आर्टेमिस II मिशन से पहले नासा को बड़ा झटका लगा है। मून रॉकेट के अहम वेट ड्रेस रिहर्सल टेस्ट के दौरान हाइड्रोजन फ्यूल लीक की समस्या सामने आई, जिससे लॉन्च में देरी की आशंका बढ़ गई है।
NASA Moon Rocket Fuel Leak: चांद पर इंसानों को फिर से भेजने की तैयारी कर रही अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) को एक बार फिर तकनीकी चुनौती का सामना करना पड़ा है। अपने नए मून रॉकेट के अहम टेस्ट के दौरान नासा को हाइड्रोजन फ्यूल लीक की समस्या झेलनी पड़ी। यह घटना प्रैक्टिस काउंटडाउन के समय हुई, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन तय समय पर लॉन्च हो पाएगा या इसमें देरी होगी।
वेट ड्रेस रिहर्सल टेस्ट क्यों है अहम
नासा का यह टेस्ट वेट ड्रेस रिहर्सल (Wet Dress Rehearsal) कहलाता है। यह लॉन्च से पहले की आखिरी बड़ी प्रैक्टिस होती है, जिसमें रॉकेट को पूरी तरह फ्यूल किया जाता है और असली लॉन्च काउंटडाउन की तरह सभी चरण पूरे किए जाते हैं।
इस टेस्ट का मकसद यह जांचना होता है कि रॉकेट, फ्यूलिंग सिस्टम और ग्राउंड टीम लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार हैं या नहीं। आर्टेमिस II के लिए यह सबसे अहम टेस्ट माना जा रहा था, लेकिन इसी दौरान फ्यूल लीक की समस्या सामने आ गई।
रॉकेट के निचले हिस्से में हाइड्रोजन का जमाव
कैनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Center) में दिनभर चले फ्यूलिंग ऑपरेशन के कुछ ही घंटों बाद इंजीनियरों ने पाया कि रॉकेट के निचले हिस्से में अत्यधिक मात्रा में हाइड्रोजन जमा हो रही है। हाइड्रोजन बेहद ज्वलनशील होती है, इसलिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील मानी जाती है।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लॉन्च टीम ने हाइड्रोजन भरने की प्रक्रिया को कम से कम दो बार रोका। इसके बाद समस्या को नियंत्रित करने के लिए पहले से विकसित तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।
आर्टेमिस I से मिले अनुभव का सहारा
साल 2022 में आर्टेमिस I (Artemis I) टेस्ट फ्लाइट के दौरान भी नासा को इसी तरह की हाइड्रोजन लीक की समस्या का सामना करना पड़ा था। उस समय यह लीक इतनी गंभीर थी कि रॉकेट को महीनों तक लॉन्च पैड पर रोके रखना पड़ा था।
इस बार नासा ने उसी अनुभव के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए। इंजीनियरों ने पहले से विकसित प्रक्रियाओं का इस्तेमाल कर लीक को सीमित रखने की कोशिश की। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि समस्या पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
रॉकेट में कितना फ्यूल भरा गया
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नासा का स्पेस लॉन्च सिस्टम (Space Launch System – SLS) रॉकेट करीब 322 फुट यानी लगभग 98 मीटर लंबा है। इस विशाल रॉकेट में 700,000 गैलन यानी करीब 2.6 मिलियन लीटर सुपर-ठंडा लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन भरा जाना था।
यह फ्यूलिंग प्रक्रिया वास्तविक लॉन्च काउंटडाउन के अंतिम चरणों की नकल थी। फ्यूल लीक के बावजूद नासा ने रॉकेट को पूरी तरह फ्यूल कर लिया और बाद में इसे रिप्लेनिश मोड (Replenish Mode) में डाल दिया। नासा का कहना है कि फ्यूल लीक स्वीकार्य सीमा के भीतर था, लेकिन जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
चार एस्ट्रोनॉट्स ने दूर से देखा टेस्ट
इस मिशन के लिए चुने गए चारों एस्ट्रोनॉट्स इस अहम टेस्ट पर लगातार नजर रख रहे थे। इनमें कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टिना कोच और कनाडा के एस्ट्रोनॉट जेरेमी हेंसन शामिल हैं।
ये सभी ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर (Johnson Space Center) से लगभग 1,600 किलोमीटर दूर थे और पिछले डेढ़ हफ्ते से क्वारंटाइन में रहकर इस टेस्ट को देख रहे थे।
लॉन्च तारीख पर मंडराया खतरा
अगर यह टेस्ट पूरी तरह सफल माना जाता है, तो नासा 8 फरवरी से आर्टेमिस II को लॉन्च करने की कोशिश कर सकता है। लेकिन रॉकेट को हर हाल में 11 फरवरी तक उड़ान भरनी होगी।
अगर इस समयसीमा के भीतर लॉन्च नहीं हो पाता है, तो मिशन को मार्च तक के लिए टालना पड़ सकता है। फरवरी की लॉन्च विंडो पहले ही मौसम की वजह से प्रभावित हो चुकी है और कड़ाके की ठंड के कारण दो दिन पहले ही निकल चुके हैं।
आर्टेमिस II मिशन में क्या होगा
आर्टेमिस II एक 10 दिन का क्रूड मिशन होगा। इस दौरान रॉकेट चांद के पास से गुजरेगा और चांद की दूर वाली सतह के चारों ओर यात्रा करेगा। इसके बाद ओरियन कैप्सूल (Orion Capsule) सीधे पृथ्वी पर लौट आएगा।
इस मिशन में चांद की कक्षा में प्रवेश नहीं किया जाएगा और न ही लैंडिंग की कोई कोशिश होगी। इसका मुख्य उद्देश्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम और अन्य अहम तकनीकी सिस्टम्स का वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण करना है।
क्यों जरूरी है यह मिशन
आर्टेमिस II की सफलता नासा के भविष्य के मून मिशनों के लिए बेहद जरूरी है। इसी मिशन के आधार पर यह तय होगा कि इंसानों को सुरक्षित तरीके से चांद की कक्षा तक भेजा जा सकता है या नहीं। अगर यह मिशन सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में चांद पर लैंडिंग और वहां लंबे समय तक इंसानी मौजूदगी की राह खुलेगी।
आर्टेमिस प्रोग्राम का बड़ा लक्ष्य
आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत नासा आधी सदी से भी ज्यादा समय बाद इंसानों को फिर से चांद की यात्रा पर भेज रहा है। अपोलो मिशन (Apollo Mission) के बाद यह पहला मौका होगा जब क्रू के साथ चांद के लिए उड़ान भरी जाएगी।









