मैं अपने ही घर में कैदी था”: ब्रिटेन में ‘कुकूइंग’ का खौफनाक खुलासा, हर हफ्ते सैकड़ों घरों पर ड्रग गैंग्स का कब्जा

यूके में ‘कुकूइंग’ नामक अपराध बढ़ रहा है, जहां ड्रग गैंग लोगों के घरों पर कब्जा कर लेते हैं। पुलिस ने सैकड़ों मामले उजागर किए, नया कानून लागू होने की तैयारी है।

यूके में ‘कुकूइंग’ नामक खतरनाक अपराध तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें ड्रग गैंग लोगों के घरों पर कब्जा कर अवैध गतिविधियां चला रहे हैं। पुलिस के अनुसार हर हफ्ते सैकड़ों घर प्रभावित हो रहे हैं और नया कानून लागू होने वाला है।

लंदन: ब्रिटेन में एक खतरनाक आपराधिक पैटर्न तेजी से फैल रहा है, जिसे “कुकूइंग” कहा जाता है। यह शब्द उस पक्षी ‘कुकू’ से लिया गया है, जो दूसरे पक्षियों के घोंसलों पर कब्जा कर लेता है। इसी तरह ड्रग गैंग्स कमजोर और असुरक्षित लोगों के घरों पर कब्जा कर उन्हें अपने अपराधों का अड्डा बना रहे हैं।

ब्रिटिश पुलिस और नेशनल पुलिस चीफ्स काउंसिल (NPCC) के अनुसार, हर हफ्ते सैकड़ों, और संभवतः हजारों घर इस तरह के कब्जे का शिकार हो रहे हैं। ये गिरोह घरों का इस्तेमाल मुख्य रूप से ड्रग्स स्टोर करने, बेचने और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए करते हैं।

नया कानून बनने की तैयारी, लेकिन लागू करने में देरी

ब्रिटेन सरकार ने इस अपराध को गंभीर मानते हुए इसे जल्द ही एक अलग आपराधिक अपराध घोषित करने की तैयारी की है। “क्राइम एंड पुलिसिंग एक्ट 2026” के तहत इसे कानून का हिस्सा बनाया जाएगा, जिसमें दोषियों को अधिकतम पांच साल की जेल की सजा हो सकती है।

हालांकि, पुलिस बलों के लिए अभी तक जरूरी कानूनी दिशा-निर्देश (statutory guidance) जारी नहीं किए गए हैं, जिसके कारण इसे पूरी तरह लागू करने में देरी हो रही है। पुलिस का कहना है कि स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलने के बाद कार्रवाई और अधिक प्रभावी हो सकेगी।

“मैं अपने घर में कैदी बन गया था” – पीड़ितों की दर्दनाक कहानियां

इस मामले में पीड़ितों की गवाही बेहद चौंकाने वाली है। कई लोगों ने कहा कि वे अपने ही घरों में कैदी की तरह रहने को मजबूर हो गए थे।

34 वर्षीय जेमी, जो पहले से ब्रेन डैमेज से पीड़ित हैं, एक ऐसे ही मामले का शिकार बने। उन्होंने बताया कि एक गिरोह ने पहले उनसे दोस्ती की और फिर बिना अनुमति उनके घर में कब्जा कर लिया। धीरे-धीरे घर को ड्रग्स बेचने का अड्डा बना दिया गया।

जेमी ने बताया कि उनके साथ मारपीट की गई, उनकी चीजें चोरी की गईं और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। हालात इतने खराब हो गए कि उन्हें अपना घर छोड़कर दूसरे इलाके में भागना पड़ा।

एक अन्य पीड़िता जैकी ने बताया कि वह नशे की लत से जूझ रही थीं, और इसी कमजोरी का फायदा उठाकर ड्रग डीलर ने उन पर दबाव बनाया। उसने कर्ज बढ़ा दिया और बदले में अपने एक साथी को घर में रहने के लिए भेज दिया। जैकी ने कहा कि उन्हें कई महीनों तक अपने ही घर में एक कमरे तक सीमित रहना पड़ा और वे खुद को “अपने घर की कैदी” महसूस करती थीं।

