कर्नाटक सरकार 2026-27 से 317 सरकारी स्कूलों को नजदीकी PM SHRI स्कूलों से जोड़ने जा रही है। इस योजना के तहत डिजिटल सुविधाएं, स्मार्ट क्लास, लैब और बेहतर शैक्षणिक ढांचा विकसित कर सरकारी शिक्षा को मजबूत बनाया जाएगा।
बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने और उन्हें आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार अब 317 सरकारी स्कूलों को नजदीकी PM SHRI स्कूलों से जोड़ने की तैयारी कर रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को बेहतर बुनियादी ढांचा, डिजिटल शिक्षा और आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
सरकार का मानना है कि इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधरेगा और छात्रों को निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। यह परियोजना 2026–27 शैक्षणिक सत्र से लागू किए जाने की संभावना है।
क्या है PM SHRI योजना?
PM SHRI यानी “पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया” भारत सरकार की एक प्रमुख शिक्षा योजना है। इसका उद्देश्य देशभर के चुनिंदा सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करना है। इन स्कूलों में आधुनिक तकनीक, डिजिटल शिक्षा और कौशल आधारित शिक्षण व्यवस्था लागू की जा रही है।
इन संस्थानों को “लीड स्कूल” की तरह विकसित किया जा रहा है ताकि वे आसपास के अन्य सरकारी स्कूलों को भी शैक्षणिक मार्गदर्शन दे सकें। वर्तमान में कर्नाटक में 585 PM SHRI स्कूल विभिन्न जिलों में संचालित हो रहे हैं।
317 स्कूलों को 225 PM SHRI स्कूलों से जोड़ा जाएगा
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिन सरकारी स्कूलों को इस योजना में शामिल किया गया है, वे PM SHRI स्कूलों से 1 से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। लगभग 225 PM SHRI स्कूलों के साथ इन 317 स्कूलों को जोड़ा जाएगा।
यह पूरी व्यवस्था क्लस्टर आधारित मॉडल पर काम करेगी। इसका मतलब है कि एक मजबूत PM SHRI स्कूल अपने आसपास के कई सरकारी स्कूलों को अकादमिक और प्रशासनिक सहयोग देगा। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और छोटे स्कूलों को भी आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
स्कूलों का नाम और प्रशासनिक व्यवस्था बदलेगी
सरकार की योजना के अनुसार ये स्कूल अपने मौजूदा भवनों में ही चलते रहेंगे, लेकिन उन्हें “PM SHRI Composite Government Schools” के नाम से जाना जाएगा।
इसके अलावा स्कूलों का DISE कोड संबंधित PM SHRI स्कूल से जोड़ा जाएगा। हालांकि पुराने छात्रों का रिकॉर्ड और शैक्षणिक डेटा पहले की तरह सुरक्षित रखा जाएगा। इससे प्रशासनिक निगरानी आसान होगी और स्कूलों के प्रदर्शन को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा।
डिजिटल शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं पर फोकस
इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों में बड़े पैमाने पर डिजिटल और तकनीकी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य केवल पारंपरिक पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करना भी है।
![]()
स्कूलों में जिन सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा, उनमें शामिल हैं:
- स्मार्ट क्लासरूम
- आधुनिक कंप्यूटर लैब
- विज्ञान प्रयोगशालाएं
- Atal Tinkering Labs
- डिजिटल लर्निंग सिस्टम
Atal Tinkering Labs के जरिए छात्रों को रोबोटिक्स, विज्ञान प्रयोग और तकनीकी नवाचारों की जानकारी दी जाएगी, जिससे उनमें रचनात्मक सोच विकसित हो सके।
रटने वाली पढ़ाई की जगह अनुभव आधारित शिक्षा
नई शिक्षा व्यवस्था का फोकस केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार चाहती है कि छात्र प्रयोगों, गतिविधियों और तकनीकी माध्यमों के जरिए सीखें।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज की दुनिया में केवल थ्योरी आधारित शिक्षा पर्याप्त नहीं है। छात्रों को समस्या समाधान, नवाचार और तकनीकी कौशल की भी जरूरत होती है। यही वजह है कि इस योजना में अनुभव आधारित शिक्षण मॉडल को प्राथमिकता दी जा रही है।
अतिरिक्त स्टाफ की भी होगी नियुक्ति
शिक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि जिन स्कूलों में 150 से अधिक छात्र होंगे, वहां अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की जा सकती है। इसका उद्देश्य स्कूलों का प्रशासनिक बोझ कम करना और शिक्षकों को पढ़ाई पर अधिक ध्यान देने का अवसर देना है।
संभावित नियुक्तियों में शामिल हो सकते हैं:
- फर्स्ट डिवीजन असिस्टेंट
- ग्रुप-D कर्मचारी
- तकनीकी सहायता स्टाफ
सरकार का मानना है कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था से स्कूलों का संचालन अधिक प्रभावी बनेगा।
सरकारी स्कूलों की छवि सुधारने की कोशिश
भारत में लंबे समय से सरकारी स्कूलों को संसाधनों की कमी और कमजोर बुनियादी ढांचे जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में कई राज्यों ने सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
कर्नाटक सरकार की यह योजना भी उसी दिशा में एक बड़ा प्रयास मानी जा रही है। इससे न केवल स्कूलों की छवि बेहतर होगी, बल्कि गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।
ग्रामीण छात्रों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि इस योजना का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को मिलेगा। कई सरकारी स्कूलों में अभी भी डिजिटल सुविधाएं और आधुनिक प्रयोगशालाएं नहीं हैं।
नई योजना लागू होने के बाद छात्रों को:
- बेहतर तकनीकी संसाधन
- डिजिटल शिक्षा
- आधुनिक लैब
- कौशल आधारित प्रशिक्षण
जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। इससे ग्रामीण और शहरी शिक्षा के बीच का अंतर कम करने में मदद मिल सकती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से जुड़ा है मॉडल
यह पूरी योजना भारत की National Education Policy (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार की जा रही है। नई शिक्षा नीति में डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और बहु-विषयक शिक्षण पर जोर दिया गया है।
सरकार चाहती है कि सरकारी स्कूल भी भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार हों और छात्र केवल परीक्षा पास करने तक सीमित न रहें, बल्कि रोजगार और तकनीकी दुनिया के लिए भी तैयार हों।









