महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार के मंत्री मानिकराव कोकाटे का इस्तीफा राज्यपाल द्वारा स्वीकार कर लिया गया है।
मुंबई: अजित पवार की एनसीपी के नेता माणिकराव कोकाटे का इस्तीफा राज्यपाल ने मंजूर कर लिया है। एक ही साल में यह एनसीपी के दूसरे मंत्री का इस्तीफा है। धनंजय मुंडे के बाद माणिकराव कोकाटे ऐसे दूसरे मंत्री हैं जिनका इस्तीफ़ा मंजूर हुआ है। वहीं, नासिक पुलिस आज सुबह फिर लीलावती अस्पताल पहुंची।
जानकारी के अनुसार, माणिकराव कोकाटे का आज लीलावती हॉस्पिटल में एंजियोग्राफी टेस्ट होगा। इस टेस्ट के बाद उनके डिस्चार्ज पर फैसला लिया जाएगा। डिस्चार्ज और कोर्ट के फैसले के बाद नासिक पुलिस उन्हें हिरासत में लेने का निर्णय ले सकती है।
राज्यपाल ने स्वीकार किया इस्तीफा
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कोकाटे का इस्तीफा स्वीकार कर आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इसे राज्यपाल को भेजा था। राज्यपाल ने इस्तीफे को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कोकाटे अब आधिकारिक तौर पर मंत्री पद से बाहर हो गए हैं। वे इस साल इस्तीफा देने वाले एनसीपी के दूसरे मंत्री हैं। इससे पहले धनंजय मुंडे को भी पद छोड़ना पड़ा था।
डिस्चार्ज के बाद हो सकती है गिरफ्तारी
मानिकराव कोकाटे फिलहाल मुंबई के बांद्रा स्थित लीलावती अस्पताल में भर्ती हैं। गुरुवार रात नासिक पुलिस की एक टीम गैर-जमानती वारंट लेकर अस्पताल पहुंची। एसीपी संदीप मिटके के नेतृत्व में पुलिस अधिकारियों ने कोकाटे का इलाज कर रहे डॉक्टरों से मुलाकात की और उनकी मेडिकल स्थिति की जानकारी ली।
पुलिस अधिकारियों को बताया गया कि शुक्रवार को कोकाटे की एंजियोग्राफी जांच होनी है। यदि रिपोर्ट सामान्य रहती है और डॉक्टर डिस्चार्ज की अनुमति देते हैं, तो पुलिस उन्हें तुरंत हिरासत में ले सकती है। नासिक पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जैसे ही कोकाटे को अस्पताल से छुट्टी मिलेगी, उन्हें गैर-जमानती वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया जाएगा। पुलिस ने अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों के बयान भी दर्ज कर लिए हैं, ताकि कानूनी प्रक्रिया में कोई अड़चन न आए।
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क्या है पूरा मामला?
मानिकराव कोकाटे पर धोखाधड़ी और जालसाजी का गंभीर आरोप है। मामला वर्ष 1995 का है, जब उन्होंने कथित तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षित कोटे का लाभ लेने के लिए अपनी आय कम दिखाकर दो फ्लैट हासिल किए थे। इस मामले में निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई थी।
हाल ही में अदालत ने उनकी दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा, जिसके बाद उनके मंत्री पद पर बने रहने को लेकर सवाल खड़े हो गए। इसी फैसले के बाद उन्होंने उपमुख्यमंत्री अजित पवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इस्तीफा देने से एक दिन पहले ही सरकार ने कोकाटे से उनके सभी विभाग वापस ले लिए थे। वे महाराष्ट्र सरकार में खेल एवं युवा कार्य, अल्पसंख्यक कार्य और वक्फ मंत्रालय संभाल रहे थे। विभाग वापस लिए जाने को राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा संकेत माना गया था।











