मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच Reserve Bank of India (RBI) ने मौद्रिक नीति को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने संकेत दिया है कि फिलहाल ब्याज दरों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी को लेकर जल्दबाजी नहीं की जाएगी।
बिजनेस न्यूज़: मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि फिलहाल ब्याज दरों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी पर विचार करना जल्दबाजी होगी।RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने हालिया बयान में कहा कि केंद्रीय बैंक वैश्विक परिस्थितियों, खासकर पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, लेकिन मौजूदा समय में रेपो रेट बढ़ाने की कोई तात्कालिक आवश्यकता नहीं दिखती।
रेपो रेट को लेकर क्या है RBI का रुख?
गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, यदि RBI को निकट भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होना होता, तो मौद्रिक नीति के रुख को न्यूट्रल से बदलकर “रिस्ट्रिक्टिव” किया जाता। लेकिन ऐसा नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि फिलहाल नीति में कोई आक्रामक बदलाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक “डेटा-ड्रिवन” अप्रोच पर काम कर रहा है और हर निर्णय आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक परिस्थितियों के आधार पर लिया जाएगा।
महंगाई और विकास दर दोनों पर संतुलित नजर
RBI ने हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा था। साथ ही, चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को संशोधित कर 6.6 प्रतिशत कर दिया गया है। महंगाई के मोर्चे पर केंद्रीय बैंक ने खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) के लगभग 5.1 प्रतिशत तक रहने का अनुमान जताया है।
RBI का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते महंगाई पर दबाव बना रह सकता है। विशेष रूप से ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, सप्लाई चेन बाधाएं और भू-राजनीतिक तनाव आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति के प्रमुख कारक हो सकते हैं।

मध्य पूर्व तनाव और कच्चे तेल की भूमिका
वैश्विक ऊर्जा बाजार में हालिया उतार-चढ़ाव का बड़ा कारण मध्य पूर्व में जारी तनाव रहा है। हालांकि, कुछ सकारात्मक संकेतों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। RBI गवर्नर ने बताया कि ईरान-इजरायल संघर्ष में तनाव कम होने और संघर्षविराम जैसे संकेतों से तेल की कीमतों में राहत मिली है। इसके साथ ही उर्वरक (fertilizer) की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।
भारत जैसे आयात-आधारित ऊर्जा अर्थव्यवस्था के लिए तेल की कीमतें महंगाई और चालू खाते के घाटे (CAD) पर सीधा प्रभाव डालती हैं। ऐसे में वैश्विक तेल बाजार की स्थिरता भारत के लिए राहतकारी मानी जा रही है।
वेट एंड वॉच मोड में RBI
RBI ने मौजूदा समय में “वेट एंड वॉच” नीति अपनाई है। केंद्रीय बैंक यह आकलन कर रहा है कि:
- कच्चे तेल की कीमतें आगे किस दिशा में जाएंगी
- मानसून की प्रगति का कृषि उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ेगा
- महंगाई का दबाव किन क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलेगा
- वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार कैसी रहती है
गवर्नर ने यह भी कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ईंधन की कीमतों में बदलाव का असर अन्य वस्तुओं और सेवाओं तक कितना और कितनी तेजी से पहुंचेगा।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा जताया है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, घरेलू मांग, सरकारी निवेश और वित्तीय स्थिरता ने अर्थव्यवस्था को समर्थन दिया है।











