AI डेटा सेंटर्स पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव डाल रहे हैं। इनसे आसपास के क्षेत्रों का तापमान बढ़ रहा है और बड़े पैमाने पर पानी की खपत हो रही है। रिसर्च के अनुसार, डेटा हीट आइलैंड इफेक्ट के कारण जमीन का तापमान औसतन 2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है और 34 करोड़ से अधिक लोग इसके प्रभाव में हैं।
AI Data Centres Impact: हालिया स्टडी में सामने आया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर्स न केवल भारी मात्रा में बिजली और पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय तापमान में भी वृद्धि कर रहे हैं। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों ने पाया कि इन सेंटर्स के कारण जमीन का तापमान औसतन 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है और आस-पास के क्षेत्रों में हीट आइलैंड इफेक्ट बनता है। यह प्रभाव 9.9 किलोमीटर तक फैला हुआ है और करीब 34 करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं।
डेटा सेंटर्स से बढ़ रहा लोकल तापमान
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च में 6000 से अधिक डेटा सेंटर्स का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि AI डेटा सेंटर्स के संचालन के बाद आसपास के क्षेत्रों में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कई मामलों में यह बढ़ोतरी 9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह ‘हीट आइलैंड’ प्रभाव स्थानीय माइक्रोक्लाइमेट को बदल रहा है। इसका मतलब है कि जिन क्षेत्रों में ये डेटा सेंटर मौजूद हैं, वहां का मौसम पैटर्न धीरे-धीरे बदल सकता है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर पड़ सकता है।

पानी की खपत भी बनी बड़ी समस्या
AI डेटा सेंटर्स का एक और बड़ा प्रभाव पानी की खपत के रूप में सामने आया है। इन सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए बड़े पैमाने पर कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जो लाखों लीटर पानी खर्च करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, एक मीडियम साइज डेटा सेंटर सालाना करीब 110 मिलियन गैलन पानी इस्तेमाल करता है, जो लगभग 1000 घरों के सालाना उपयोग के बराबर है। वहीं, बड़े डेटा सेंटर रोजाना 5 मिलियन गैलन तक पानी खर्च कर सकते हैं, जिससे पानी की कमी वाले इलाकों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल का पर्यावरणीय असर
विशेषज्ञों का कहना है कि AI के बढ़ते उपयोग के साथ पर्यावरण पर दबाव भी बढ़ रहा है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के वैज्ञानिकों के अनुसार, एक साधारण AI प्रॉम्प्ट (लगभग 100 शब्द) को प्रोसेस करने में करीब 519 मिलीलीटर पानी की खपत हो सकती है।
इस तरह की खपत लंबे समय में बड़े स्तर पर संसाधनों पर दबाव डालती है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले से ही जल संकट मौजूद है, वहां AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग नई चुनौतियां खड़ी कर सकती है।










