तमिलनाडु में TVK महिला विंग ने DMK नेता एमके स्टालिन के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं। आरोप है कि धारापुरम उपचुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने TVK उम्मीदवार पी. सत्यभामा पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की। पुलिस ने शिकायतों की CSR रसीदें जारी कीं।
तिरुचिरापल्ली: तमिलनाडु में चुनावी बयानबाजी को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) की महिला विंग की सदस्यों ने DMK नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के खिलाफ तिरुचिरापल्ली के कई पुलिस थानों में शिकायतें दर्ज कराई हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि स्टालिन ने धारापुरम विधानसभा उपचुनाव में TVK उम्मीदवार पी. सत्यभामा के खिलाफ चुनाव प्रचार के दौरान कथित रूप से अपमानजनक और व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं। पुलिस के अनुसार, TVK महिला विंग की ओर से शहर के पांच पुलिस थानों में शिकायतें दी गईं।
इनमें श्रीरंगम, थिल्लई नगर और सरकारी अस्पताल पुलिस स्टेशन भी शामिल हैं। पुलिस ने शिकायतें प्राप्त होने की पुष्टि के तौर पर कम्युनिटी सर्विस रजिस्टर (CSR) रसीदें जारी की हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन शिकायतों पर आगे कोई आपराधिक कार्रवाई शुरू की गई है या नहीं। शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच और संबंधित भाषण की समीक्षा के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
पांच पुलिस थानों में शिकायतें
TVK की महिला विंग से जुड़ी शिकायतकर्ताओं ने स्टालिन के कथित भाषण को लेकर अलग-अलग पुलिस थानों में याचिकाएं सौंपीं। पुलिस ने शिकायतों को स्वीकार करते हुए CSR रसीदें जारी कीं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि धारापुरम में DMK उम्मीदवार सुकन्या के लिए प्रचार करते समय स्टालिन ने TVK उम्मीदवार सत्यभामा के नाम और उनके व्यक्तित्व को लेकर कथित तौर पर ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे वे अपमानजनक मानती हैं।
शिकायतों में अधिकारियों से आग्रह किया गया है कि संबंधित भाषण की जांच की जाए और यदि उसमें कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो उचित कार्रवाई की जाए। फिलहाल CSR रसीद जारी होना केवल शिकायत प्राप्त होने का रिकॉर्ड है। इसे आरोपों की पुष्टि या स्टालिन के खिलाफ अपराध सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।
महिला उम्मीदवार के सम्मान का मुद्दा उठाया
TVK महिला विंग की शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार के दौरान एक महिला उम्मीदवार को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना अनुचित है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध विचारधारा और नीतियों तक सीमित रहना चाहिए तथा किसी महिला उम्मीदवार के नाम, रूप-रंग या व्यक्तिगत पहचान को लेकर टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, स्टालिन के भाषण में सत्यभामा के नाम और उनके व्यक्तित्व को लेकर कथित तौर पर उपहास किया गया। उन्होंने इन टिप्पणियों को अपमानजनक और महिला उम्मीदवार को नीचा दिखाने वाला बताया। TVK समर्थकों ने भी इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि चुनावी बहस व्यक्तिगत हमले की सीमा तक पहुंच गई।
पुलिस ने CSR रसीद जारी की
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक शिकायतें प्राप्त होने के बाद संबंधित थानों ने CSR रसीद जारी की। तमिलनाडु में CSR का इस्तेमाल पुलिस के पास प्राप्त शिकायत या याचिका को दर्ज करने के लिए किया जाता है। हालांकि, CSR दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि पुलिस ने आरोपों को सही मान लिया है। आगे की कार्रवाई शिकायत की सामग्री, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित भाषण की जांच पर निर्भर करेगी।
पुलिस ने उपलब्ध जानकारी में यह नहीं बताया कि स्टालिन के खिलाफ FIR दर्ज की गई है या किसी अन्य प्रकार की जांच शुरू की गई है।
चुनाव अधिकारियों के सामने भी मामला पहुंचा
मामला केवल पुलिस तक सीमित नहीं रहा। TVK से जुड़े वकीलों ने कथित टिप्पणियों को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों और संबंधित विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष भी शिकायतें रखने की बात कही है।
वकीलों का तर्क है कि चुनाव लड़ रही किसी महिला उम्मीदवार को प्रचार के दौरान व्यक्तिगत उपहास या अपमान का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कथित भाषण की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।
शिकायतों में अधिकारियों से उन टिप्पणियों पर जवाबदेही तय करने की मांग की गई है, जिन्हें TVK समर्थक आपत्तिजनक मान रहे हैं।
धारापुरम उपचुनाव के दौरान उठा विवाद
