मम में CPI कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों और कांग्रेस के चुनावी वादों के खिलाफ कई पैदल मार्च निकाले। बाद में सभी मार्च ZP सेंटर पर एकत्र हुए और बड़ी रैली निकालकर सरकारों से जनहित के वादे पूरे करने की मांग की।
खम्मम: तेलंगाना के खम्मम शहर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने गुरुवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों और राज्य में कांग्रेस द्वारा किए गए चुनावी वादों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने शहर के अलग-अलग इलाकों में पैदल मार्च निकाला और बाद में बड़ी रैली के जरिए अपनी मांगें उठाईं। प्रदर्शन के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई।
कई इलाकों से निकले पैदल मार्च
CPI के प्रदर्शन का आयोजन खम्मम नगर निगम के विभिन्न डिवीजनों में किया गया। पार्टी कार्यकर्ताओं के अलग-अलग समूहों ने शहर के कई हिस्सों से पैदल मार्च शुरू किया। इन मार्चों का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराना और कांग्रेस सरकार से विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने की मांग करना था।
एक मार्च का नेतृत्व CPI राष्ट्रीय परिषद के सदस्य बागम हेमंत राव ने किया। यह मार्च रोटरी नगर स्थित पार्टी कार्यालय से शुरू हुआ और रोटरी नगर तथा इंदिरा नगर से गुजरते हुए जिला परिषद केंद्र यानी ZP सेंटर पहुंचा। यहां अन्य मार्चों से आए पार्टी कार्यकर्ता भी एकत्र हुए।
दूसरे मार्च की अगुवाई CPI के जिला सचिव डांडी सुरेश ने की। यह जुलूस नया बाजार कॉलेज से शुरू हुआ और कालवा ओड्डू, गांधी चौक, कमान बाजार, पुराने नगरपालिका कार्यालय तथा शुक्रवारापु पेटा होते हुए ZP सेंटर पहुंचा।
तीसरे मार्च का नेतृत्व पार्टी के जिला सहायक सचिव जम्मुला जितेंदर रेड्डी ने किया। यह जुलूस अलीपुरम क्रॉसरोड्स से शुरू हुआ और सांबानी नगर, मुस्तफानगर तथा बोनाकल रोड से होकर आगे बढ़ा। इसके बाद तीनों मार्च ZP सेंटर पर एकत्र हुए और संयुक्त रूप से बड़े जुलूस में बदल गए।
मुख्य सड़कों से गुजरी बड़ी रैली
ZP सेंटर पर सभी समूहों के एकत्र होने के बाद CPI ने एक मेगा रैली निकाली। यह जुलूस खम्मम शहर की प्रमुख सड़कों से होकर भक्ता रामदासु कला क्षेत्रम की ओर बढ़ा। रास्ते में पुराना बस स्टैंड और मयूरी सेंटर समेत कई प्रमुख स्थानों से प्रदर्शनकारी गुजरे।
रैली में बड़ी संख्या में CPI कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन के दौरान पारंपरिक डप्पू और कोलाटम दल भी मौजूद रहे। इन सांस्कृतिक टीमों ने जुलूस के दौरान प्रस्तुति देकर प्रदर्शन के माहौल को और प्रभावी बनाया।
पार्टी के अनुसार, मार्च के दौरान कई स्थानीय लोगों ने भी प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताया। इससे रैली को शहर में व्यापक जनसमर्थन मिलने का संदेश देने की कोशिश की गई।
केंद्र की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी
CPI कार्यकर्ताओं ने नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाए। पार्टी ने केंद्र सरकार से उन मुद्दों पर जवाब मांगा, जिन्हें वह आम लोगों और कामगार वर्ग से जुड़े विषयों के रूप में देखती है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाए और जनहित से जुड़े मुद्दों पर अधिक प्रभावी कदम उठाने की मांग की। CPI ने अपने आंदोलन के जरिए केंद्र की आर्थिक और राजनीतिक नीतियों पर असहमति दर्ज कराई।
पार्टी नेताओं का कहना था कि सरकारों की नीतियों का मूल्यांकन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि उनके वास्तविक प्रभाव से किया जाना चाहिए। इसी आधार पर CPI ने केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस से चुनावी वादे पूरे करने की मांग
CPI ने केवल BJP को निशाना नहीं बनाया, बल्कि कांग्रेस से भी चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने की मांग की। पार्टी कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार से जनता से किए गए आश्वासनों को लागू करने की अपील की।
