पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मिलन प्रधान के खिलाफ रविवार को एक और मामला दर्ज किया गया, जिसके बाद उनके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या पांच हो गई है। इससे पहले उनके खिलाफ 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े तीन मामले लंबित थे और चौथे मामले में भी पुलिस ने गिरफ्तारी वारंट पेश किया था। अब पांचवां मामला दर्ज होने के बाद कांग्रेस ने उनकी जमानत के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करने की बात कही है। मिलन प्रधान फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और उन्हें 3 अक्टूबर तक जेल भेजा गया है।
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को विधानसभा उपचुनाव होना है। रिपोर्टों के अनुसार, 18 सितंबर को उन्हें 2007 में दर्ज पुराने मामलों से संबंधित लंबित गैर-जमानती वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया और 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसका मतलब यह है कि चुनाव प्रचार समाप्त होने से ठीक पहले तक उनके जेल में रहने की स्थिति बन गई है। चुनाव प्रचार की अंतिम तारीख 4 अक्टूबर बताई गई है।
मामले में पुलिस का कहना है कि मिलन प्रधान के खिलाफ लंबे समय से गैर-जमानती वारंट लंबित थे और पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक, पुराने मामलों में हत्या, दंगा, जानलेवा हमला, अपहरण, आपराधिक धमकी और आर्म्स एक्ट से जुड़े आरोप शामिल हैं। इन मामलों का संबंध 2007 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के विरोध में हुए आंदोलन से बताया गया है। पुलिस का पक्ष है कि गिरफ्तारी लंबित वारंट के आधार पर की गई है।
दूसरी ओर कांग्रेस ने गिरफ्तारी के समय और लगातार नए कानूनी मामलों के सामने आने पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि मिलन प्रधान को एक के बाद एक मामलों में उलझाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अजितेश पांडे ने कहा कि पार्टी उनकी जमानत के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट जाएगी। कांग्रेस का दावा है कि पुराने मामलों में कार्रवाई ऐसे समय हो रही है जब नंदीग्राम उपचुनाव नजदीक है।
रविवार को दर्ज हुआ पांचवां मामला इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को खेजुरी पुलिस की ओर से एक चौथे मामले में गिरफ्तारी वारंट पेश किया गया था। इसके अगले दिन यानी रविवार को नंदीग्राम पुलिस ने एक और मामला दर्ज कर दिया। अब मिलन प्रधान को सोमवार को कांथी और हल्दिया की अनुमंडलीय अदालतों में पेश किए जाने की बात कही गई है।
कांग्रेस ने अदालत में यह सवाल उठाने की तैयारी की है कि 19 साल पुराने मामले में अब गिरफ्तारी की आवश्यकता क्यों पड़ी। पार्टी नेताओं का कहना है कि मिलन प्रधान ने हाल में हल्दिया एसडीओ कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से नामांकन दाखिल किया था और नंदीग्राम में चुनाव प्रचार भी कर रहे थे। कांग्रेस के अनुसार, अगर पुलिस को जांच के लिए उनकी जरूरत थी तो उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता था। हालांकि, यह कांग्रेस का पक्ष है और पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी लंबित गैर-जमानती वारंट के आधार पर हुई है।
मिलन प्रधान के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों का इतिहास भी इस मामले को महत्वपूर्ण बनाता है। पुलिस और अदालत से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार, 2007 में नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों में उनका नाम आया था। इनमें से तीन मामलों में वह अब न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि अन्य मामले में भी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस के अनुसार, इन मामलों में उनके खिलाफ वारंट लंबे समय से लंबित थे।
मिलन प्रधान को अदालत द्वारा 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का सीधा असर उनके चुनाव प्रचार पर भी पड़ रहा है। नंदीग्राम उपचुनाव के लिए मतदान 6 अक्टूबर को होना है और चुनाव प्रचार की अंतिम तारीख 4 अक्टूबर है। ऐसे में अगर उनकी हिरासत में कोई बदलाव नहीं होता है तो उम्मीदवार के रूप में उनके लिए सीधे मैदान में प्रचार करने का समय बेहद सीमित रह जाएगा। हालांकि कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार की गिरफ्तारी के बावजूद पार्टी अपना चुनाव अभियान जारी रखेगी।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुबंकर सरकार ने भी कहा है कि पार्टी गिरफ्तारी के बाद पीछे नहीं हटेगी और नंदीग्राम में चुनाव प्रचार जारी रहेगा। पार्टी के अनुसार, उम्मीदवार जेल में होने की स्थिति में उनके चुनाव एजेंट और कार्यकर्ता क्षेत्र में प्रचार की जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे साफ है कि कांग्रेस अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ चुनावी अभियान को भी जारी रखने की तैयारी कर रही है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक राजनीतिक संदर्भ भी है। नंदीग्राम उपचुनाव से कुछ समय पहले ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट ने अपनी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे का नाम वापस लेकर मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की थी। इसके कुछ ही घंटों बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की खबर सामने आई। इसी वजह से गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई। कांग्रेस और ममता बनर्जी के खेमे से इस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए, जबकि पुलिस ने इसे लंबित कानूनी मामलों और वारंट की कार्रवाई बताया है।
कांग्रेस की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि पुराने मामलों को चुनाव के समय दोबारा सक्रिय कर मिलन प्रधान पर दबाव बनाया जा रहा है। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक रूप से प्रभावित कार्रवाई बताया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर पुलिस की ओर से कहा गया है कि कार्रवाई अदालतों द्वारा जारी वारंट और लंबित मामलों के आधार पर की गई है। इसलिए मामले के राजनीतिक पहलू और कानूनी प्रक्रिया को अलग-अलग समझना जरूरी है।
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई लगातार आगे बढ़ रही है। पहले तीन मामलों में उन्हें न्यायिक हिरासत मिली, फिर खेजुरी थाने से जुड़े मामले में गिरफ्तारी वारंट सामने आया और अब नंदीग्राम थाने की ओर से पांचवां मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में कांग्रेस के सामने सबसे तत्काल चुनौती उनकी जमानत कराने की है। पार्टी ने इसी उद्देश्य से कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की बात कही है।
कलकत्ता हाईकोर्ट में मिलन प्रधान की ओर से हिरासत को चुनौती देने की प्रक्रिया भी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत इस मामले पर सुनवाई के लिए तैयार है और उनके वकील ने चुनाव कार्यक्रम को देखते हुए राहत की मांग की है। दलील में यह भी बताया गया कि उम्मीदवार फिलहाल हिरासत में हैं जबकि 6 अक्टूबर को चुनाव होना है और 4 अक्टूबर को प्रचार समाप्त हो जाएगा। अदालत की ओर से आगे क्या आदेश दिया जाता है, इससे उनके चुनाव प्रचार और कानूनी स्थिति पर असर पड़ सकता है।
नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर इस घटनाक्रम ने चुनाव से पहले कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर हलचल बढ़ा दी है। फिलहाल मिलन प्रधान के खिलाफ पांच मामले दर्ज होने की बात सामने आई है और वह न्यायिक हिरासत में हैं। कांग्रेस हाईकोर्ट में जमानत और हिरासत से राहत के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी में है। वहीं पुलिस पुराने मामलों में लंबित वारंट और कानूनी प्रक्रिया को कार्रवाई का आधार बता रही है। आगे की स्थिति अदालत के आदेश और पुलिस की कार्रवाई से स्पष्ट होगी।











