भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी Manika Batra ने एशियन गेम्स टीम से बाहर किए जाने के बाद अपनी प्रतिक्रिया में चयन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वह पिछले दो दशकों से भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और इस दौरान उन्होंने जीत, हार, चयन और गैर-चयन—सब कुछ खेल का हिस्सा मानकर स्वीकार किया है।
स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय टेबल टेनिस स्टार मनिका बत्रा ने एशियन गेम्स टीम से बाहर किए जाने के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, स्पष्टता के अभाव और “मनमाने फैसलों” पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो वह कानूनी कार्रवाई का विकल्प भी अपनाने पर विचार कर सकती हैं। मनिका का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय खेल जगत में चयन प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर लगातार बहस तेज हो रही है।
‘मैं सेलेक्शन नहीं, जवाब मांग रही हूं’ – मनिका बत्रा
अपने विस्तृत बयान में मनिका बत्रा ने साफ किया कि उनका उद्देश्य टीम में चयन की मांग करना नहीं है, बल्कि चयन प्रक्रिया की स्पष्टता और कारणों को समझना है। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए जीत और हार दोनों को स्वीकार किया है, लेकिन जो बात उन्हें सबसे ज्यादा परेशान करती है, वह चयन प्रक्रिया में स्पष्टता की कमी है। मनिका के अनुसार, उन्हें यह नहीं बताया गया कि एशियन गेम्स टीम से बाहर किए जाने का आधार क्या था और किन मानकों पर उनका मूल्यांकन किया गया।
रैंकिंग और चयन प्रक्रिया पर सवाल
वर्तमान में वर्ल्ड रैंकिंग में 51वें स्थान पर मौजूद मनिका बत्रा ने चयन प्रक्रिया में उपयोग किए गए समय-मानकों (timeline) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या चयन पिछले 12 महीनों, 6 महीनों, 2 महीनों या सिर्फ हालिया रैंकिंग के आधार पर किया गया था। उनका कहना है कि टेबल टेनिस में रैंकिंग हर सप्ताह बदलती रहती है, इसलिए केवल एक छोटे समय के प्रदर्शन के आधार पर किसी खिलाड़ी को बाहर करना उचित नहीं माना जा सकता।
मनिका ने यह भी तर्क दिया कि हाल के प्रदर्शन और मौजूदा फॉर्म को चयन प्रक्रिया में उचित महत्व मिलना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इस सीजन में कई शीर्ष एशियाई और उच्च रैंक वाले चीनी खिलाड़ियों को हराया है, जो उनके प्रदर्शन की निरंतरता को दर्शाता है। उनका कहना है कि केवल रैंकिंग नहीं, बल्कि खिलाड़ी की वर्तमान फॉर्म, फिटनेस और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन को भी चयन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
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चयन प्रक्रिया में वोटिंग सिस्टम पर सवाल
मनिका बत्रा ने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि चयन प्रक्रिया में वोटिंग सिस्टम शामिल था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह सच है, तो क्या खिलाड़ियों को यह जानने का अधिकार नहीं है कि किसने और किन आधारों पर उनके खिलाफ या पक्ष में वोट किया। उन्होंने पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि चयन समिति के निर्णयों में शामिल कारणों और मानकों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
मनिका ने यह भी उल्लेख किया कि भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को टीम से बाहर किए जाने पर गंभीर सवाल उठते हैं।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पिछली सफलताओं और उपलब्धियों को नजरअंदाज करना चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। उनका कहना है कि ऐसे निर्णय केवल व्यक्तिगत करियर को नहीं, बल्कि पूरे खेल ढांचे की पारदर्शिता को प्रभावित करते हैं।
प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
अपने बयान में मनिका बत्रा ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, स्थिरता और जवाबदेही (transparency, consistency and accountability) बेहद जरूरी है। उन्होंने सवाल किया कि चयन समिति में कितने सदस्य ऐसे हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है, और कितने लोग ओलंपिक या एशियन गेम्स जैसे बड़े मंचों का अनुभव रखते हैं।
मनिका ने यह भी कहा कि चयन से जुड़े सभी मानदंडों और वोटिंग विवरण को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि खिलाड़ियों और जनता के बीच विश्वास बना रहे।









