गुजरात के मोरबी में कुएं के पानी में उठीं लहरें, जांच में भूकंप नहीं बल्कि ये वजह आई सामने

गुजरात के मोरबी में कुएं के पानी में लहरें उठने से भूकंप की आशंका हुई। जांच में भारी बारिश के बाद भूजल रिचार्ज को वजह बताया गया है।

गुजरात के मोरबी के वीरपरडा गांव में कुएं का पानी अचानक हिलने और लहरें उठने से लोगों में भूकंप की आशंका बनी। जांच में वैज्ञानिकों ने इसे भूजल रिचार्ज और चट्टानों से हवा निकलने की प्राकृतिक प्रक्रिया बताया।

मोरबी: गुजरात के मोरबी जिले के वीरपरडा गांव में एक कुएं के पानी में अचानक तेज हलचल और लहरें उठने से ग्रामीणों में चिंता फैल गई। करीब 18 फीट गहरे कुएं में कई दिनों से यह गतिविधि देखी जा रही थी। भूकंपीय गतिविधि की आशंका के बीच कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए। शुरुआती वैज्ञानिक जांच में इसका संबंध भूकंप से नहीं, बल्कि भारी बारिश के बाद भूजल रिचार्ज से बताया गया है।

कुएं के पानी में अचानक उठने लगीं लहरें

मोरबी तहसील के वीरपरडा गांव में एक कुएं का पानी अचानक असामान्य तरीके से हिलने लगा। खेत में बने करीब 18 फीट गहरे कुएं में पानी की सतह पर लगातार लहरें दिखाई देने लगीं। यह नजारा देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचने लगे।

कुएं के मालिक प्रांजिवन सदारिया के मुताबिक, उन्होंने पहली बार 2 अगस्त को पानी में यह असामान्य हलचल देखी थी। उनका कहना है कि जब वह खेत पहुंचे तो कुएं का पानी किनारे से बाहर की ओर बहता नजर आया। इसके बाद कई दिनों तक इसी तरह की गतिविधि देखी गई।

घटना का वीडियो और तस्वीरें भी सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। कुछ ग्रामीणों ने इसे भूकंप से पहले होने वाली संभावित गतिविधि से जोड़कर चिंता जताई।

कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

मामला मोरबी के जिला कलेक्टर स्वप्निल खरे के संज्ञान में आने के बाद जांच के निर्देश दिए गए। इसके बाद भू-वैज्ञानिकों ने कुएं और आसपास के क्षेत्र की स्थिति का अध्ययन शुरू किया।

प्रशासन की ओर से साफ किया गया कि शुरुआती जांच में कुएं के पानी में हो रही हलचल और किसी भूकंपीय गतिविधि के बीच संबंध का कोई प्रमाण नहीं मिला है। वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने कुएं की गतिविधि पर निगरानी जारी रखी है।

मोरबी के जियोलॉजिस्ट जेएस वाढेर के अनुसार, अभी तक भूकंप जैसी किसी गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं। उनके मुताबिक, प्रारंभिक तौर पर यह प्राकृतिक भू-वैज्ञानिक प्रक्रिया का परिणाम प्रतीत हो रहा है।

भारी बारिश और भूजल रिचार्ज को माना जा रहा कारण

विशेषज्ञों की शुरुआती जांच में कुएं के पानी में हलचल की सबसे संभावित वजह हाल में हुई भारी बारिश को माना जा रहा है। बारिश के कारण आसपास की जमीन के नीचे मौजूद जलभंडार तेजी से रिचार्ज हो सकते हैं।

जब पानी जमीन की अलग-अलग परतों से होकर नीचे पहुंचता है तो चट्टानों के छिद्रों और दरारों में मौजूद हवा बाहर निकल सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रक्रिया के दौरान कुएं के पानी में दबाव और हलचल पैदा हो सकती है। यही वजह पानी की सतह पर दिखाई देने वाली लहरों का कारण हो सकती है।

गांधीनगर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ सिस्मोलॉजिकल रिसर्च (ISR) के अनुसार, इस क्षेत्र में किसी सक्रिय फॉल्ट लाइन का संकेत नहीं मिला है। इसलिए मौजूदा जानकारी के आधार पर घटना को भूकंप से जोड़ना सही नहीं माना जा रहा है।

तीन महीने पहले ही बनवाया गया था कुआं

कुएं के मालिक ने बताया कि यह कुआं करीब तीन महीने पहले ही बनवाया गया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी में असामान्य हलचल पहली बार रविवार और सोमवार को दिखाई दी। मंगलवार को कुछ समय के लिए गतिविधि कम हुई, लेकिन बुधवार और गुरुवार को फिर पानी में हलचल देखी गई।

खास बात यह है कि आसपास के दूसरे कुओं में ऐसी गतिविधि देखने को नहीं मिली है। इसी वजह से स्थानीय लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई।

वैज्ञानिकों की निगरानी जारी

फिलहाल प्रशासन और वैज्ञानिक इस कुएं की गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञ आगे की जांच के जरिए यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि भूजल स्तर, बारिश और जमीन के नीचे की संरचना इस घटना को किस तरह प्रभावित कर रही है।

हालांकि कुएं में उठती लहरों ने लोगों का ध्यान जरूर खींचा है, लेकिन शुरुआती जांच में इसे भूकंप का संकेत नहीं माना गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार, भारी बारिश के बाद भूजल के तेजी से रिचार्ज होने और भूमिगत चट्टानों से हवा निकलने की प्राकृतिक प्रक्रिया इस असामान्य हलचल की संभावित वजह है।

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