Meta के स्मार्ट ग्लासेस में Facial Recognition फीचर जोड़े जाने की तैयारी की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, Meta AI ऐप में इससे जुड़े कोड मिले हैं, जिससे प्राइवेसी और बायोमेट्रिक डेटा सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
Tech: Meta अपने स्मार्ट ग्लासेस को और एडवांस बनाने की दिशा में काम कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी Ray-Ban और Oakley स्मार्ट ग्लासेस के लिए Facial Recognition तकनीक विकसित कर रही है। हालांकि यह फीचर अभी लॉन्च नहीं हुआ है, लेकिन इससे जुड़े कोड मिलने के बाद यूजर्स की प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
स्मार्ट ग्लासेस में चेहरे पहचानने की तैयारी
Meta कथित तौर पर अपने स्मार्ट ग्लासेस के लिए एक नए Facial Recognition सिस्टम पर काम कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने इस फीचर को आंतरिक रूप से "NameTag" नाम दिया है। यह तकनीक स्मार्ट ग्लासेस में मौजूद कैमरे की मदद से लोगों के चेहरे पहचानने का काम कर सकती है।
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बताया जा रहा है कि जब सिस्टम किसी व्यक्ति की पहचान करेगा, तो चश्मा पहनने वाले यूजर को उसकी जानकारी मिल जाएगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह फीचर कब तक आम यूजर्स के लिए उपलब्ध होगा।
केवल Meta नेटवर्क से जुड़े लोगों की होगी पहचान
रिपोर्ट के मुताबिक, यह तकनीक किसी सार्वभौमिक फेस सर्च इंजन की तरह काम नहीं करेगी। यानी सड़क पर मौजूद हर व्यक्ति की पहचान नहीं की जाएगी। इसके बजाय सिस्टम केवल उन लोगों को पहचान सकेगा जो यूजर के Meta इकोसिस्टम से जुड़े हैं।
इसमें फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कॉन्टैक्ट्स या कनेक्शन्स शामिल हो सकते हैं। इससे यूजर्स को अपने परिचित लोगों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या लोगों को उनकी जानकारी के बिना पहचाना जाना चाहिए।
ऐप में पहले से मौजूद मिला कोड
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस फीचर के लिए जरूरी कोड जनवरी 2026 में ही Meta AI Companion ऐप में जोड़ा जा चुका था। हालांकि कंपनी ने अभी तक इसे सक्रिय नहीं किया है।
दिलचस्प बात यह है कि Meta पहले सार्वजनिक रूप से कह चुकी है कि वह भविष्य के प्रोडक्ट्स में Facial Recognition तकनीक के संभावित उपयोगों पर विचार कर रही है। अब कोड मिलने के बाद माना जा रहा है कि कंपनी इस दिशा में काफी आगे बढ़ चुकी है।
पहले भी विवादों में रह चुकी है तकनीक
Meta के लिए Facial Recognition कोई नई तकनीक नहीं है। कंपनी ने 2010 में फेसबुक पर फोटो टैगिंग के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम शुरू किया था। कुछ ही वर्षों में यह दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता-आधारित फेस रिकग्निशन नेटवर्क में बदल गया था।
हालांकि, बायोमेट्रिक डेटा के इस्तेमाल को लेकर Meta को कई कानूनी चुनौतियों और मुकदमों का सामना करना पड़ा। बढ़ते विवादों के बीच कंपनी ने 2021 में इस सिस्टम को बंद कर दिया था और एक अरब से अधिक फेस डेटा रिकॉर्ड्स को हटाने की घोषणा की थी।
प्राइवेसी और रेगुलेशन पर बढ़ी बहस
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट ग्लासेस में Facial Recognition तकनीक का इस्तेमाल तकनीकी रूप से उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसके साथ गंभीर प्राइवेसी चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। लोगों की सहमति, बायोमेट्रिक डेटा की सुरक्षा और डेटा उपयोग की पारदर्शिता जैसे मुद्दे आने वाले समय में इस तकनीक की स्वीकृति तय करेंगे।
यदि Meta भविष्य में इस फीचर को लॉन्च करती है, तो उसे तकनीकी नवाचार और यूजर प्राइवेसी के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।











