यह कहानी किट्टू नाम की एक डिम्पल वाली क्यूट बच्ची और उसकी नन्ही, सफ़ेद बिल्ली मिश्री की है। किट्टू ने मिश्री को उसकी मिठास के कारण यह नाम दिया था। मिश्री इंसानों की भावनाएँ समझती थी। उनकी यह कहानी सिखाती है कि सच्चा प्यार और देखभाल कैसे दोस्ती को मजबूत बनाते हैं। यह एक अटूट रिश्ता है जो बिना शब्दों के चलता है।
कहानी
एक छोटे से, धूप से रोशन घर में किट्टू अपनी माँ-पापा के साथ रहती थी। घर के पिछले हिस्से में एक छोटा सा बगीचा था, जहाँ रंग-बिरंगे फूल खिलते थे। किट्टू ने इसी बगीचे में एक दिन एक भूखी और डरी हुई बिल्ली के बच्चे को पाया था। उसकी सफ़ेद, रुई जैसी रंगत देखकर किट्टू ने तुरंत उसका नाम मिश्री रख दिया। मिश्री के आते ही किट्टू की दुनिया और भी ज्यादा चंचल हो गई थी।
किट्टू और मिश्री का दिन एक साथ शुरू होता था। जैसे ही सुबह की पहली किरण खिड़की से अंदर आती, मिश्री म्याऊँ-म्याऊँ करते हुए किट्टू के बिस्तर पर चढ़ जाती और किट्टू को अपने छोटे से गुलाबी पंजे से थपथपाकर जगाती। किट्टू आँखें खोलते ही सबसे पहले मिश्री को सहलाती और फिर उसे अपने हाथों से नाश्ते में हल्का गरम दूध पिलाती। किट्टू को मिश्री के मुलायम फर को सहलाना और उसकी खुशी में निकली गुनगुनाती 'प्यूर्र... प्यूर्र...' आवाज़ सुनना बहुत पसंद था। वह आवाज़ किट्टू के लिए दुनिया की सबसे मधुर लोरी थी।
किट्टू और मिश्री पूरा दिन शैतानियाँ करते थे। कभी किट्टू मिश्री के लिए धागे की गेंद बनाती, जिसे मिश्री बिजली की तेज़ी से पकड़ती। कभी वे दोनों बगीचे में तितलियों का पीछा करते और कभी किट्टू की माँ के बुनाई के ऊन के गोलों को पूरे फर्श पर बिखेर देते। इन सब शरारतों के बावजूद, उनका बंधन हर पल गहरा होता गया।
एक दोपहर, किट्टू अपने खिलौनों से खेल रही थी और मिश्री पास बैठकर उसे बड़े ध्यान से देख रही थी। खेलते-खेलते किट्टू का प्यारा गुड़िया वाला घर, जिसे उसके पापा ने बड़े प्यार से बनाया था, ज़मीन पर गिरकर टूट गया। किट्टू बहुत उदास हो गई और फूट-फूटकर रोने लगी।
मिश्री ने देखा कि उसकी दोस्त बहुत दुखी है। वह तुरंत किट्टू के पास गई, अपने छोटे से, फ़्लफी सिर को किट्टू के गाल से छुआ और फिर अपनी जीभ से उसके आंसू पोंछने की कोशिश करने लगी। इसके बाद, मिश्री पास रखी एक चमकीली गेंद को अपने पंजों से मार-मारकर किट्टू की गोद में धकेलने लगी। मिश्री अपनी छोटी-सी आँखों से किट्टू की तरफ ऐसे देख रही थी, जैसे बिना बोले कह रही हो, "चलो किट्टू, रोना बंद करो! गुड़िया का घर ठीक हो जाएगा। देखो, मैं तुम्हारे साथ हूँ। चलो, मेरे साथ खेलो और खुश हो जाओ!"
किट्टू ने मिश्री के इस प्यारे प्रयास को महसूस किया। उसकी छोटी सी दोस्त, जिसे वह इतना प्यार करती थी, उसे खुश करने के लिए इतनी कोशिश कर रही थी। किट्टू ने रोना बंद किया, मिश्री को प्यार से उठाया और उसे कसकर गले लगा लिया। उसने महसूस किया कि मिश्री सिर्फ एक पालतू जानवर नहीं है, वह उसकी भावनाओं को समझने वाली, उसके सुख-दुख में साथ देने वाली सबसे अच्छी दोस्त है।
उस दिन के बाद, किट्टू ने समझ लिया कि दुनिया में सबसे कीमती चीज़ सच्चा स्नेह और दयालुता है। मिश्री ने उसे सिखाया कि प्यार और दोस्ती के लिए कभी-कभी शब्दों की भी ज़रूरत नहीं होती। उनका जीवन एक-दूसरे के प्यार और देखभाल में हर दिन और भी खूबसूरत होता चला गया।
कहानी से सीख
निःस्वार्थ प्यार और दयालुता हमें अद्भुत दोस्त देती है। जानवरों के प्रति देखभाल का भाव रखें, यह जीवन को खुशियों से भर देता है। सच्ची दोस्ती के लिए शब्दों की नहीं, बल्कि एक प्यारे स्पर्श और संवेदनशीलता की ज़रूरत होती है।













