Mohan Bhagwat on Gen-Z: 'नई पीढ़ी भावुक है और शांत मन से नहीं सोचती', मोहन भागवत का बड़ा बयान

Mohan Bhagwat on Gen-Z: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नई पीढ़ी और युवाओं को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी भावुक है और शांत मन से सोचने की जरूरत है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को विवाह और सह-जीवन (Co-Living) संबंधों को लेकर अपनी बात रखी। हैदराबाद में विश्व मांगल्य सभा की ओर से ‘समकालीन मातृत्व’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विवाह एक ऐसा अनुशासन है, जो धर्म की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि सह-जीवन संबंधों की वास्तविकता आज पूरी दुनिया में देखने को मिल रही है।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने Gen-Z यानी नई पीढ़ी के युवाओं की सोच और व्यवहार को लेकर अपनी राय जाहिर की है। उन्होंने कहा कि आज के युवा कई बार भावनाओं से प्रभावित होकर उन चीजों की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जो उन्हें सही प्रतीत होती हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिकता को स्वीकार करना जरूरी है और समय के साथ बदलाव समाज की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है।

मोहन भागवत ने यह बात हैदराबाद में विश्व मांगल्य सभा की ओर से आयोजित 'समकालीन मातृत्व' विषयक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। कार्यक्रम में उन्होंने विवाह, सह-जीवन, आधुनिक जीवनशैली, परिवार, बच्चों और समाज में बदलते मूल्यों सहित कई विषयों पर अपने विचार रखे।

Gen-Z को लेकर मोहन भागवत ने क्या कहा?

Gen-Z पर टिप्पणी करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी के युवा कई बार दूसरों को देखकर प्रभावित होते हैं और भावनात्मक रूप से निर्णय ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को जो बात सही लगती है, वे अक्सर उसी दिशा में आकर्षित हो जाते हैं। भागवत ने युवाओं के संदर्भ में शांत मन से विचार करने और किसी भी निर्णय के व्यापक प्रभाव को समझने की जरूरत पर जोर दिया। 

हालांकि, उन्होंने आधुनिकता को नकारने की बात नहीं कही। उनके अनुसार, समाज को समय के साथ बदलना चाहिए और आधुनिक सोच को स्वीकार करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि बदलाव और आधुनिकता को अपनाना भारतीय परंपरा के खिलाफ नहीं है। हालांकि, बदलते समय के साथ समाज को अपने मूल्यों और जिम्मेदारियों पर भी ध्यान देना चाहिए।

विवाह को बताया सामाजिक अनुशासन

मोहन भागवत ने विवाह संस्था को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों के बीच संबंध नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सामाजिक अनुशासन से जुड़ी व्यवस्था है। उनके मुताबिक, विवाह परिवार और सामाजिक व्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करता है। सह-जीवन यानी लिव-इन रिलेशनशिप का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के संबंधों की वास्तविकता दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देती है। 

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि रिश्तों में जिम्मेदारी की भावना कम हो और व्यक्तिगत खुशी को प्राथमिकता दी जाए, तो इसका समाज पर क्या असर पड़ सकता है। भागवत के अनुसार, आधुनिक समाज में रिश्तों और पारिवारिक संरचना में बदलाव दिखाई दे रहा है। ऐसे में इन बदलावों के सामाजिक परिणामों पर विचार करना भी जरूरी है।

आधुनिकता का स्वागत करने की बात

RSS प्रमुख ने आधुनिकता को पूरी तरह खारिज करने के बजाय उसे स्वीकार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय के साथ बदलना समाज की स्वाभाविक प्रक्रिया है। उनके मुताबिक, नई तकनीक, बदलती जीवनशैली और आधुनिक विचारों को समझना जरूरी है, लेकिन इनके साथ पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

मोहन भागवत ने LGBTQ समुदाय को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि LGBTQ समुदाय समाज का हिस्सा है और उसके सदस्यों को हीन भावना से नहीं देखा जाना चाहिए। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारत सहित दुनिया के कई देशों में LGBTQ अधिकारों, सामाजिक स्वीकार्यता और समानता को लेकर सार्वजनिक चर्चा जारी है।

परिवार में बातचीत को बताया जरूरी

मोहन भागवत ने परिवार के भीतर संवाद को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के बच्चों के मन में कई तरह के सवाल और जिज्ञासाएं होती हैं। ऐसे में माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार के भीतर संवाद की कमी कई समस्याओं को जन्म दे सकती है। बच्चों की चिंताओं और सवालों को समझने के लिए उन्हें पर्याप्त समय देना जरूरी है। साथ ही, माता-पिता को मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर भी अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

भारत में Gen-Z की सामाजिक और सार्वजनिक भूमिका को लेकर हाल के वर्षों में चर्चा तेज हुई है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के दौर में युवा शिक्षा, रोजगार, सामाजिक मुद्दों और शासन से जुड़े विषयों पर अपनी आवाज तेजी से उठा रहे हैं। युवा पीढ़ी की बढ़ती सक्रियता ने देश में Gen-Z की सोच और उसके सामाजिक प्रभाव को लेकर बहस को भी बढ़ाया है। ऐसे समय में मोहन भागवत की टिप्पणी ने आधुनिकता, पारिवारिक मूल्यों और नई पीढ़ी की सोच के बीच संतुलन को लेकर एक नई चर्चा शुरू कर दी है।

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