अपराध का तरीका: कैसे घरों पर होता है कब्जा

पुलिस के अनुसार, कुकूइंग आमतौर पर उन लोगों को निशाना बनाता है जो पहले से कमजोर स्थिति में होते हैं—जैसे नशे के आदी, बुजुर्ग, मानसिक या शारीरिक रूप से अस्वस्थ लोग।

गिरोह पहले पीड़ित से संपर्क बनाते हैं, फिर धीरे-धीरे भरोसा जीतकर या धमकी देकर उनके घर में घुस जाते हैं। एक बार अंदर आने के बाद वे घर छोड़ने से इनकार कर देते हैं और उसे पूरी तरह अपराध केंद्र में बदल देते हैं।

पुलिस की कार्रवाई और जांच के आंकड़े

लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने इस साल मार्च में 683 संदिग्ध ठिकानों की जांच की। इसके बाद सामने आया कि ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 2023–24 में जहां 380 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2025–26 में यह संख्या बढ़कर 1,078 तक पहुंच गई।

पुलिस का मानना है कि यह बढ़ोतरी केवल मामलों की संख्या में वृद्धि नहीं है, बल्कि अब अधिक जागरूकता और रिपोर्टिंग के कारण भी आंकड़े सामने आ रहे हैं।

ड्रग गैंग्स का नेटवर्क और काउंटी लाइन्स कनेक्शन

विशेषज्ञों के अनुसार, कुकूइंग का सीधा संबंध “काउंटी लाइन्स” नामक ड्रग नेटवर्क से है। इसमें बड़े शहरों से छोटे इलाकों में ड्रग्स की सप्लाई की जाती है।

गिरोह ऐसे घरों का इस्तेमाल “सेफ हाउस” की तरह करते हैं, जहां से ड्रग्स की पैकिंग और सप्लाई होती है। कई मामलों में इन घरों में हिंसा, धमकी और यौन शोषण तक की घटनाएं सामने आई हैं।

गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के मामले

NPCC के अनुसार, कुछ मामलों में पीड़ितों को बेहद अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। रिपोर्टों में कहा गया है कि पीड़ितों को डराने-धमकाने के लिए उन्हें अपमानजनक और क्रूर परिस्थितियों में रखा गया, ताकि वे पुलिस से शिकायत न कर सकें।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह अपराध “छिपा हुआ अपराध” है, क्योंकि यह लोगों के अपने घरों के अंदर होता है और बाहर से इसे पहचानना बेहद मुश्किल है।

विशेषज्ञों की चेतावनी और सुधार की जरूरत

लीड्स यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता डॉ. एमी लॉगहैरी ने कहा है कि कई बार पुलिस भी पीड़ितों को सही तरीके से पहचान नहीं पाती, क्योंकि उनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड या ड्रग्स से संबंध रहा होता है।

उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए बेहतर प्रशिक्षण, स्पष्ट दिशा-निर्देश और मजबूत नीतियों की जरूरत है, ताकि असली पीड़ितों को सुरक्षा मिल सके।

सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया

ब्रिटेन के गृह मंत्रालय (Home Office) ने इस मामले को “भयानक और अमानवीय” बताया है। सरकार ने कहा है कि वह काउंटी लाइन्स और संगठित अपराधों के खिलाफ 34 मिलियन पाउंड से अधिक निवेश कर रही है, ताकि ऐसे गैंग्स को खत्म किया जा सके।

पुलिस का कहना है कि नए कानून के लागू होने के बाद कुकूइंग के खिलाफ कार्रवाई और तेज होगी और अपराधियों को सख्त सजा दी जाएगी।

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