मराठा आरक्षण आंदोलन फिर तेज, मनोज जरांगे की चेतावनी- 'वादा पूरा नहीं हुआ तो मुंबई मार्च होगा'

मराठा आरक्षण आंदोलन फिर तेज हो गया है। मनोज जरांगे ने सरकार को चेतावनी दी है कि वादा पूरा नहीं हुआ तो मुंबई मार्च किया जाएगा। जानें आंदोलन की नई रणनीति और सरकार

मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे Manoj Jarange Patil ने एक बार फिर बड़े मार्च का ऐलान किया है। आरक्षण की मांग को लेकर मराठा समुदाय दोबारा Mumbai की ओर कूच करने की तैयारी में है। इस घोषणा के बाद Maharashtra की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

मुंबई: महाराष्ट्र में एक बार फिर मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। मराठा समुदाय के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटील ने घोषणा की है कि यदि सरकार ने आरक्षण को लेकर किया गया वादा पूरा नहीं किया, तो मराठा समाज दोबारा मुंबई की ओर मार्च करेगा। उन्होंने राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि समुदाय अब अपने अधिकारों के लिए पूरी तरह संगठित है और किसी भी तरह की देरी स्वीकार नहीं करेगा।

फिर शुरू हो सकता है बड़ा आंदोलन

मनोज जरांगे ने कहा कि मराठा समाज लंबे समय से आरक्षण की मांग कर रहा है और सरकार ने पहले भी कई बार आश्वासन दिया है। उनके अनुसार, यदि सरकार ने तय समय में फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन फिर से बड़े स्तर पर शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा, अगर सरकार अपना वादा तोड़ती है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। हम शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकार मांग रहे हैं, लेकिन जरूरत पड़ी तो मुंबई की ओर फिर से मार्च किया जाएगा।

मराठा आंदोलन पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति का बड़ा मुद्दा रहा है और कई बार राज्यव्यापी प्रदर्शन भी हो चुके हैं। आरक्षण के मुद्दे पर सबसे ज्यादा चर्चा हैदराबाद गजट को लेकर हो रही है। सरकार ने संकेत दिया था कि इस पुराने गजट को आधार बनाकर मराठा समुदाय को कुनबी जाति से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

हैदराबाद रियासत के समय जारी इस गजट में कई जातियों और समुदायों का विवरण दर्ज है, जिसमें कुनबी समुदाय को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग बताया गया था। मनोज जरांगे का कहना है कि मराठा और कुनबी एक ही मूल समुदाय से जुड़े हैं, इसलिए मराठा समाज के लोगों को कुनबी प्रमाणपत्र देकर उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में आरक्षण दिया जाना चाहिए।

मराठा आरक्षण आंदोलन फिर तेज, मनोज जरांगे की चेतावनी- 'वादा पूरा नहीं हुआ तो मुंबई मार्च होगा'

सरकार का रुख और राजनीतिक दबाव

महाराष्ट्र सरकार ने पहले कहा था कि जिन परिवारों के रिकॉर्ड हैदराबाद गजट में मिलेंगे, उन्हें कुनबी प्रमाणपत्र दिया जा सकता है। यह फैसला खासतौर पर मराठवाड़ा क्षेत्र के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि स्वतंत्रता से पहले यह इलाका हैदराबाद रियासत का हिस्सा था। मराठवाड़ा के आठ जिलों से जुड़े पुराने दस्तावेजों में खेती, जाति और सामाजिक स्थिति से संबंधित रिकॉर्ड मौजूद हैं। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आरक्षण देने की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मराठा आरक्षण का मुद्दा राज्य की राजनीति में बेहद संवेदनशील है और चुनावी माहौल में इसका असर और बढ़ जाता है। मराठा समुदाय महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली सामाजिक समूहों में से एक माना जाता है। इसलिए आरक्षण से जुड़ा कोई भी फैसला न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।

Leave a comment