BMC चुनाव से पहले महायुति गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ गया है। शिंदे सेना 2017 के फॉर्मूले पर अड़ी है, जबकि भाजपा जीत की संभावना के आधार पर सीटें तय करना चाहती है।
Mumbai: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा पेंच फंसता दिख रहा है। आगामी बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC – Brihanmumbai Municipal Corporation) चुनावों से पहले महायुति गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच चल रही बातचीत फिलहाल किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। इस खींचतान ने यह साफ कर दिया है कि मुंबई की राजनीति में रास्ता आसान नहीं रहने वाला।
2017 वाला फॉर्मूला लागू करने की शिंदे की मांग
सूत्रों के मुताबिक, महायुति के नेताओं के बीच हुई हालिया बैठक में शिंदे गुट की शिवसेना ने 2017 के बीएमसी चुनावों का हवाला देते हुए बड़ा दावा ठोक दिया। शिंदे सेना ने मांग की कि अविभाजित शिवसेना ने 2017 में जिन 84 सीटों पर जीत हासिल की थी, वही सभी सीटें अब उन्हें दी जाएं। शिंदे गुट का तर्क है कि शिवसेना की पारंपरिक ताकत और कैडर अभी भी उन्हीं इलाकों में मजबूत है, इसलिए पुराने परिणामों को आधार बनाया जाना चाहिए।
हालांकि, यह मांग भाजपा को कतई मंजूर नहीं हुई और यहीं से बातचीत में बड़ा टकराव पैदा हो गया।
भाजपा ने क्यों ठुकराई शिंदे सेना की मांग
भाजपा नेताओं का कहना है कि 2017 और वर्तमान राजनीतिक हालात में जमीन-आसमान का अंतर है। पार्टी का मानना है कि उस समय शिवसेना एकजुट थी, जबकि अब वह दो धड़ों में बंटी हुई है। भाजपा का साफ कहना है कि यदि शिंदे सेना और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT – Uddhav Balasaheb Thackeray) के बीच सीधे मुकाबले वाली सीटों पर गलत बंटवारा हुआ, तो इसका सीधा नुकसान महायुति को हो सकता है।
भाजपा ने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन में किसी एक दल को पुराने आंकड़ों के आधार पर ज्यादा सीटें देना व्यवहारिक नहीं होगा। पार्टी चाहती है कि सीट बंटवारे में वर्तमान राजनीतिक ताकत, संगठनात्मक पकड़ और जमीनी हालात को प्राथमिकता दी जाए।
‘जीत की संभावना’ बनेगी सीट बंटवारे की कसौटी
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भाजपा ने शिंदे सेना के सामने अपना फॉर्मूला साफ कर दिया है। पार्टी का कहना है कि सीट बंटवारा ‘जीत की संभावना’ (Winning Probability) के आधार पर किया जाएगा। यानी जिन वार्डों और इलाकों में शिंदे सेना की मजबूत उपस्थिति है, वहीं उसे सीटें दी जाएंगी।
भाजपा का यह भी दावा है कि बीएमसी की कुल 227 सीटों में से करीब 77 सीटें ऐसी हैं, जहां दोनों दलों की दावेदारी है और यहीं पर सबसे ज्यादा विवाद है। पार्टी का मानना है कि इन सीटों पर सही रणनीति नहीं बनी, तो चुनावी नुकसान तय है।
अगले दो दिन अहम, सीनियर नेताओं की एंट्री संभव
महायुति के भीतर बने इस गतिरोध को लेकर संकेत हैं कि अगले दो दिन बेहद अहम हो सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा और शिंदे सेना के वरिष्ठ नेता आपसी बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। जरूरत पड़ी तो राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को भी बीच में लाया जा सकता है।
राज्य चुनाव आयोग ने किया चुनाव कार्यक्रम का ऐलान
इस बीच महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने बीएमसी सहित राज्य के 29 नगर निगमों के चुनावों का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। आयोग के अनुसार, सभी नगर निगमों में मतदान 15 जनवरी 2026 को एक ही चरण में कराया जाएगा। मतगणना और नतीजे 16 जनवरी 2026 को घोषित किए जाएंगे।
चुनाव कार्यक्रम सामने आने के बाद सभी दलों पर रणनीति तय करने का दबाव और बढ़ गया है। महायुति के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सीट बंटवारे का फैसला जल्द से जल्द किया जाए, ताकि उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जा सके।
मुंबई भाजपा ने चुनावी तैयारी तेज की
बीएमसी चुनावों को लेकर भाजपा ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित सतम ने उम्मीदवारों के चयन के लिए 20 सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में पार्टी के कई बड़े और प्रभावशाली नेताओं को शामिल किया गया है।
समिति में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर, राज्य सरकार के कई मंत्री और विधायक शामिल हैं। यह समिति वार्ड स्तर पर उम्मीदवारों के चयन, संगठन की मजबूती और चुनावी रणनीति पर काम करेगी।











