महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को है। इस दिन विशेष पूजा, मंत्र जाप और शिवलिंग अभिषेक से विवाह और धन संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। माता पार्वती को सिंदूर और चूड़ियां अर्पित करना शुभ माना जाता है।
महाशिवरात्रि 2026 कब है
इस साल महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शुरू होकर अगले दिन 16 फरवरी को शाम 5:34 बजे तक रहेगी। ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि इस दिन शुभ योग और नक्षत्रों का संयोग विशेष फलदायक है।
सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7 बजे से शाम 7:48 बजे तक रहेगा। उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र का संयोग होगा। रात्रि में निशिता काल 11:52 से 12:42 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल को विशेष शुभ समय माना गया है।
महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व
महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का दिन माना जाता है। अविवाहित लोग इस दिन की पूजा करके जीवनसाथी पाने की कामना कर सकते हैं। वहीं विवाहित लोग दांपत्य सुख और जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए इस दिन विशेष उपाय करते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग की पूजा और मंत्र जाप से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। घर में सुख-शांति बनी रहती है और विवाह या धन संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है।
विवाह और धन से जुड़ी समस्याओं के उपाय
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि अगर विवाह में देरी हो रही है या दांपत्य जीवन में तनाव है, तो इस दिन शिव और पार्वती की संयुक्त पूजा करें।
- पार्वती माता को सिंदूर, चूड़ियां और बिंदी चढ़ाएं।
- भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें।
- धन संबंधी समस्याओं से राहत पाने के लिए गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
इसके अलावा, शिवलिंग पर 11 बेलपत्र चढ़ाना, धतूरा और भांग अर्पित करना मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए लाभकारी है। सात शमी पुष्प अर्पित करने से ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है और इच्छाएं पूरी होती हैं।
कैसे बढ़ाएं पूजा का लाभ
महाशिवरात्रि पर सुबह से लेकर रात्रि तक शुभ मुहूर्त में पूजा करने से सबसे अधिक लाभ होता है। अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल में मंत्र जाप करना शुभ माना गया है।
इस दिन ध्यान रखें कि पूजा में विश्वास और श्रद्धा हो। अपने घर के साफ स्थान पर शिवलिंग स्थापित करें और पूरे दिन सकारात्मक विचारों के साथ व्रत करें।








