अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित चोरी और गड़बड़ी से जुड़े मामले में पुलिस की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। मामले में गिरफ्तार किए गए आठों आरोपी फिलहाल जेल में बंद हैं और पुलिस चार्जशीट को अंतिम रूप दे चुकी है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक आरोप पत्र कभी भी न्यायालय में दाखिल किया जा सकता है। पुलिस की ओर से जांच के दौरान जुटाए गए बयानों, सीसीटीवी फुटेज, बरामद नकदी और अन्य साक्ष्यों को केस डायरी में शामिल किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार जांच से जुड़े दस्तावेजों का आकार करीब सात हजार पन्नों तक पहुंच गया है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला जून 2026 में सामने आया था। इसके बाद मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित की गई। एसआईटी की शुरुआती जांच के आधार पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। इसके बाद जांच अधिकारी ने अलग-अलग आरोपियों को पुलिस कस्टडी में लेकर पूछताछ की और उनके बयानों तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान किया।
मामले में जिन आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। इनमें कुछ लोग मंदिर की चढ़ावे की रकम की गिनती और उससे जुड़ी व्यवस्था से जुड़े रहे हैं। पुलिस की जांच का एक प्रमुख बिंदु यह रहा कि मंदिर में आने वाली चढ़ावे की रकम की गणना, सुरक्षा और उससे जुड़े रिकॉर्ड में कथित रूप से किस स्तर पर गड़बड़ी हुई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।
पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक जांच के दौरान आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ मंदिर परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई। शुरुआती जांच में 27 अप्रैल से 5 जून के बीच चढ़ावे की रकम को छिपाने या निकालने से जुड़ी 70 से अधिक गतिविधियों का उल्लेख सामने आया था। पुलिस का दावा है कि इन गतिविधियों और आरोपियों की भूमिका को उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के साथ मिलाकर देखा गया है।
चार्जशीट में आरोपियों के बयान, घटनास्थल और मंदिर परिसर की सीसीटीवी फुटेज, बरामद नकदी, वाहन, आभूषण और महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे साक्ष्यों को शामिल किए जाने की बात सामने आई है। जांच से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि पुलिस ने आठों आरोपियों के खिलाफ आरोपों को पुष्ट करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य जुटाने का दावा किया है और अब सभी साक्ष्यों का अंतिम स्तर पर मिलान किया जा रहा है।
मामले में बरामदगी भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पहले सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक आरोपियों से करीब 79.85 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। पुलिस ने बरामद रकम को कथित गबन से जोड़कर जांच की है। इसके अलावा वाहनों और अन्य वस्तुओं की बरामदगी का भी रिकॉर्ड तैयार किया गया है। हालांकि बरामदगी और आरोपों का अंतिम कानूनी निष्कर्ष न्यायालय में पेश होने वाले आरोप पत्र और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा इस मामले में खास महत्व रखती है। 25 जून को एफआईआर दर्ज होने के बाद 90 दिन की अवधि सितंबर में पूरी हो रही है। अलग-अलग रिपोर्टों में 22 सितंबर और 25 सितंबर को लेकर समयसीमा का उल्लेख किया गया है, लेकिन पुलिस की तैयारी 22 से 25 सितंबर के बीच आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल करने की बताई जा रही है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार पुलिस अब किसी भी समय चार्जशीट दाखिल कर सकती है।
इस मामले में आरोपियों की न्यायिक हिरासत भी लगातार बढ़ाई गई है। 19 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 21 सितंबर तक बढ़ाई गई थी। अदालत ने मामले की अगली प्रक्रिया के लिए केस डायरी और जांच से जुड़े दस्तावेजों पर भी ध्यान दिया है। आरोपियों की ओर से जमानत अर्जियां भी दाखिल की गई हैं, जिन पर पुलिस से रिपोर्ट मांगी गई थी।
पुलिस की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। चार्जशीट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि जांच में किन आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य सामने आए हैं और प्रत्येक आरोपी की भूमिका के संबंध में पुलिस का निष्कर्ष क्या है। इसके बाद अदालत उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे की सुनवाई करेगी।
जांच के दौरान दो और नाम सामने आने की बात भी अलग-अलग रिपोर्टों में कही गई है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस गिरफ्तार आठ आरोपियों के अलावा दो अन्य लोगों के नाम चार्जशीट में शामिल कर सकती है। बताया गया है कि ये नाम जांच के दौरान सामने आए और उनकी भूमिका की भी पड़ताल की गई है। हालांकि इन दोनों के खिलाफ कार्रवाई और चार्जशीट में नाम शामिल होने की अंतिम स्थिति पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
मामले की जांच में चढ़ावे की रकम की गणना और सुरक्षा व्यवस्था को भी प्रमुखता से देखा गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी रही कि मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से आने वाली रकम की गिनती के दौरान किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जाती थी, रकम को कहां रखा जाता था और उसे बैंक तक पहुंचाने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी। इसी प्रक्रिया से जुड़े लोगों के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए गए हैं।
पुलिस ने आरोपियों को अलग-अलग समय पर कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी को बरामदगी और दस्तावेजी साक्ष्यों से मिलाया गया। जांच एजेंसी की कोशिश रही कि केवल आरोपियों के बयानों पर निर्भर रहने के बजाय सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग रिकॉर्ड, बरामद रकम और अन्य दस्तावेजों से भी घटनाक्रम की पुष्टि की जाए। इसी वजह से केस डायरी को विस्तृत बनाया गया है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद यह जांच प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रही। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में एसआईटी की भूमिका रही और बाद में जांच की निगरानी तथा प्रक्रिया को लेकर भी कई स्तरों पर कार्रवाई हुई। अगस्त में पुलिस की ओर से कहा गया था कि जांच के कई पहलू पूरे हो चुके हैं और चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी चल रही है। अब सितंबर में जांच अंतिम चरण तक पहुंच गई है।
फिलहाल सबसे बड़ा घटनाक्रम यही है कि पुलिस चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी पूरी कर चुकी है और आठों आरोपी जेल में हैं। यदि निर्धारित अवधि में आरोप पत्र अदालत में दाखिल हो जाता है तो मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी। वहीं अगर दो नए नामों को भी जांच के आधार पर शामिल किया जाता है तो मामले में आरोपियों की संख्या और बढ़ सकती है। इन सभी पहलुओं की अंतिम पुष्टि पुलिस की आधिकारिक चार्जशीट सामने आने के बाद होगी।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब जांच एजेंसी के सामने सबसे महत्वपूर्ण चरण चार्जशीट दाखिल करना है। करीब सात हजार पन्नों की केस डायरी, सीसीटीवी फुटेज, पूछताछ, बरामद नकदी और अन्य साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस का दावा है कि पर्याप्त साक्ष्य जुटाए जा चुके हैं। अब न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद यह तय होगा कि मामले में आगे की सुनवाई किस दिशा में बढ़ती है और आरोपों के संबंध में अदालत के सामने कौन-कौन से साक्ष्य रखे जाते हैं।