यह विवाद तमिलनाडु के धारापुरम विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव के प्रचार अभियान के दौरान सामने आया। धारापुरम तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में स्थित विधानसभा क्षेत्र है और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।
धारापुरम में TVK की ओर से पी. सत्यभामा चुनाव मैदान में थीं। उनका मुकाबला DMK की सुकन्या, AIADMK की भानुमति, CPI के लक्ष्मणन और नाम तमिलर काची की कार्तिका समेत अन्य उम्मीदवारों से था।
उपचुनाव के प्रचार के दौरान विभिन्न दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में अभियान चलाया। इसी दौरान स्टालिन के कथित भाषण को लेकर TVK की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई।
महिला उम्मीदवार के नाम और रूप-रंग पर टिप्पणी का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि स्टालिन ने सत्यभामा के नाम और रूप-रंग को लेकर कथित तौर पर उपहासपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसी भाषा एक महिला उम्मीदवार को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने वाली है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में स्टालिन के कथित भाषण का पूरा आधिकारिक ट्रांसक्रिप्ट या स्वतंत्र रूप से सत्यापित रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। इसलिए शिकायत में बताए गए आरोपों को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले भाषण की वास्तविक रिकॉर्डिंग, संदर्भ और उसमें इस्तेमाल किए गए शब्दों की आधिकारिक जांच महत्वपूर्ण होगी।
TVK ने व्यक्तिगत हमले का लगाया आरोप
TVK समर्थकों का कहना है कि राजनीतिक चुनाव अभियान में प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार की नीतियों और राजनीतिक विचारों की आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन व्यक्तिगत अपमान उचित नहीं है।
महिला विंग की शिकायतों में इसी आधार पर कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने अधिकारियों से कहा है कि चुनाव प्रचार के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा की जांच की जाए और यदि नियमों या कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय की जाए।
इस विवाद ने चुनावी प्रचार में राजनीतिक भाषण की सीमाओं को लेकर भी बहस को जन्म दिया है।
मतदान के बाद भी विवाद जारी
धारापुरम और मदुरांतकम विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को उपचुनाव हुए थे। दोनों सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं। मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के बाद स्टालिन के कथित बयान को लेकर शिकायतें सामने आईं। TVK महिला विंग ने पुलिस और चुनाव अधिकारियों के सामने शिकायत देकर मामले में जवाबदेही की मांग की है। इससे चुनावी प्रचार के दौरान दिए गए भाषणों और उनके राजनीतिक प्रभाव की समीक्षा का मुद्दा सामने आया है।
मदुरांतकम सीट चेंगलपट्टू जिले में है। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में अलग-अलग राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा और चुनाव प्रचार के दौरान विभिन्न मुद्दों को उठाया।
कार्रवाई अब अधिकारियों की जांच पर निर्भर
फिलहाल पुलिस ने शिकायतें स्वीकार कर CSR रसीदें जारी की हैं, लेकिन किसी दंडात्मक कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं है। आगे की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि पुलिस और चुनाव अधिकारी शिकायतों में लगाए गए आरोपों तथा संबंधित भाषण की किस तरह जांच करते हैं।
यदि जांच में किसी चुनावी आचार संहिता, कानून या अन्य लागू प्रावधान के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के पास कार्रवाई के विकल्प हो सकते हैं। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो मामले की स्थिति अलग हो सकती है।
चुनावी भाषण और राजनीतिक मर्यादा पर बहस
यह विवाद तमिलनाडु में चुनावी भाषणों की भाषा और राजनीतिक मर्यादा को लेकर व्यापक बहस का हिस्सा बन सकता है। चुनावों के दौरान नेताओं के बयानों का प्रभाव केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उम्मीदवारों की व्यक्तिगत गरिमा और मतदाताओं के बीच चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।
TVK महिला विंग की शिकायतों ने खास तौर पर महिला उम्मीदवारों के सम्मान और चुनावी प्रचार में व्यक्तिगत टिप्पणियों की सीमा का सवाल उठाया है।
फिलहाल यह मामला शिकायत के स्तर पर है। पुलिस और चुनाव अधिकारियों द्वारा कथित भाषण की समीक्षा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्या किसी कानूनी या चुनावी नियम के उल्लंघन का आधार बनता है। तब तक एम.के. स्टालिन के खिलाफ लगाए गए आरोपों को शिकायतकर्ताओं के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।