प्रदर्शन का एक प्रमुख संदेश यह रहा कि राजनीतिक दलों को चुनाव के समय किए गए वादों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। CPI ने कहा कि जनता को केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर उनके परिणाम चाहिए।
इस तरह खम्मम में आयोजित प्रदर्शन के जरिए CPI ने केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों की राजनीतिक नीतियों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया।
अस्पतालों और स्थानीय लोगों ने जताया समर्थन
रैली के मार्ग में कुछ स्थानीय संस्थानों और लोगों ने प्रदर्शनकारियों का स्वागत भी किया। ममता अस्पताल में डॉ. बागम किशन राव और सी.एच. सत्यनारायण रेड्डी ने जुलूस में शामिल लोगों का माला पहनाकर अभिनंदन किया।
इसके अलावा वायरा रोड स्थित डॉ. गोर्की अस्पताल के कर्मचारियों ने भी प्रदर्शनकारियों का स्वागत किया। अस्पताल के कर्मचारियों की ओर से एलुरी कृष्ण प्रसाद के नेतृत्व में जुलूस में शामिल लोगों का अभिनंदन किया गया।
CPI ने इन स्वागत कार्यक्रमों को अपने आंदोलन के प्रति स्थानीय स्तर पर मिले समर्थन के तौर पर पेश किया।
संगठनात्मक एकजुटता दिखाने की कोशिश
खम्मम में निकाले गए अलग-अलग मार्च और उनके बाद आयोजित संयुक्त रैली को CPI की संगठनात्मक गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। पार्टी के राष्ट्रीय और जिला स्तर के नेताओं ने अलग-अलग जुलूसों का नेतृत्व किया, जबकि बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने इसमें हिस्सा लिया।
तीनों मार्चों का एक स्थान पर मिलना और उसके बाद संयुक्त रैली निकालना पार्टी की एकजुटता प्रदर्शित करने की रणनीति का हिस्सा रहा। CPI ने इसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर अपनी राजनीतिक सक्रियता को सामने रखा।
प्रदर्शन में शामिल कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से जनहित के मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की मांग की। पार्टी ने यह भी संकेत दिया कि वह अपनी राजनीतिक मांगों को लेकर आने वाले समय में जनता के बीच अभियान जारी रख सकती है।
खम्मम की राजनीति में प्रदर्शन का संदेश
खम्मम तेलंगाना का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक केंद्र है। ऐसे में शहर के प्रमुख इलाकों से निकली CPI की रैली ने पार्टी को अपनी राजनीतिक मौजूदगी दिखाने का अवसर दिया। मार्च में विभिन्न क्षेत्रों से कार्यकर्ताओं की भागीदारी ने संगठन की स्थानीय सक्रियता को भी सामने रखा।
हालांकि प्रदर्शन का मुख्य फोकस केंद्र सरकार की नीतियों और कांग्रेस के चुनावी वादों पर रहा, लेकिन व्यापक रूप से यह आंदोलन राजनीतिक जवाबदेही की मांग के रूप में सामने आया। CPI ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से अपने-अपने वादों और नीतियों को लेकर जनता के प्रति जवाबदेह रहने की मांग की।
रैली के दौरान कार्यकर्ताओं की बड़ी भागीदारी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों तथा संस्थानों द्वारा स्वागत ने प्रदर्शन को शहर में एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम का रूप दिया। CPI ने इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि वह जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज लगातार उठाती रहेगी।
आगे भी जारी रह सकता है राजनीतिक अभियान
खम्मम में हुए इस प्रदर्शन से CPI ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों के खिलाफ अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट कर दी है। पार्टी ने एक ओर मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सरकार से चुनावी घोषणाओं को लागू करने की मांग की।
इस आंदोलन का व्यापक संदेश यही रहा कि राजनीतिक दलों को जनता से किए गए वादों और नीतिगत फैसलों के लिए जवाबदेह होना चाहिए। खम्मम में हुए मार्च और मेगा रैली के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि CPI अपने इन मुद्दों को आगे किस तरह जनता के बीच ले जाती है और क्या आने वाले दिनों में राज्य में ऐसे और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।











