मेटल सेक्टर में निवेश की नई स्कीम, 23 फरवरी तक NFO खुला, चेक करें डिटेल्स

मिरे असेट निफ्टी मेटल ETF फंड ऑफ फंड्स लॉन्च, न्यूनतम ₹5,000 निवेश पर मेटल और माइनिंग कंपनियों में म्यूचुअल फंड के जरिए आसान निवेश।

मिरे असेट इनवेस्टमेंट मैनेजर्स (Mirae Asset Nifty Metal ETF) ने निफ्टी मेटल ETF फंड ऑफ फंड्स लॉन्च किया। न्यूनतम ₹5,000 से निवेश संभव है। यह स्कीम मेटल और माइनिंग सेक्टर की कंपनियों में जोखिम कम करते हुए निवेश का अवसर देती है।

NFO: मिरे असेट इनवेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) ने निवेशकों के लिए मेटल सेक्टर में निवेश का एक नया विकल्प पेश किया है। कंपनी ने मिरे असेट निफ्टी मेटल ईटीएफ फंड ऑफ फंड्स लॉन्च करने का ऐलान किया है। इस स्कीम के जरिए निवेशक मेटल और माइनिंग सेक्टर की बड़ी कंपनियों में म्यूचुअल फंड के माध्यम से निवेश कर सकेंगे। यह योजना उन लोगों के लिए खास है जो सीधे शेयर बाजार के जोखिम से बचते हुए सेक्टर आधारित निवेश करना चाहते हैं।

एनएफओ की तारीखें तय

इस नई स्कीम का न्यू फंड ऑफर 10 फरवरी 2026 से खुलेगा। निवेशक इसमें 23 फरवरी 2026 तक पैसा लगा सकेंगे। इसके बाद यह स्कीम 27 फरवरी 2026 से दोबारा खरीद और बिक्री के लिए खुल जाएगी। चूंकि यह ओपन एंडेड स्कीम है, इसलिए एनएफओ के बाद भी इसमें निवेश किया जा सकेगा।

स्कीम की बुनियादी जानकारी

इस स्कीम का नाम मिरे असेट निफ्टी मेटल ईटीएफ फंड ऑफ फंड्स है। यह एक ओपन एंडेड फंड ऑफ फंड्स योजना है। इसमें निवेश करने के लिए न्यूनतम राशि ₹5,000 रखी गई है। इसके बाद निवेश ₹1 के गुणक में किया जा सकता है।

अगर कोई निवेशक 15 दिनों के भीतर अपनी यूनिट बेचता है, तो उस पर 0.05 प्रतिशत का एग्जिट चार्ज लगेगा। 15 दिन के बाद यूनिट बेचने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा।

यह फंड निवेश कहां करेगा

यह फंड सीधे शेयर बाजार में निवेश नहीं करेगा। यह मिरे असेट निफ्टी मेटल ईटीएफ में पैसा लगाएगा। यह ईटीएफ निफ्टी मेटल इंडेक्स के प्रदर्शन को ट्रैक करता है।

निफ्टी मेटल इंडेक्स में भारत की उन कंपनियों को शामिल किया जाता है, जो मेटल और खनन कारोबार से जुड़ी हैं। इसमें स्टील, एल्युमिनियम, तांबा और जस्ता बनाने वाली कंपनियां शामिल होती हैं। इसके साथ ही खनन से जुड़ी कंपनियां भी इस इंडेक्स का हिस्सा होती हैं।

निफ्टी मेटल इंडेक्स की संरचना

निफ्टी मेटल इंडेक्स का गठन बाजार पूंजीकरण के आधार पर किया जाता है। इसका मतलब है कि जिन कंपनियों का बाजार में आकार बड़ा होता है, उनका वजन इंडेक्स में ज्यादा रहता है। हालांकि यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि किसी एक कंपनी का हिस्सा बहुत अधिक न हो। इससे इंडेक्स संतुलित बना रहता है और जोखिम कम होता है।

इस इंडेक्स का मकसद भारतीय मेटल सेक्टर की वास्तविक तस्वीर दिखाना है। यही वजह है कि इसमें लौह और गैर लौह दोनों तरह की धातु कंपनियों को जगह दी जाती है।

मेटल सेक्टर की मौजूदा स्थिति

साल 2026 की शुरुआत में मेटल सेक्टर कई बदलावों से गुजर रहा है। वैश्विक स्तर पर बड़े उत्पादक देशों की नीतियां, व्यापार से जुड़े फैसले और कुछ धातुओं की सीमित उपलब्धता बाजार को प्रभावित कर रही है।

भारत में मेटल सेक्टर की मांग का सीधा संबंध बुनियादी ढांचे पर होने वाले खर्च से है। सड़क, रेलवे, आवास, बिजली और उद्योग से जुड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ने से मेटल की मांग मजबूत रहती है।

ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव और हरित ऊर्जा परियोजनाओं के चलते भी कुछ धातुओं की मांग बढ़ रही है।

कीमतों में उतार चढ़ाव का असर

मेटल सेक्टर की एक खासियत यह है कि इसमें कीमतों में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिलता है। कच्चे माल की कीमत, वैश्विक मांग, मुद्रा विनिमय दर और आर्थिक हालात इस सेक्टर को प्रभावित करते हैं।

इसी वजह से मेटल सेक्टर को चक्रीय सेक्टर माना जाता है। जब अर्थव्यवस्था तेजी में होती है, तो इस सेक्टर में अच्छा प्रदर्शन देखने को मिलता है। वहीं मंदी के दौर में इसमें दबाव भी आ सकता है।

निवेशकों के लिए जोखिम की जानकारी

इस स्कीम को बहुत ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि इसमें रिटर्न की संभावना के साथ जोखिम भी अधिक है।

जो निवेशक लंबे समय तक निवेश बनाए रख सकते हैं और बाजार के उतार चढ़ाव को सहन करने की क्षमता रखते हैं, उनके लिए यह स्कीम उपयुक्त हो सकती है। कम जोखिम पसंद करने वाले निवेशकों को इससे दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

मिरे असेट की राय

मिरे असेट इनवेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) के ईटीएफ प्रोडक्ट प्रमुख सिद्धार्थ श्रीवास्तव का कहना है कि निफ्टी मेटल इंडेक्स भारत के मेटल सेक्टर की कंपनियों का व्यापक प्रतिनिधित्व करता है।

उनके मुताबिक इस इंडेक्स में लौह और गैर लौह दोनों तरह की धातु कंपनियां शामिल हैं। फंड ऑफ फंड्स के जरिए निवेशकों को म्यूचुअल फंड के रास्ते इस सेक्टर में निवेश का मौका मिलता है।

उन्होंने यह भी साफ किया कि मेटल सेक्टर आर्थिक परिस्थितियों से काफी प्रभावित रहता है, इसलिए इसमें निवेश सोच समझकर करना चाहिए।

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