मंडी-धर्मपुर NH 13 घंटे से बंद, पहाड़ी से गिर रहे पत्थर; 7 किमी पैदल चल रहे लोग

मंडी-धर्मपुर NH पर पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण 13 घंटे से यातायात बंद है। लोग 7 किमी पैदल चलने को मजबूर हैं, नौकरीपेशा और स्कूली बच्चे परेशान हैं।
मंडी-धर्मपुर NH 13 घंटे से बंद, पहाड़ी से गिर रहे पत्थर; 7 किमी पैदल चल रहे लोग
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हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में मंडी-धर्मपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा गिरने के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गई है। सड़क लंबे समय से बंद होने के कारण दोनों तरफ वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि जरूरी काम से आने-जाने वाले लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए करीब 7 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ रहा है। सड़क बंद होने का सबसे ज्यादा असर नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ रहा है। लोग अपने वाहन सड़क के एक हिस्से में छोड़कर पैदल आगे जाने को मजबूर हैं।

मंडी और धर्मपुर क्षेत्र को जोड़ने वाले इस मार्ग पर पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है। बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों में सड़क पर मलबा और चट्टानें आने की घटनाएं आम हो जाती हैं। मंडी जिले में इससे पहले भी भूस्खलन के कारण कई मार्गों पर यातायात बाधित हो चुका है। हाल ही में मंडी-करसोग मार्ग पर चारकुफरी के पास भी पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण सड़क करीब दो घंटे तक बंद रही थी। इसके बाद सड़क से मलबा हटाकर यातायात बहाल किया गया था।

मंडी-धर्मपुर मार्ग बंद रहने से स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की दिनचर्या प्रभावित हुई है। सुबह नौकरी और काम के लिए निकलने वाले लोगों को समय पर अपने कार्यस्थल तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। कई लोगों के लिए यह मार्ग रोजाना आने-जाने का प्रमुख रास्ता है। ऐसे में अचानक सड़क बंद हो जाने से उन्हें वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी पड़ रही है। जिन लोगों के पास वैकल्पिक साधन या मार्ग उपलब्ध नहीं है, उन्हें पैदल ही आगे बढ़ना पड़ रहा है।

स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए भी स्थिति मुश्किल हो गई है। सड़क पर यातायात बंद होने के कारण बच्चों को सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है। अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है, क्योंकि पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा अभी भी मौजूद है। बच्चों के साथ बुजुर्ग और महिलाएं भी प्रभावित हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क जल्द नहीं खुली तो रोजाना आने-जाने वाले हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सड़क बंद होने से सार्वजनिक परिवहन पर भी असर पड़ा है। बसों और छोटे वाहनों की आवाजाही रुकने से यात्रियों को बीच रास्ते में उतरना पड़ रहा है। कुछ यात्रियों को आगे जाने के लिए पैदल रास्ता तय करना पड़ रहा है। करीब 7 किलोमीटर पैदल चलने की स्थिति ने उन लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है जिन्हें रोजाना समय पर कार्यालय, स्कूल या अन्य जरूरी स्थानों पर पहुंचना होता है।

पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण सड़क खोलने में भी सावधानी बरतनी पड़ रही है। ऐसे स्थानों पर मशीनरी भेजकर मलबा हटाना ही पर्याप्त नहीं होता, क्योंकि ऊपर से दोबारा पत्थर गिरने की आशंका बनी रहती है। सड़क साफ करने वाली टीम को पहले स्थिति का आकलन करना पड़ता है और उसके बाद सुरक्षित तरीके से मलबा हटाने का काम किया जाता है। अगर पहाड़ी का हिस्सा अस्थिर हो तो काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी खतरा बना रहता है।

हिमाचल प्रदेश में इस मानसून के दौरान बारिश और भूस्खलन से सड़क नेटवर्क कई बार प्रभावित हुआ है। सितंबर की शुरुआत में भी प्रदेश में दर्जनों सड़कें बंद थीं और मंडी समेत कई जिलों में भूस्खलन के कारण यातायात प्रभावित हुआ था। मौसम विभाग की ओर से बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना के बीच पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और भूस्खलन को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत लगातार बनी हुई है।

मंडी जिले के पहाड़ी इलाकों में सड़कें कई जगह खड़ी ढलानों के बीच से गुजरती हैं। बारिश के बाद मिट्टी कमजोर होने और चट्टानों के ढीले पड़ने से अचानक पत्थर सड़क पर आ सकते हैं। ऐसे में सड़क पर फंसे लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा यही रहता है कि सफाई के दौरान या यातायात बहाली के इंतजार में कोई बड़ा पत्थर नीचे न आ जाए। यही वजह है कि प्रशासन और सड़क एजेंसियां अक्सर पूरी तरह सुरक्षित स्थिति बनने के बाद ही यातायात शुरू करने का फैसला करती हैं।

