मेघालय के दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स में मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने पाइन होम परियोजना का उद्घाटन किया। 5.90 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह पहल पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार, पारंपरिक कौशल और टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
शिलांग: मेघालय के दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स जिले के मावलांगविर गांव में मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने इको-सस्टेनेबल ‘पाइन होम’ परियोजना का उद्घाटन किया। यह पहल पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, पारंपरिक ज्ञान और टिकाऊ पर्यटन को एक साथ बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। सरकार का मानना है कि परियोजना से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार तथा आय के नए अवसर पैदा होंगे।
पर्यावरण अनुकूल पर्यटन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
मुख्यमंत्री ने परियोजना का उद्घाटन करते हुए कहा कि ‘पाइन होम’ केवल पर्यटकों के ठहरने की सुविधा नहीं है, बल्कि यह टिकाऊ विकास की अवधारणा को जमीन पर उतारने का प्रयास है। परियोजना में स्थानीय परंपराओं और आधुनिक तकनीक का संयोजन किया गया है, ताकि पर्यटन के विकास के साथ प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम किया जा सके।
परियोजना में प्राकृतिक गर्माहट बनाए रखने वाली प्रणालियों, पुनर्चक्रित सामग्रियों और वर्षा जल संरक्षण जैसे पर्यावरण अनुकूल उपायों को शामिल किया गया है। निर्माण और डिजाइन को इस तरह तैयार किया गया है कि यह आसपास के प्राकृतिक परिदृश्य के साथ सामंजस्य बनाए रखे।
स्थानीय लोगों और कारीगरों की अहम भूमिका
‘पाइन होम’ के निर्माण में स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। परियोजना के लिए बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री स्थानीय स्तर पर जुटाई गई। सरकार का उद्देश्य स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल के साथ पारंपरिक कौशल को संरक्षित करना और स्थानीय समुदाय को पर्यटन अर्थव्यवस्था से सीधे जोड़ना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन परियोजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें परियोजनाओं के संचालन और आर्थिक लाभ में भी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। इससे पर्यटन का फायदा गांवों और स्थानीय परिवारों तक पहुंचाया जा सकेगा।
करीब 5.90 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ प्रोजेक्ट
‘पाइन होम’ परियोजना पर सरकार ने करीब 5.90 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह निवेश सैत्सनात मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से किया गया। परियोजना में पर्यटकों और स्थानीय समुदाय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई सुविधाएं विकसित की गई हैं।
इस परिसर में रेस्तरां, सामुदायिक हॉल, सम्मेलन और प्रशिक्षण केंद्र, अतिथि कक्ष तथा पर्यटन सूचना केंद्र समेत अन्य सुविधाएं मौजूद हैं। इससे यह स्थान पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय कार्यक्रमों, प्रशिक्षण और सामुदायिक गतिविधियों के लिए भी उपयोगी बन सकता है।
मावसिनराम में ओपन-एयर म्यूजियम का भी उद्घाटन
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने इसी अवसर पर मावसिनराम के ट्वाहलोंगवार ओपन-एयर म्यूजियम का भी दूरस्थ माध्यम से उद्घाटन किया। इस पहल को मेघालय की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय इतिहास के संरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है।
सरकार का जोर पर्यटन के ऐसे मॉडल पर है जिसमें प्राकृतिक सुंदरता के साथ स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और इतिहास को भी पर्यटकों के सामने प्रस्तुत किया जा सके। ओपन-एयर म्यूजियम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
उद्घाटन कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसॉन्ग और पर्यटन मंत्री टिमोथी डी. शिरा भी मौजूद रहे। इसके अलावा विधायक रेनिकटन एल. टोंगखर, मुख्य सचिव डॉ. शकील पी. अहमद, आयुक्त एवं सचिव रोसेटा मैरी कुर्बाह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल हुए।
दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स को पर्यटन केंद्र बनाने की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स को ऐसा पर्यटन गंतव्य बनाना है, जहां पर्यटक केवल कुछ घंटों के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक ठहरें। अधिक समय तक पर्यटकों के रुकने से स्थानीय होटल, होमस्टे, रेस्तरां, हस्तशिल्प और परिवहन क्षेत्र को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है। इनमें मुख्यमंत्री होमस्टे मिशन भी प्रमुख है। इस मिशन के तहत वर्ष 2028 तक पूरे मेघालय में 3,000 होमस्टे स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
होमस्टे मॉडल के जरिए पर्यटकों को स्थानीय जीवनशैली, भोजन और संस्कृति का अनुभव मिलेगा, जबकि ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सकता है।
‘पाइन होम’ बनेगा भविष्य की परियोजनाओं का मॉडल
मुख्यमंत्री ने ‘पाइन होम’ को राज्य में भविष्य की पर्यावरण अनुकूल पर्यटन परियोजनाओं के लिए एक मॉडल के रूप में विकसित करने की बात कही। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए नई इमारतों तथा सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में टिकाऊ तकनीक को प्राथमिकता देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि परियोजना को एक तरह की ‘लिविंग लैबोरेटरी’ के रूप में देखा जाना चाहिए, जहां टिकाऊ निर्माण और सामुदायिक भागीदारी के अनुभवों से भविष्य की परियोजनाओं के लिए सीख ली जा सके।
उनके अनुसार, इन अनुभवों का इस्तेमाल भविष्य में जलवायु-अनुकूल स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों, इको-लॉज और होमस्टे के निर्माण में किया जा सकता है।
शोध और सांस्कृतिक विरासत पर भी सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने पर्यटन के साथ-साथ राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री रिसर्च ग्रांट का उल्लेख करते हुए कहा कि योजना के पहले वर्ष में 48 शोधार्थियों को सहायता दी गई है।
इसके अलावा ‘ट्रेसिंग द रूट्स’ पहल के तहत 75 शोधार्थियों के वियतनाम, कंबोडिया और तिब्बत की यात्रा करने की योजना है। इन शोधार्थियों का उद्देश्य खासी, जयंतिया और गारो समुदायों की ऐतिहासिक उत्पत्ति तथा उनके सामाजिक-सांस्कृतिक सफर का अध्ययन करना है।
इस पहल को मेघालय की जनजातीय विरासत को व्यापक ऐतिहासिक और वैश्विक संदर्भ में समझने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
संतुलित विकास पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि मेघालय का विकास किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने गारो हिल्स, खासी हिल्स और जयंतिया हिल्स के समान और संतुलित विकास की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने ‘पाइन होम’ और ट्वाहलोंगवार ओपन-एयर म्यूजियम को क्रमशः सीखने और अनुभव करने के केंद्र के रूप में विकसित करने की बात कही। सरकार की योजना है कि इनके अनुभवों का इस्तेमाल राज्य के अन्य हिस्सों में भी पर्यावरण, पर्यटन और सामुदायिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं में किया जाए।
कई संस्थाओं और समुदायों की साझेदारी
‘पाइन होम’ परियोजना को तैयार करने में मेघालय पर्यटन विभाग, मेघालयन एज लिमिटेड, पिकासो पुपिल्स, ईमैज आर्किटेक्चर, सैत्सनात मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी तथा मावलांगविर और वाहमाॅवपाट गांवों के समुदायों ने सहयोग किया है।
यह साझेदारी इस बात को रेखांकित करती है कि मेघालय सरकार पर्यटन विकास में सरकारी संस्थाओं के साथ निजी क्षेत्र, विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों को भी जोड़ने की कोशिश कर रही है।
कुल मिलाकर, ‘पाइन होम’ परियोजना मेघालय में पर्यटन को पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आर्थिक विकास के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि सामुदायिक भागीदारी और पर्यावरणीय मानकों को लंबे समय तक बनाए रखा जाता है, तो यह मॉडल राज्य के अन्य पर्यटन क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।












