भारत में महिला आरक्षण विधेयक के लोकसभा में पास न हो पाने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। Upendra Kushwaha ने इस मुद्दे को लेकर बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन के अन्य नेताओं ने भी विपक्ष पर तीखा हमला बोला है।
पटना: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के पास न हो पाने के बाद सियासत तेज हो गई है। सत्ता पक्ष के नेता अब विपक्ष पर हमलावर हैं और इसे महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना रहे हैं। Upendra Kushwaha, जो Rashtriya Lok Morcha (रालोमो) के प्रमुख और सांसद हैं, ने इस मुद्दे पर बड़ा कदम उठाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के इस कृत्य को जनता के बीच ले जाया जाएगा और इसके खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।
कुशवाहा ने अपने एक्स पोस्ट में आरोप लगाया कि महिला आरक्षण विधेयक के विरोध में वोट देकर Indian National Congress और INDIA alliance की पार्टियों ने देश की आधी आबादी को लोकसभा और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व से वंचित किया है।
कुशवाहा का ऐलान: जनता के बीच ले जाएंगे मुद्दा
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख Upendra Kushwaha ने महिला आरक्षण विधेयक के गिरने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने लोकसभा में इस विधेयक के खिलाफ वोट देकर देश की “आधी आबादी” को उनके अधिकारों से वंचित किया है। कुशवाहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह इस मुद्दे को देशभर में जनता के बीच ले जाएंगे और विपक्ष के इस रवैये को उजागर करेंगे। उनके अनुसार, यदि विपक्ष ने समर्थन दिया होता, तो संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ सकती थी।
Upendra Kushwaha ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों के रुख ने उनका “महिला विरोधी चेहरा” उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक के जरिए न केवल महिला आरक्षण लागू किया जा सकता था, बल्कि सीटों की संख्या बढ़ाकर प्रतिनिधित्व को और मजबूत किया जा सकता था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन इसके लिए जातीय जनगणना पूरी होना जरूरी है।
NDA के अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया

इस मुद्दे पर Santosh Kumar Suman (केंद्रीय मंत्री और Jitan Ram Manjhi के पुत्र) ने भी विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक विधेयक का गिरना नहीं है, बल्कि देश की महिलाओं के विश्वास को ठेस पहुंचाना है। संतोष सुमन ने कहा कि:
- विपक्ष की प्राथमिकता महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं है
- वे केवल राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे मुद्दों का इस्तेमाल करते हैं
- इस फैसले से महिलाओं के बीच विपक्ष की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है
महिला आरक्षण विधेयक लंबे समय से भारतीय राजनीति का अहम मुद्दा रहा है। इसका उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण सुनिश्चित करना है, ताकि राजनीतिक प्रतिनिधित्व में लैंगिक संतुलन लाया जा सके। हालांकि, इस बार भी विधेयक को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि इस विषय पर अब भी राजनीतिक सहमति नहीं बन पाई है।
OBC आरक्षण और जनगणना का मुद्दा
इस पूरे विवाद में OBC आरक्षण और जातीय जनगणना भी प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने आए हैं। Upendra Kushwaha ने कहा कि OBC वर्ग के लिए आरक्षण तभी संभव है जब जातीय आंकड़े स्पष्ट हों। वर्तमान प्रस्ताव में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान था, लेकिन OBC को शामिल नहीं किया गया, जो विपक्ष के विरोध का एक प्रमुख कारण बना।









