बाड़मेर के फागलिया गांव में करैत सांप के काटने से पति-पत्नी की मौत हो गई, जबकि बेटा अस्पताल में भर्ती है। घटना के बाद फैली ‘पीवणा सांप’ की अफवाहों को एक्सपर्ट्स ने खारिज करते हुए बताया कि मौत न्यूरोटॉक्सिन जहर से होती है।
बाड़मेर: भारत के पश्चिमी रेगिस्तानी क्षेत्र राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक दर्दनाक सर्पदंश घटना के बाद स्थानीय समुदाय में भय और अंधविश्वास दोनों तेजी से फैल रहे हैं। एक युवा दंपती की मौत और उनके बेटे के गंभीर रूप से घायल होने के बाद ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि कथित “पीवणा सांप” सोते हुए लोगों की छाती पर बैठकर उनकी सांसें खींच लेता है। हालांकि वन्यजीव विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने रखी है।
क्या है पूरा मामला?
राजस्थान के बाड़मेर जिले के फागलिया गांव में एक परिवार गर्मी के मौसम में घर के बाहर खाट पर सो रहा था। रात के दौरान एक करैत प्रजाति के सांप ने परिवार के तीन सदस्यों को काट लिया। घटना में पति और पत्नी की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि उनका बेटा गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।
परिवार का एक शिशु सुरक्षित बच गया क्योंकि वह कंबल में लिपटा हुआ था। इस दुखद घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया और इसके बाद ग्रामीणों के बीच करैत सांप को लेकर पुराने लोकविश्वास और कहानियां फिर चर्चा में आ गईं।
‘पीवणा सांप’ की कहानी क्यों चर्चा में है?
स्थानीय लोगों के अनुसार करैत सांप को कई इलाकों में “पीवणा” कहा जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि यह सांप रात में सोते हुए व्यक्ति की छाती पर बैठ जाता है और उसकी सांसें खींच लेता है। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि सांप किसी व्यक्ति को काटने के बाद अगली रात उसी स्थान पर वापस लौटता है और वहां मौजूद अन्य लोगों को भी नुकसान पहुंचाता है।
घटना के बाद गांव में डर का माहौल है। कई परिवारों ने खुले में सोना बंद कर दिया है और रात के समय विशेष सावधानी बरत रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार नहीं है।
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विशेषज्ञों ने बताया: करैत क्यों है खतरनाक?
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार करैत दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में से एक माना जाता है। यह मुख्य रूप से रात में सक्रिय रहता है और अक्सर मानव बस्तियों के आसपास भी दिखाई देता है।
करैत के जहर में शक्तिशाली न्यूरोटॉक्सिन होता है, जो शरीर के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। यह जहर धीरे-धीरे मांसपेशियों को निष्क्रिय कर देता है और समय पर इलाज न मिलने पर सांस लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि कई मामलों में पीड़ित को शुरुआत में गंभीर खतरे का एहसास नहीं होता और स्थिति अचानक बिगड़ जाती है।
क्यों नहीं चल पाता काटने का पता?
चिकित्सकों के अनुसार करैत के दांत बेहद छोटे और महीन होते हैं। इसके काटने पर अक्सर न तो तेज दर्द होता है और न ही सूजन दिखाई देती है। कई बार पीड़ित व्यक्ति को लगता है कि उसे किसी कीड़े या मच्छर ने काटा है। यदि व्यक्ति सो रहा हो तो वह दोबारा सो जाता है और चिकित्सा सहायता लेने में देरी हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यही कारण है कि करैत को कई बार “साइलेंट किलर” कहा जाता है।
क्या सचमुच छाती पर बैठकर सांस खींचता है सांप?
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यह दावा पूरी तरह मिथक है। सांपों की जैविक संरचना ऐसी नहीं होती कि वे किसी इंसान की सांस खींच सकें। करैत भी अन्य सांपों की तरह केवल काटकर जहर छोड़ता है। इसके बाद जहर शरीर के भीतर असर करता है, जिससे पीड़ित को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। ग्रामीण समाज में वर्षों से प्रचलित कहानियों के कारण यह धारणा बनी कि सांप सीधे सांस खींच लेता है, जबकि वास्तविकता में मौत का कारण न्यूरोटॉक्सिक जहर का प्रभाव होता है।
क्या करैत दोबारा उसी जगह लौटता है?
घटना के बाद यह दावा भी सामने आया कि सांप अगले दिन फिर उसी खाट के पास दिखाई दिया जहां उसने परिवार को काटा था। विशेषज्ञों के अनुसार सांप अपने “पैरों के निशान” नहीं खोजता क्योंकि उसके पैर होते ही नहीं हैं। वह किसी व्यक्ति का पीछा भी नहीं करता।
हालांकि यह संभव है कि जिस स्थान पर उसे आश्रय, तापमान या भोजन के लिए अनुकूल वातावरण मिला हो, वह वहां दोबारा आ जाए। इसी वजह से कुछ लोगों को लगता है कि सांप जानबूझकर उसी जगह लौटता है।
बिस्तरों और घरों में क्यों छिपते हैं करैत?
सर्प विशेषज्ञों का कहना है कि करैत अक्सर रात के समय गर्म और सुरक्षित स्थानों की तलाश करता है। जमीन पर बिछे बिस्तर, कंबल, कपड़ों के ढेर या घर के कोने उसके लिए उपयुक्त छिपने की जगह बन सकते हैं।
यदि सोते समय व्यक्ति अचानक करवट बदलता है या शरीर हिलाता है तो सांप इसे खतरा समझ सकता है और काट सकता है। यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में जमीन के बहुत करीब सोने वाले लोगों में सर्पदंश की घटनाएं अधिक देखी जाती हैं।
समय पर इलाज ही सबसे बड़ा बचाव
डॉक्टरों के अनुसार करैत के काटने के बाद शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि पीड़ित को समय रहते अस्पताल पहुंचाकर एंटी-स्नेक वेनम दिया जाए तो अधिकांश मामलों में जान बचाई जा सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक, घरेलू उपचार या अंधविश्वासों पर भरोसा करने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की जरूरत
बाड़मेर की यह घटना केवल एक सर्पदंश का मामला नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि आज भी कई क्षेत्रों में सांपों को लेकर वैज्ञानिक जानकारी की कमी है। अंधविश्वास और लोककथाएं अक्सर लोगों को वास्तविक खतरे और उसके समाधान से दूर कर देती हैं।
वन विभाग और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण समुदायों में जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है ताकि लोग सांपों के व्यवहार, सर्पदंश के लक्षण और प्राथमिक उपचार के बारे में सही जानकारी प्राप्त कर सकें।








