मध्य प्रदेश के उज्जैन की निकिता पोरवाल इन दिनों मिस वर्ल्ड 2026 के 75वें वर्षगांठ संस्करण में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। दुनिया भर के 130 से अधिक देशों और क्षेत्रों की प्रतिभागियों के बीच भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी है।
Nikita Porwal: मध्य प्रदेश के उज्जैन से निकलकर मिस वर्ल्ड के 75वें संस्करण के वैश्विक मंच तक पहुंचीं भारत की प्रतिनिधि निकिता पोरवाल इन दिनों अपनी तैयारी, आत्मविश्वास और सामाजिक पहल को लेकर चर्चा में हैं। 140 से अधिक देशों के प्रतिभागियों के बीच भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं निकिता का कहना है कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके छोटे शहर या पिन कोड से नहीं, बल्कि उसकी सोच, प्रतिभा और अवसर के लिए की गई तैयारी से तय होती है।
वियतनाम में आयोजित मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के दौरान निकिता ने फिटनेस, मानसिक संतुलन, भारतीय संस्कृति, थिएटर और अपने ‘माटी’ (Maati) सामाजिक प्रोजेक्ट पर विस्तार से बात की। उनका संदेश खासतौर पर छोटे शहरों और सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने वाले युवाओं के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है।
‘भारत की कहानी को दुनिया तक पहुंचाना बड़ी जिम्मेदारी’
निकिता पोरवाल के मुताबिक, मिस वर्ल्ड जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व केवल एक प्रतियोगिता में हिस्सा लेना नहीं है। उनके लिए यह दुनिया के सामने भारत की विविधता, संस्कृति और आधुनिक सोच को प्रस्तुत करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि वह एक ऐसे भारत की तस्वीर दुनिया के सामने रखना चाहती हैं, जो अपनी प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा होने के साथ-साथ विज्ञान, तकनीक और आधुनिक विकास के क्षेत्र में भी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
निकिता का मानना है कि भारतीय परंपरा और आधुनिकता को एक-दूसरे के विरोध में देखने की जरूरत नहीं है। दोनों मिलकर देश की पहचान को और मजबूत बनाते हैं। भारत का सदियों पुराना ज्ञान, सांस्कृतिक विरासत और नई तकनीक के क्षेत्र में प्रगति एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।
‘छोटा शहर आपकी क्षमता तय नहीं करता’
उज्जैन से मिस इंडिया और फिर मिस वर्ल्ड के मंच तक पहुंचने के अपने सफर को याद करते हुए निकिता ने छोटे शहरों की लड़कियों और युवाओं को खास संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का शहर, पता या पिन कोड उसकी क्षमता की सीमा तय नहीं कर सकता। संसाधनों की कमी चुनौतियां जरूर पैदा कर सकती है, लेकिन सही तैयारी और मजबूत इरादे अवसर मिलने पर बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं।
निकिता के अनुसार, हर युवा को खुद को लगातार तैयार करते रहना चाहिए ताकि जब जीवन में कोई बड़ा अवसर सामने आए, तो वह उसका पूरा फायदा उठा सके। उनका संदेश है कि सपनों को अपने शहर की सीमाओं तक सीमित नहीं करना चाहिए, क्योंकि दुनिया आखिरकार प्रतिभा और काम को पहचानती है।
व्यस्त कार्यक्रम के बीच ऐसे रखती हैं खुद को फिट
मिस वर्ल्ड जैसी प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को लगातार यात्रा, फोटोशूट, सार्वजनिक कार्यक्रम और अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेना पड़ता है। इस व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद निकिता अपनी फिटनेस और दिनचर्या को प्राथमिकता देती हैं। उन्होंने बताया कि उनके लिए सही पोषण सबसे महत्वपूर्ण है। वह अपने भोजन में प्रोटीन, फल, हरी सब्जियां और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल करने की कोशिश करती हैं।
वर्कआउट के लिए वह हमेशा जिम पर निर्भर नहीं रहतीं। समय कम होने पर होटल के कमरे में भी लगभग 20 मिनट का छोटा फिटनेस सेशन कर लेती हैं। इसमें बॉडीवेट स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, मोबिलिटी एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और ब्रीदिंग तकनीक शामिल रहती हैं। उनका मानना है कि फिटनेस के लिए महंगे संसाधनों से अधिक जरूरी नियमितता और अनुशासन है।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए ‘उद्देश्य’ पर रखती हैं ध्यान

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के दबाव और लगातार व्यस्तता के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती है। निकिता ने बताया कि जब ओवरथिंकिंग या तनाव बढ़ने लगता है, तो वह कुछ मिनट के लिए अपने मूल उद्देश्य को याद करती हैं। उनके अनुसार, दबाव पर लगातार ध्यान देने के बजाय यह याद करना उपयोगी होता है कि आपने अपना सफर आखिर शुरू क्यों किया था। वह माइंडफुलनेस, ब्रीदिंग और अपने लक्ष्य पर दोबारा ध्यान केंद्रित करने को मानसिक शांति बनाए रखने का अहम तरीका मानती हैं।
थिएटर ने सिखाया लोगों से जुड़ना
निकिता पोरवाल थिएटर से भी लंबे समय से जुड़ी रही हैं। उनका कहना है कि रंगमंच ने उन्हें केवल मंच पर प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि लोगों को सुनना और भावनाओं को ईमानदारी से व्यक्त करना सिखाया। उनके मुताबिक, मंच केवल खुद को साबित करने की जगह नहीं है, बल्कि दर्शकों से जुड़ने का माध्यम है। लोग किसी व्यक्ति के शब्द भूल सकते हैं, लेकिन यह याद रखते हैं कि उस व्यक्ति ने उन्हें कैसा महसूस कराया। निकिता मानती हैं कि यही सीख मिस वर्ल्ड जैसे मंच पर उनके लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
आदिवासी महिलाओं और बच्चों के लिए ‘माटी’ प्रोजेक्ट
मिस वर्ल्ड के प्रतिष्ठित Beauty With a Purpose राउंड के लिए निकिता का सामाजिक प्रोजेक्ट ‘माटी’ आदिवासी महिलाओं और बच्चों के सशक्तीकरण पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि भारत के आदिवासी समुदायों ने संस्कृति और प्रकृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका उद्देश्य इन समुदायों की ओर से केवल बोलना नहीं, बल्कि उनकी जरूरतों, अनुभवों और अधिकारों को व्यापक मंच तक पहुंचाना है। ‘माटी’ के जरिए निकिता बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और सम्मानजनक अवसरों जैसे मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करना चाहती हैं।











