कोलेस्ट्रॉल पर 8 साल बाद नई गाइडलाइन: LDL 100 से नीचे रखें, 20 साल की उम्र से कराएं टेस्ट

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी ने कोलेस्ट्रॉल पर गाइडलाइन जारी की, LDL को 100 से नीचे रखना और 20 साल की उम्र से टेस्ट कराना जरूरी।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (ACC) ने कोलेस्ट्रॉल पर नई गाइडलाइन जारी की है। यह गाइडलाइन पिछले आठ सालों में सबसे बड़ा अपडेट है, क्योंकि इसमें पुराने LDL और HDL पैरामीटर्स को पूरी तरह बदल दिया गया है। वर्ल्ड हेल्थ फेडरेशन (WHF) के अनुसार, दुनियाभर में कार्डियोवस्कुलर डिजीज (CVD) के कारण हर साल 2 करोड़ से ज्यादा लोग अपनी जान गंवाते हैं। हाई कोलेस्ट्रॉल इसके लिए एक प्रमुख कारण है। इसलिए नई गाइडलाइन को समझना और अपनाना बेहद जरूरी है।

कोलेस्ट्रॉल क्या है और यह शरीर के लिए क्यों जरूरी है?

कोलेस्ट्रॉल एक प्रकार का फैट (लिपिड) है, जो हमारे ब्लड में मौजूद रहता है। यह दो तरह का होता है:

LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल): यह आर्टरीज में जमा होकर ब्लॉकेज कर सकता है और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ाता है।
HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल): यह एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल को आर्टरीज से हटाकर लिवर तक ले जाता है और हार्ट को हेल्दी रखता है।

कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य करता है:

सेल वॉल्स (दीवार) बनाने में मदद करता है।
कुछ हार्मोन्स और विटामिन D के निर्माण में जरूरी है।
पाचन के लिए बाइल जूस बनाने में योगदान देता है।
गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) हार्ट को सुरक्षित रखता है।
नई गाइडलाइन: LDL और नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल

नई गाइडलाइन के अनुसार, अब ‘नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल’ की कोई तय बेसलाइन नहीं है। इसके बजाय पर्सनलाइज्ड रिस्क पर जोर दिया गया है।

पुरानी गाइडलाइन में LDL 130 mg/dL से कम रखने की सलाह थी।
नई गाइडलाइन में LDL के टारगेट को तीन कैटेगरी में बांटा गया है:
नॉर्मल रिस्क वाले: LDL 100 mg/dL से कम रखें।
मीडियम रिस्क वाले: LDL 70 mg/dL से कम रखें।
हाई रिस्क वाले: LDL 55 mg/dL तक कम करें।

इस बदलाव का मतलब है कि ‘नॉर्मल’ की परिभाषा अब हर व्यक्ति के रिस्क लेवल पर निर्भर करती है। यह व्यक्ति विशेष की उम्र, फैमिली हिस्ट्री और अन्य हेल्थ फैक्टर्स पर आधारित है।

रिस्क कैलकुलेशन और टेस्टिंग

नई गाइडलाइन में रिस्क कैलकुलेशन पहले से अधिक कॉम्प्रिहेंसिव बनाया गया है।

टेस्टिंग की शुरुआत: 20 साल की उम्र से नियमित कोलेस्ट्रॉल टेस्ट कराना चाहिए।
स्क्रीनिंग से हाई कोलेस्ट्रॉल का समय पर पता चल सकता है।
कम उम्र में भी हाई कोलेस्ट्रॉल हो सकता है, खासकर अगर फैमिली हिस्ट्री हो या लाइफस्टाइल अनहेल्दी हो।
लाइफस्टाइल और दवा: क्या जरूरी है?

नई गाइडलाइन के अनुसार, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल के लिए सबसे पहला कदम लाइफस्टाइल बदलाव है।

कम रिस्क वाले लोग: हेल्दी डाइट, नियमित एक्सरसाइज और वेट कंट्रोल पर्याप्त हो सकता है।
ज्यादा रिस्क वाले लोग: दवा के साथ लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी है।
हार्ट डिजीज वाले लोग: LDL को 55 mg/dL तक कम रखना चाहिए, नियमित टेस्ट और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेना जरूरी है।

लाइफस्टाइल बदलाव के टिप्स:

स्ट्रिक्ट हार्ट-हेल्दी डाइट (कम फैट, ज्यादा फाइबर) अपनाएं।
नियमित एक्सरसाइज करें।
ब्लड प्रेशर और शुगर कंट्रोल में रखें।
स्मोकिंग और तंबाकू से दूर रहें।
पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस को मैनेज करें।
LDL vs HDL: क्या अंतर है?
LDL (बैड): यह ब्लॉकेज कर हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ाता है।
HDL (गुड): यह एक्स्ट्रा कोलेस्ट्रॉल को आर्टरीज से हटाकर लिवर तक पहुंचाता है और हार्ट को हेल्दी रखता है।

यह समझना जरूरी है कि सिर्फ HDL बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, LDL को कम रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

कौन ज्यादा रिस्क में है?
पहले से किसी क्रॉनिक डिजीज का सामना कर रहे लोग।
फैमिली हिस्ट्री वाले लोग।
कम उम्र में अनहेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोग, जैसे जंक फूड, कम फिजिकल एक्टिविटी और मोटापा।

हाई कोलेस्ट्रॉल अक्सर साइलेंट प्रॉब्लम होता है, यानी इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। लंबे समय तक हाई रहने पर हार्ट डिजीज, ब्लॉकेज और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए समय पर स्क्रीनिंग और टेस्टिंग बेहद जरूरी है।

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