इस मार्ग पर लंबे समय से फंसे यात्रियों की परेशानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ लोगों को वाहन छोड़कर पैदल आगे बढ़ना पड़ा। नौकरीपेशा लोगों के सामने समय पर कार्यालय पहुंचने की चुनौती है, जबकि विद्यार्थियों के लिए स्कूल पहुंचना मुश्किल हो गया है। कई परिवारों के लिए रोजमर्रा की खरीदारी, अस्पताल, सरकारी कार्यालय और अन्य जरूरी काम भी इसी मार्ग पर निर्भर रहते हैं। सड़क बंद होने से इन सभी गतिविधियों पर असर पड़ता है।

स्थानीय लोगों के लिए सड़क सिर्फ यातायात का साधन नहीं बल्कि उनकी रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुकानदारों तक सामान पहुंचाने वाले वाहन, दूध और सब्जी की सप्लाई, स्कूल बसें, निजी वाहन और सार्वजनिक परिवहन इसी तरह के मार्गों पर निर्भर रहते हैं। लंबे समय तक सड़क बंद रहने पर इसका असर व्यापार और आवश्यक सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क बंद होने की स्थिति में वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती होती है। कई वैकल्पिक रास्ते संकरे होते हैं और उन पर बड़े वाहनों की आवाजाही संभव नहीं होती। ऐसे में छोटे वाहनों को डायवर्ट किया जा सकता है, लेकिन भारी वाहनों और बसों को सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ता है। इससे मुख्य मार्ग पर फंसे यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है।

मंडी क्षेत्र में पहले भी राष्ट्रीय राजमार्गों पर चट्टानों और बोल्डरों के कारण सुरक्षा संबंधी खतरे सामने आते रहे हैं। पुराने मामलों में प्रशासन ने बड़े पत्थरों और चट्टानों को हटाने के लिए निर्धारित समय पर हाईवे बंद कर काम कराया था, ताकि वाहन चालकों को अचानक पत्थर गिरने से होने वाले हादसों से बचाया जा सके। ऐसे मामलों में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यातायात रोकने का फैसला लिया जाता है।

फिलहाल मंडी-धर्मपुर मार्ग पर लोगों की सबसे बड़ी मांग जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से यातायात बहाल करने की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क को केवल मलबा हटाकर खोलने के बजाय पहाड़ी से लगातार गिर रहे पत्थरों की समस्या का स्थायी समाधान भी जरूरी है। यदि ऊपर से पत्थर गिरने का सिलसिला जारी रहा तो सड़क साफ होने के बाद भी दोबारा मार्ग बंद होने का खतरा बना रहेगा।

सड़क बंद रहने के कारण जिन लोगों को पैदल सफर करना पड़ रहा है, उनके लिए सुरक्षा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। खासकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को ऐसे हिस्सों से गुजरते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। जहां पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा हो, वहां पैदल यात्रियों को रोकना और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है।

स्थानीय स्तर पर लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि रोजाना आने-जाने वाले मार्ग पर लंबे समय तक यातायात बाधित होने से उनकी दिनचर्या पूरी तरह बिगड़ रही है। नौकरीपेशा लोग समय पर कार्यालय नहीं पहुंच पा रहे हैं और बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी हो रही है। कुछ यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए सामान्य समय से कई गुना अधिक समय लग रहा है।

मौसम साफ होने और पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा कम होने के बाद सड़क से मलबा हटाकर यातायात बहाल किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, मार्ग को खोलने से पहले यह देखना जरूरी होगा कि ऊपर की पहाड़ी पूरी तरह स्थिर है या नहीं। यदि पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है तो जल्दबाजी में यातायात शुरू करना यात्रियों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

मंडी-धर्मपुर NH पर बने हालात एक बार फिर पहाड़ी सड़कों की संवेदनशीलता को सामने लाते हैं। बारिश के दौरान सड़क पर सिर्फ मलबा आने की समस्या नहीं होती, बल्कि ऊपर से गिरने वाले पत्थर और चट्टानें भी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। ऐसे में यात्रियों के लिए जरूरी है कि सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही सफर करें और बंद मार्ग पर जबरन आगे बढ़ने से बचें।

फिलहाल नौकरीपेशा लोगों, स्कूली बच्चों और स्थानीय यात्रियों को सड़क खुलने का इंतजार है। करीब 13 घंटे से यातायात प्रभावित होने के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। प्रशासन और सड़क एजेंसियों की प्राथमिकता सुरक्षित तरीके से मलबा हटाकर मार्ग को बहाल करना होगी। जब तक पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक लोगों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने या यात्रा टालने की सलाह दी जा सकती है।

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