राजनांदगांव के धर्मापुर गांव में नाबालिगों के धर्मांतरण का मामला सामने आया है। आश्रम संचालक डेविड चाको पर विदेशी फंडिंग से नेटवर्क चलाने का आरोप है। पुलिस को प्रशिक्षण मॉड्यूल, डिजिटल सबूत और वित्तीय रिकॉर्ड मिले हैं।
Chhattisgarh: राजनांदगांव जिला मुख्यालय से करीब 9 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत धर्मापुर में चल रहे एक आश्रम को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार इस आश्रम में नाबालिग बच्चों को रखकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। यह आश्रम डेविड चाको द्वारा संचालित किया जा रहा था, जो लंबे समय से इसी इलाके में रहकर अपनी गतिविधियां चला रहा था।
पुलिस को जानकारी मिली थी कि आश्रम के जरिए आसपास के करीब 200 घरों में धर्मांतरण की तैयारी की जा रही थी। इसके साथ ही अलग-अलग इलाकों में चर्च खोलने की भी योजना बनाई गई थी। मामला लालबाग थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने जांच तेज कर दी है।
कोड नेम से चल रहा था नेटवर्क
शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस को शक है कि डेविड चाको को अमेरिका से बड़ी रकम मिली थी, जिसका उपयोग स्थानीय स्तर पर धर्मांतरण गतिविधियों के लिए किया गया।
जांच में यह भी पता चला कि नेटवर्क के जमीनी कार्यकर्ता ‘पॉल’ जैसे कोड नेम से काम करते थे। इन लोगों को प्रशिक्षण दिया जाता था और भुगतान के लिए ट्रैवल वाउचर का सहारा लिया जाता था। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पैसा ऑनलाइन भेजा गया या नकद दिया गया, और किन बैंक खातों के जरिए लेन-देन हुआ।
ब्रेनवॉश की तैयारी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दिसंबर 2025 में ग्राम पनेका में चार दिन का एक विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था। इस शिविर में राज्य के अन्य जिलों से भी कई लोग शामिल हुए थे। यहां जमीनी स्तर पर काम करने वालों को विशेष तरीके से तैयार किया जाता था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने सोलर-आधारित प्रोजेक्टर, लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन और बड़ी मात्रा में डिजिटल सामग्री जब्त की है। इन उपकरणों का इस्तेमाल ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में प्रेजेंटेशन दिखाकर लोगों को प्रभावित करने के लिए किया जाता था। पुलिस का कहना है कि इन माध्यमों से लोगों का मानसिक रूप से ब्रेनवॉश किया जाता था।
नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू
8 जनवरी को धर्मापुर से मिली शिकायत के बाद पुलिस सक्रिय हुई। एसपी अंकिता शर्मा और नगर पुलिस अधीक्षक वैशाली जैन के नेतृत्व में टीम ने आश्रम पर छापा मारा। यहां से कांकेर जिले के नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू कर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को सौंपा गया। बाद में बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया।
पुलिस ने संस्था के मुख्य कार्यालय, काम करने के तरीके और नेटवर्क की संरचना की पहचान कर ली है। अब जोनल कमांडर, जोनल लीडर और अन्य वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी की जा रही है।
नेटवर्क का ऑपरेटर
पुलिस के अनुसार डेविड चाको मूल रूप से केरल के एर्नाकुलम जिले का निवासी है। वह छह महीने भारत और छह महीने अमेरिका में रहता था। उसकी विदेश यात्राओं, डिजिटल गतिविधियों और अलग-अलग जिलों में सक्रियता को देखते हुए पुलिस उसे पूरे नेटवर्क का ऑपरेटर मान रही है।
एसपी अंकिता शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण मॉड्यूल, फाइनेंशियल रिकॉर्ड और ट्रैवल प्लान की गहन जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाया जाएगा।










