अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर में बिछी इंटरनेट केबलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है। इन केबलों के डैमेज होने पर भारत समेत एशिया, यूरोप और अफ्रीका के कई देशों में इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल जहाजों का पहुंचना मुश्किल है, जिससे मरम्मत में लंबा समय लग सकता है।
War Threat To Undersea Internet Cables: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर में समुद्र के नीचे बिछी ऑप्टिकल फाइबर केबलों को नुकसान पहुंचने का खतरा है। ये केबल एशिया, यूरोप और अफ्रीका के देशों में इंटरनेट कनेक्टिविटी मुहैया कराती हैं। युद्ध के कारण समुद्री मार्ग ब्लॉक होने से केबल की मरम्मत मुश्किल हो सकती है और इससे इंटरनेट ट्रैफिक धीमा या ठप्प हो सकता है, जिसका असर व्यापार और रोजमर्रा की ऑनलाइन गतिविधियों पर पड़ेगा।
समुद्र में बिछा इंटरनेट का जाल
होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर में बड़ी कंपनियों जैसे टाटा TGN गल्फ, गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल, FALCON और AAE-1 के ऑप्टिकल फाइबर केबल सिस्टम बिछे हुए हैं। इन केबलों के जरिए एशिया, यूरोप और अफ्रीका के कई देशों को इंटरनेट कनेक्टिविटी मिलती है। डेटा सेंटर और बड़ी कंपनियों का संचालन भी इन केबलों पर निर्भर है।

ब्लॉक हुए जरूरी रास्ते
युद्ध के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया है और समुद्री ट्रैफिक लगभग बंद है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस रास्ते पर सी माइन्स भी बिछा रखी हैं, जिससे केबल और जहाजों के लिए खतरा और बढ़ गया है। इसके अलावा लाल सागर में बाब अल-मंडेब का मार्ग भी असुरक्षित माना जा रहा है।
खतरा और संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में इंटरनेट केबल को हल्का नुकसान भी पहुंचा तो इसे ठीक करने में लंबा समय लग सकता है। फिलहाल जहाजों का पहुंचना असंभव है, इसलिए किसी भी नुकसान के लिए युद्ध के थमने का इंतजार करना पड़ सकता है। इससे इंटरनेट ट्रैफिक धीमा या ठप्प हो सकता है, जिसका असर व्यापार और रोजमर्रा की ऑनलाइन गतिविधियों पर पड़ सकता है।








