Maharashtra UCC Committee: पूर्व जज आरसी चव्हाण ने दिया इस्तीफा, बैठक और फीडबैक प्रक्रिया पर उठाए सवाल

Maharashtra UCC Committee: रिटायर्ड जज आरसी चव्हाण ने महाराष्ट्र की UCC समिति से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पब्लिक फीडबैक के लिए प्रश्नावली और बैठक में गैर-सदस्य

महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए गठित कमेटी से पूर्व जज आरसी चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया है। अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चव्हाण ने कमेटी की बैठकों में गैर-सदस्यों की कथित मौजूदगी और जनता से फीडबैक लेने की प्रक्रिया को लेकर इस्तीफा दिया।

Maharashtra UCC Committee: महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर गठित समिति में बदलाव हुआ है। बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आरसी चव्हाण ने समिति की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने समिति की बैठकों में गैर-सदस्य की कथित मौजूदगी और आम लोगों से सुझाव लेने की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई है। उनका इस्तीफा समिति की दूसरी बैठक के बाद सामने आया है।

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में UCC का मसौदा तैयार करने और इससे जुड़े प्रावधानों पर सुझाव देने के लिए एक सात सदस्यीय समिति गठित की है। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई कर रही हैं। समिति को राज्य में समान नागरिक संहिता के लिए जरूरी नियमों और प्रस्तावित प्रावधानों पर काम करना है।

बैठक की प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल

जस्टिस आरसी चव्हाण का इस्तीफा समिति की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा के बीच आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व न्यायाधीश ने समिति की बैठकों में ऐसे व्यक्ति की कथित मौजूदगी पर सवाल उठाया, जो समिति का सदस्य नहीं था। इसके साथ ही उन्होंने सार्वजनिक सुझाव और फीडबैक जुटाने की प्रक्रिया को लेकर भी अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।

हालांकि, इन आपत्तियों को जस्टिस चव्हाण की ओर से उठाए गए सवालों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। समिति या राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया की जानकारी उपलब्ध स्रोतों में स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है।

सात सदस्यीय समिति में कौन-कौन शामिल?

महाराष्ट्र की UCC समिति में न्यायिक, प्रशासनिक, कानूनी और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। जस्टिस रंजना देसाई समिति की अध्यक्ष हैं। उनके अलावा बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आरसी चव्हाण और जस्टिस एसजी मेहरे सदस्य बनाए गए थे। समिति में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव डीके जैन, पूर्व एडवोकेट जनरल बीरेंद्र सराफ, सामाजिक क्षेत्र से जुड़े रमेश पतंगे और शिक्षाविद डॉ. सुवर्णा रावल भी शामिल हैं।

जस्टिस चव्हाण के इस्तीफे के बाद समिति की संरचना और आगे की कार्यप्रणाली पर ध्यान बना हुआ है। खासतौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समिति अपने निर्धारित काम को किस तरह आगे बढ़ाती है और सार्वजनिक सुझावों को किस प्रक्रिया के तहत शामिल किया जाता है।

महाराष्ट्र में UCC को लेकर क्या है सरकार की योजना?

महाराष्ट्र में UCC को लेकर समिति का गठन राज्य सरकार की व्यापक नीति प्रक्रिया का हिस्सा है। समिति का उद्देश्य अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े विषयों का अध्ययन करके राज्य के लिए प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के नियमों और प्रावधानों पर सुझाव देना है। UCC का संबंध मुख्य रूप से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक मामलों जैसे व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े विषयों से माना जाता है। 

भारत में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए इन विषयों पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानून मौजूद हैं। समान नागरिक संहिता का विचार इनसे जुड़े नियमों को एक समान कानूनी ढांचे में लाने से संबंधित है।

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