मेरठ में 2500 करोड़ रुपये की लागत से उत्तर प्रदेश की पहली ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) टाउनशिप विकसित की जाएगी। इस परियोजना के तहत 41 हजार से अधिक परिवारों को आवास उपलब्ध कराया जाएगा और दीपावली तक दो ब्लॉक लॉन्च करने की तैयारी है।
मेरठ: मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) की महत्वाकांक्षी TOD टाउनशिप परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। 294 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होने वाली यह उत्तर प्रदेश की पहली ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट टाउनशिप होगी। परियोजना के पूरा होने पर 41 हजार से अधिक परिवारों को आधुनिक आवासीय सुविधाएं मिलेंगी। प्रशासन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में जुटा है, जबकि मेडा दीपावली तक इसके शुरुआती दो ब्लॉक लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है।
यूपी की पहली TOD टाउनशिप के विकास को मिली रफ्तार
मेरठ में विकसित की जा रही ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) टाउनशिप को प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण शहरी विकास परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है। यह परियोजना मोहिउद्दीनपुर क्षेत्र के आसपास स्थित चार गांवों की 294 हेक्टेयर भूमि पर विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य आधुनिक आवासीय सुविधाओं के साथ बेहतर परिवहन नेटवर्क और विश्वस्तरीय शहरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना है।

मेडा इस परियोजना का लेआउट तैयार करने के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। प्रदेश सरकार भी इस महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने के लिए वित्तीय सहयोग प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2025 में परियोजना का शिलान्यास किए जाने के बाद इसके विकास कार्यों को गति मिली है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि दीपावली तक टाउनशिप के दो ब्लॉक बाजार में लॉन्च कर दिए जाएं।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया बनी बड़ी चुनौती
परियोजना के लिए अब तक किसानों की सहमति से 164 हेक्टेयर भूमि प्राप्त की जा चुकी है। हालांकि शेष 130 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण अभी बाकी है। इसी कारण परियोजना के कुछ हिस्सों में कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। मेडा ने जिला प्रशासन से अधिग्रहण प्रक्रिया तेज करने का अनुरोध किया है।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण से पहले सामाजिक समाघात अध्ययन (Social Impact Assessment) कराना अनिवार्य है। इसके लिए शासन से एजेंसी चयन की मांग की गई है। एजेंसी नियुक्त होने के बाद प्रभावित क्षेत्र का सर्वे किया जाएगा और फिर अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी।
सामाजिक समाघात अध्ययन के तहत परियोजना से प्रभावित परिवारों, उनकी आजीविका, संभावित विस्थापन, पुनर्वास और सार्वजनिक संपत्तियों पर पड़ने वाले प्रभाव का मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही ग्रामीणों की आपत्तियों और सुझावों को भी दर्ज किया जाएगा।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी नई टाउनशिप
करीब 2500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए प्रदेश सरकार अब तक 809 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी कर चुकी है। टाउनशिप में 41 हजार से अधिक परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा यहां आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी तमाम सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
परियोजना में इंडोर स्टेडियम, गोल्फ कोर्स, फुटबॉल ग्राउंड, राइडिंग एरिना, मल्टीप्लेक्स, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, ओपन थिएटर, थीम पार्क और मल्टीलेवल पार्किंग जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। इसके साथ ही अस्पताल, बैंक, पब्लिक स्कूल, बैंक्वेट हॉल और झीलनुमा जलाशय भी विकसित किए जाएंगे।
टाउनशिप को पर्यावरण अनुकूल बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यहां सौर ऊर्जा आधारित सुविधाएं और ऊर्जा दक्ष भवन विकसित किए जाएंगे। परिवहन के लिए नमो भारत ट्रेन, मेट्रो, रेलवे स्टेशन और बस अड्डे से जोड़ने वाली फीडर सेवाओं की भी व्यवस्था होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना न केवल मेरठ के शहरी विकास को नई दिशा देगी, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में आधुनिक और योजनाबद्ध आवासीय विकास का एक नया मॉडल भी प्रस्तुत करेगी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ क्षेत्र की रियल एस्टेट गतिविधियों को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।












